आम लोगों के सुझाव पर हर 2 साल में बदलेगा शहरों का मास्टर प्लान
धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया, नई दिल्ली .सबकुछ सही रहा तो शहरों की प्लानिंग की स्थिति बदल जाएगी। इसमें लोगों की सहभागिता और बढ़ेगी। इसके लिए नेशनल अर्बन पॉलिसी फ्रेमवर्क (एनयूपीएफ) 2018 का ड्राफ्ट केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने तैयार किया है। शहरों के लिए अगले 15-20 वर्ष के लिए बनने वाले मास्टर प्लान को बनाए रखने या उसमें संशोधन के लिए दो वर्ष में एक बार लोगों से सुझाव मंगाए जाएंगे। लोगों की राय के बाद मौजूदा मास्टर प्लान में संशोधन भी किया जा सकेगा।
वहीं दूसरी ओर शहरों के जो मास्टर प्लान तैयार होंगे वे इकोनॉमिक प्लान के साथ जुड़े होंगे। इसके लिए हर मास्टर प्लान का एक और दो वर्ष की अवधि के लिए स्ट्रेटजिक प्लान भी बनाया जाएगा। फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान के साथ इकोनाॅमिक प्लान भी होगा। हर तीन वर्ष में क्षेत्र विशेष के छोटे हिस्से (करीब पांच फीसदी) को रिहायशी इलाके से कमर्शियल एरिया में बदला जा सकेगा। अभी पॉलिसी पर 10 मार्च तक आम लोगों से सुझाव लिए जाएंगे। सुझाव के बाद केन्द्र सरकार इसे जारी कर देगी। यह अर्बन पॉलिसी राज्यों के लिए शहरों का विकास करने के लिए गाइड का कार्य करेगी।
हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री के एडीशनल सेक्रेटरी और एनयूपीएफ कमेटी सदस्य डाॅ. समीर शर्मा ने कहा कि अभी तक मास्टर प्लान बनाते थे और उसमें अगले 15-20 साल की प्लानिंग करते थे और सोचते थे कि शहर का विकास किस दिशा में होगा। 20 से 30 फीसदी ही मास्टर प्लान पूरे हो पाते थे। अब लोगों की सहभागिता से समय-समय पर इसमें संशोधन किए जा सकेंगे।
शर्मा कहते हैं कि यह पॉलिसी राज्यों के लिए गाइड लाइन का कार्य करेगी और जो राज्य इन नियमों का पालन करेंगे, उन्हें केंद्र सरकार और मल्टीनेशनल इंस्टीट्यूट (वर्ल्ड बैंक, एशियन डवलपमेंट जैसे संस्थान) आर्थिक सहायता भी देंगे।
एनयूपीएफ के कमेटी सदस्य और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स के निदेशक जगन शाह ने बताया कि शहरों का विकास इस तरह किया जाएगा जिसमें रोजगार देने वाले प्रमुख क्षेत्र एमएसएमई, असंगठित क्षेत्र और व्यापार के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। देश में शहरों के विकास के लिए 10 सूत्र और 10 फंक्शनल एरिया पर फोकस किया जाएगा।
ये 10 सूत्र हैं शहरों की अर्थव्यवस्था, फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर, घर और उसकी अफोर्डेबिलिटी, ट्रांसपोर्ट, सिटी प्लानिंग, अर्बन फाइनेंस, अर्बन गवर्नेंस, अर्बन इंफॉर्मेशन सिस्टम और अर्बन एनवायरमेंट। वहीं एनआईयूए की प्रोफेसर डिबोलिना कुंडू ने कहा कि मास्टर प्लान को इकोनाॅमिक प्लान से जोड़ने का कार्य पहली बार किया गया है, अगर ये अमल में आता है तो शहरों के वास्तविक विकास के लिए सबसे बड़ी बात होगी।
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