पार्टी ड्रग के लिए ऑनलाइन हो रही डील, सिस्टम के लूप होल का फायदा उठा रहे डीलर
आदित्या लोक, स्पेशल करोस्पोंडेंट:
डीबी ओरिजिनल डेस्क. देश के बड़े शहरों में नए जमाने के नए ड्रग अड्डे बन रहे हैं। इनका कनेक्शन पार्टियों से हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनके तार दुनिया के बदनाम कोनों से जुड़े हैं। ऑनलाइन ऑर्डर और डिलिवरी एक नया चैनल बन गया है। इस पर न किसी का नियंत्रण है और न ही नजर।कुछ ही दिनों पहलेमध्य प्रदेश की राजधानीभोपाल में पुलिस ने एमटेक कर रहे एक छात्र के पास से प्रतिबंधित ड्रग्स एमडी/एक्सटेसी पकड़ीहै। आरोपी से 110 ग्राम एमडी जब्त की गई,जिसकी कीमत करीब तीन लाख रुपए है।
ये नशा बड़े शहरों के बिगड़ैलयुवा करते हैं और इसका ज्यादा इस्तेमाल उनके द्वारा आयोजित रेव पार्टियों में किया जाता है। पूछताछ में सूर्यकांत ने दिल्ली, पुणे और महाराष्ट्र से ये ड्रग लाने की बात कही। चार साल पहले जब वह पुणे स्थित कॉलेज के हॉस्टल में पहुंचा, तब वहां 80 बच्चे थे। इनमें से पांच ही ड्रग लेते थे। साल भर बाद ही पांच से बढ़कर ये आंकड़ा 75 पर पहुंच गया।
ऑनलाइन ड्रग की खरीदी बिक्री कैसे हो रही है? ये ड्रग कितने खतरनाक हैं? और यह काम चल कैसे रहा है? हमने इस मुद्दे पर सायबर एक्सपर्ट रक्षित टंडन, मप्र की देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के आईटी के प्रोफेसर डॉ निरंजन श्रीवास्तव, स्कूल ऑफ फॉर्मेसी के प्रोफेसर डॉ. मशीर अहदम खान और भोपाल के पुलिस अधिकारी उमेश यादव से बातचीत की।
पिछले 5 साल में तेजी से बढ़ी पार्टी ड्रग की डिमांड
देशभर में पिछले 5 साल में सिंथेटिक और पार्टी ड्रग की डिमांड तेजी से बढ़ी है। हालांकि गांजा अब भी सबसे ज्यादा जब्त किए जाने वाला नशीला पदार्थ है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के मुताबिक, पार्टी ड्रग्स में एमडीएमए, म्याऊं म्याऊं और मॉली का इस्तेमाल बड़ी मात्रा में किया जा रहा है। ड्रग एन्फोर्समेंट एजेंसीज के अनुसार, मॉली को अवैध तरीके से म्यांमार से भारत लाया जा रहा है। चिंता की बात ये है कि कई प्रतिबंधित ड्रग्स को अलग-अलग नामों से ऑनलाइन ही बेचा जा रहा है।
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