यूपीए-2 में हर साल मिलती थीं औसतन 7.36 लाख नई नौकरियां, मोदी सरकार में 53% घट गईं

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रोजगार की आस लगाए युवाओं को इस बजट ने मायूस किया। इन्हीं युवाओं को सालाना 1 करोड़ नौकरी देने के वादे के साथ मोदी सरकार सत्ता में आई थी। इसे पूरा करने का रास्ता प्रभावी शिक्षा, रोजगार के मौके और स्किल के जरिए आसान होता है। यूपीए-2 की तुलना में अब नई नौकरियां 53% तक घटी हैं। इस पर नॉलेज रिपोर्ट...

शिक्षा: 5 साल में 2% बढ़ा शिक्षा बजट, यूपीए-2 में 80% तक बढ़ाया गया था

यूपीए-2 मोदी सरकार
कुल बजट का औसत और 5.13% हिस्सा शिक्षा को दिया। कुुल बजट में शिक्षा का हिस्सा3.87% रहा

  • 92,275 सरकारी स्कूलों में प्राथमिक और सेकंडरी लेवल पर सभी विषयों के लिए एक शिक्षक है।
  • गांव के चार में से एक स्कूल में बिजली कनेक्शन तक नहीं है। सिर्फ 21% स्कूलों में कंप्यूटर हैं।
  • 5 साल में प्रोफेशनल कोर्स 123% महंगा हुआ : 5 साल में आईआईटी-आईआईएम की फीस 123% और 55% बढ़ी। यूपीए-2 में यह इजाफा 80% व 30% था।

बेरोजगारी दर: 35 साल में कभी 3% से ऊपर नहीं गई, मोदी सरकार में पहुंची 6.1% पर

मौजूदा सरकार में नई नौकरियां 53% घटी हैं। दोनों सरकारों में प्राइमरी 8 सेक्टर्स में मिलने वाले रोजगार का हाल कुछ ऐसा रहा...

यूपीए-2 में मौजूदा सरकार में
7.36 लाख औसत नईं नौकरियां सालाना पैदा हुई 3.50 लाख यानी 53% कम नौकरियों के अवसर पैदा हुए

  • 33 हजार नौकरियों की जरूरत है हर दिन : देश में सालाना 1.2 करोड़ नौकरी यानी हर दिन 33 हजार नई नौकरियों की जरूरत है। तब जाकर बेरोजगारी दर नियत्रंण में आएगी।

स्किल इंडिया: 5% से भी कम लोग पा सके रोजगार लायक स्किल

  • 2022 तक 40 करोड़ लोगों को रोजगार पाने लायक स्किल ट्रेनिंग देने के लिए सरकार 2015 में स्किल इंडिया अभियान लाई। ताकि बेरोजगारी कम हो सके।
  • 230% बढ़ी शहरी युवाओं के बेराेजगार होने की रफ्तार - मौजूदा सरकार में 15 से 29 साल के युवाओं की औसत बेरोजगारी दर 19.22% हो गई। यूपीए-2 में यह आंकड़ा 8.37% के अंदर था।

  • 17.60 लाख में सेपहले साल केवल 5.80 लाख लोग ट्रेनिंग पूरी कर सके।
  • 82 हजार ही रोजगार पात्रता पूरी कर सके
  • 100 साल इस हिसाब से लगेंगे लक्ष्य पूरा करने में।

(सोर्स: लोकसभा और श्रम मंत्रालय, पिछले 10 साल के बजट और स्टेटिक्स एंड प्लानिंग मिनिस्ट्री के आंकड़े।)


युवाओ! अबकी बार, फिर रहना होगा बेरोजगार :

  • बजट भाषण में युवा और नौकरी का जिक्र तो 4-4 बार हुआ, पर नई घोषणा कोई भी नहीं हुई

कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने 105 मिनट के अंतरिम बजट भाषण में करदाताओं से लेकर किसान वर्ग को खुश करने के लिए तो जमकर चौके-छक्के लगाए। लेकिन युवा, शिक्षा और नौकरी जैसे मुद्दों पर गेंद को छुआ तक नहीं। बेरोजगारी के मुद्दे पर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया। सिर्फ इतना कहा गया कि भारत विकास कर रहा है तो नौकरियां तो आएंगी ही। युवा मामलों से संबंधी मंत्रालय का बजट 1% ही बढ़ा। वहीं, एजुकेशन बजट 10% बढ़ाकर 93,848 करोड़ रु. किया गया।

66 करोड़ महिलाओं की सुरक्षा के लिए 174 करोड़ ही बढ़े :
महिलाओं के लिए भी कोई नया एलान नहीं हुआ। सिर्फ पुरानी योजनाएं ही गिनाई गईं। बजट में महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण मिशन के लिए 1330 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो 2018-19 के संशोधित अनुमान के मुकाबले 174 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी की गई है। भाषण में गोयल ने बताया कि मुद्रा योजना के तहत दिए गए 15.56 करोड़ लोन में से 70% लाभार्थी महिलाएं ही हैं।



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