Budget Traditions 2019-20: बजट पेश करने से पहले वित्त मंत्री और केंद्र सरकार को निभानी होती हैं ये परंपरा
नई दिल्ली.आज मोदी सरकार का अंतरिम बजट पेश हाे रहा है। इस आखिरी बजट में सरकार सभी वर्गों को खुश करने की कोशिश कर रही है। वित्त मंत्री अरुण जेटली की जगह पीयूष गोयल आम बजट पेश कर रहे हैं। जेटली अमेरिका में अपना इलाज करवा रहे हैं, जिसके चलते डॉक्टर ने उन्हें आराम करने के लिए कहा है। आइए जानते हैं कि बजट पेश होने से पहले और उसके बाद की कौन-सी परंपराओं को निभाया जाता है...
बजट पेश करने का समय
केंद्र सरकार बजट की तैयारी बजट पेश करने के बाद पांच से 7 महीने पहले ही शुरू कर देती है। पहले बजट को फरवरी के आखिरी दिन पेश किया जाता था। लेकिन बीते दो सालों से परंपरा बदली गई। इसे 2017 से एक फरवरी से पेश किया जा रहा हैं।
ब्लू शीट
एक नीले रंग के कागज पर बजट के सभी दस्तावेजों के मेन प्वाइंट होते हैं। इसे फाइनेंस मिनिस्टर को दिया जाता है। इस शीट को कड़ी निगरानी में रखा जाता है। खुद मिनिस्टर को इसे अपने पास रखने की अनुमति नहीं है।
बजट पेश करने का समय भी निश्चित
1999 तक बजट को शाम 5 बजे घोषित किया जाता था, लेकिन साल 2001 से तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने पुरानी परंपरा को तोड़ा और पहली बार सुबह 11 बजे बजट पेश किया गया था। जिसके बाद से आज तक बजट 11 बजे ही पेश किया जाता है।
सीक्रेट फाइल
बजट पेश करने के दौरान कुछ भी लीक न हो उसके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होते हैं. फोन और कंप्यूटर की टैपिंग, हाई-टेक सर्विलांस, इलेक्ट्रॉनिक बग्स के लिए स्वीप, हिडन कैमरा, जैमर और स्कैनर सभी का खास ध्यान रखा जाता है।
हलवा सेरेमनी
बजट को अंतिम रूप देने से पहले वित्त मंत्रालय में हलवा बनाया जाता है। यह रस्म लंबे समय से चली आ रही है। शुभ काम की शुरुआत मीठे से करना हलवा सेरेमनी की प्रमुख वजह है। ये हलवा लगभग वित्त मंत्री की ओर से लगभग 100 अधिकारियों और कर्मचारियों में बांटा जाता है।
नहीं होती बाहर जाने की अनुमति
बजट पेश होने तक कर्मचारियों को नॉर्थ ब्लॉक के अंदर लॉक कर दिया जाता है। वे सभी परिसर नहीं छोड़ सकते, अपने परिवार या दोस्तों से संपर्क नहीं कर सकते। वहीं खाना खाने से पहले वहां फू़ड टेस्टर खाने का नमूना लेते हैं। वहीं, डॉक्टर मौजूद रहते हैं, अगर किसी को गंभीर परिस्थितियों में बाहर निकलने की जरूरत है, तो वे खुफिया अधिकारियों और पुलिस के साथ रहते हैं।
सूटकेस की कहानी
आपने देखा होगा कि जब भी फाइनेंस मिनिस्टर बजट पेश करने जाते हैं तो उनके हाथ में एक सूटकेस भी होता है। साथ ही सूटकेस के साथ फोटो भी खिंचवाते हैं। बताया जाता है कि 1860 में ब्रिटेन के 'चांसलर ऑफ दी एक्सचेकर चीफ' विलियम एवर्ट ग्लैडस्टन फाइनेंशियल पेपर्स के बंडल को लेदर बैग में लेकर आए थे। तभी से यह परंपरा निकल पड़ी। यूके के वित्त मंत्री अपने साथ लाल रंग के लेदर सूटकेस का इस्तेमाल करते हैं।
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