2012 में मुख्यमंत्री पद छोड़ना चाहती थी शीला, निर्भया कांड के बाद बनी स्थितियों के बाद बदला मन
आदित्या लोक, स्पेशल करोस्पोंडेंट:
नई दिल्ली. मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का शनिवार दोपहर कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। वे 1998 से 2013 तक लगातार तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं। इस दौरान ऐसा वक्त भी था, जब वे बीमारी से परेशान होकर मुख्यमंत्री का पद छोड़ना चाहती थीं। लेकिन 16 दिसंबर 2012 को हुए दिल्ली में निर्भया कांड के दौरान बनी परिस्थितियों के चलते उन्होंने अपना मन बदल लिया।
दीक्षित ने अपनी ऑटोबायोग्राफी, सिटीजन दिल्ली: माई टाइम, माई लाईफ में लिखा था, मेरे परिवार ने मुझसेकहा था कि मुझे हर चीज से पहले स्वास्थ्य की चिंता करने की जरूरत है। मेरा इस्तीफा लगभग तय था। उस वक्त विधानसभा चुनाव में एक साल का समय था। पार्टी के पास मेरा विकल्प खोजने का पर्याप्त समय था।
''निर्भया कांड के वक्त इस्तीफा देना युद्धभूमि को छोड़ने जैसा था''
शीला दीक्षित जिस वक्त पद छोड़ने के फैसले के बारे में कांग्रेस को हाईकमान को बताने का सोच रही थीं, उसी दौरान 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में एक बस में युवती के साथ दुष्कर्म की घटना सामने आई। पूरे देश को दहलाने वाली इस घटना को बाद में निर्भया कांड नाम दिया गया।शीला दीक्षित के मुताबिक, निर्भया हादसे के बाद मैं बंधन में थी। मेरे परिवार ने उस वक्त मेरे तनाव को देखा था। उन्होंने कहा कि जितना जल्दी हो सके, मुझे पद छोड़ देना चाहिए। मुझे लगा कि इस वक्त पद छोड़ना युद्धभूमि को छोड़ने जैसा था।
केंद्र सरकार इस मामले में सीधा दोषारोपण नहीं चाहता था। मैं जानती थी कि इस मामले विपक्ष मेरी सरकार पर आरोप लगाएगा। किसी को तो जिम्मेदारी लेनी थी, इसलिए इसे मैंने अपने ऊपर लेने का फैसला किया।इस घटना ने दीक्षित का मन बदल दिया। उन्होंने लिखा, मैंने तुरंत प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस अफसरों से मामले पर सख्ती से निपटने के लिए कहा। हालांकि, बाद में वे जंतर-मंतर पर जनता द्वारा घटना के विरोध में किए मार्च और विरोध प्रदर्शन में भी शामिल हुईं।
शीला दीक्षित को वेस्टर्न संगीत था पसंद
शीला दीक्षित को युवावस्था से ही वेस्टर्न संगीत पसंद था। वे अपने पसंद के गाने सुनने के लिए रेडियो के पास बैठकर इंतजार करती थीं। उन्हें फुटवियर का भी काफी शौक था। उनके पास इसका अच्छा खासा कलेक्शन भी था। इस बात का जिक्र उन्होंने अपनी ऑटोबायोग्राफी में भी किया। इसके अलावा वे पढ़ना भी काफी पसंद करती थीं। उन्हें फिल्में देखना भी पसंद था। हैमलेट ब्लैक एंड व्हाइट उनकी सबसे पसंदीदा फिल्म थी।
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