सीबीआई में स्थाई निदेशक की नियुक्ति क्यों नहीं कर रही सरकार: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए सरकार से पूछा है कि सीबीआई में स्थाई निदेशक की नियुक्ति क्यों नहीं की जा रही है। जस्टिस अरुण मिश्रा, नवीन सिन्हा की बेंच ने कहा कि यह पद संवेदनशील है और इस पर अब तक स्थाई निदेशक की नियुक्ति हो जानी चाहिए थी। अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट को बताया कि नए निदेशक की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली हाईपावर्ड कमेटी शुक्रवार को बैठक करने वाली है। इसके बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई 6 फरवरी तक टाल दी है।
कोर्ट ने कहा कि सीबीआई के निदेशक रहे आलोक वर्मा को जनवरी में रिटायर्ड होना था। ऐसे में नए निदेशक की नियुक्ति की प्रक्रिया अब तक पूरी हो जानी चाहिए थी। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई के नए निदेशक को देखना होगा कि जब आलोक वर्मा बतौर निदेशक दो दिन के लिए बहाल हुए थे, तब कौन सी फाईल कहां गई?
अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट को बताया कि हाईपावर्ड कमेटी की मंजूरी लेने के बाद ही आईपीएस अधिकारी एम नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्त किया गया था।
कोर्ट एनजीओ कॉमन कॉज की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उसने नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक बनाने पर आपत्ति जताई गई है। एनजीओ की तरफ से पैरवी कर रहे अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को खुद देखना होगा कि सीबीआई के नए निदेशक की चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी रहे।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण से कहा कि पहले सीबीआई में नया निदेशक नियुक्त तो होने दीजिए। चयन प्रक्रिया को लेकर अगर आपको कोई परेशानी है तो निदेशक की नियुक्ति के बाद ही उसकी समीक्षा की जा सकती है।
सीबीआई मामले की सुनवाई के लिए गुरुवार को बनाई गई थी नई बेंच
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई मामले की सुनवाई के लिए गुरुवार को जस्टिस अरुण मिश्रा, नवीन सिन्हा की बेंच का गठन किया था। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई समेत तीन जज इस मामले की सुनवाई से इनकार कर चुके हैं।जस्टिस एके सिकरी और एनवी रामना ने निजी कारणों का हवाला देते हुए सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था. वहीं गोगोई का कहना था कि वह सीबीआई निदेशक की चयन प्रक्रिया से जुड़े हैं, लिहाजा उनके लिए मामले की सुनवाई करना ठीक नहीं रहेगा।
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