5 ताकतवर देश भारत के साथ थे; सऊदी ने भी पाक का साथ छोड़ा, इसलिए इमरान मजबूर हुए
नई दिल्ली. वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान की रिहाई के लिए पाकिस्तान का 28 घंटे में ही बिना शर्त तैयार हो जाना भारत की कूटनीतिक जीत रही। 14 फरवरी को पुलवामा हमले के बाद से ही भारत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करना शुरू कर दिया था। जब भारत ने बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकाने पर हवाई हमला किया तो किसी भी देश ने इसकी निंदा नहीं की। जब पाकिस्तान के विमानों की घुसपैठ की जवाबी कार्रवाई में भारतीय पायलट अभिनंदन पीओके में चले गए तो भारत ने उनकी रिहाई के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोशिशें तेज कर दीं। संयुक्त राष्ट्र में दखल रखने वाले छह में से पांच देश भारत के साथ थे। जब सऊदी अरब भी पाकिस्तान के सपोर्ट में नहीं आया तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने तनाव नहीं बढ़ाने का फैसला लिया।
चीन को छोड़कर बाकी बड़े देश भारत के साथ थे
चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका पी 5 देश कहलाते हैं, क्योंकि ये सभी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं। पी 5+1 में एक अतिरिक्त देश जर्मनी है। पुलवामा हमले के दिन से अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और फ्रांस भारत के साथ थे। अमेरिका ने तो यह तक कहा था कि भारत को आत्मरक्षा का अधिकार है। गुरुवार को ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल अौर अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो के बीच फोन पर बात हुई। शाम को जर्मनी ने बयान जारी कर कहा कि पाकिस्तान को तनाव नहीं बढ़ाना चाहिए और आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। पी 5 में शामिल चीन इकलौता वह देश था जिसने पुलवामा हमले की निंदा तो की थी, लेकिन भारत की कार्रवाई का खुलकर समर्थन नहीं किया था।
सुषमा ने चीन पहुंचकर कहा- भारत की कार्रवाई जरूरी थी
जब भारत-पाक में दबाव बढ़ रहा था, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज उसी वक्त बीजिंग में चीन और रूस के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक करने पहुंचीं। सुषमा ने चीन से कहा कि पाकिस्तान जैश-ए-मोहम्मद पर कार्रवाई नहीं कर रहा था, इसलिए भारत का आतंकी शिविर पर हवाई हमला जरूरी था।
सऊदी अरब भी भारत के साथ आया तो पाक झुका
पुलवामा हमले के बाद सऊदी अरब के प्रिंस सलमान पाकिस्तान की यात्रा कर भारत आए थे। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत का साथ देने की बात की थी। ताजा तनाव के बीच सऊदी अरब के दिल्ली स्थित राजदूत डॉ. सऊद मोहम्मद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इसके कुछ ही देर बाद सऊदी अरब ने कहा कि वह अपने विदेश मंत्री को एक महत्वपूर्ण संदेश के साथ इस्लामाबाद भेज रहा है। माना जा रहा है कि इसी के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने संसद में घोषणा की कि भारतीय पायलट को रिहा किया जाएगा।
इस्लामिक सहयोग संगठन में भारत को नहीं रोक पाया पाक
56 इस्लामिक देशों के समूह इस्लामिक सहयोग संगठन की यूएई में शुरू हुई बैठक में भारत को भी निमंत्रण दिया गया। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को पहली बार यहां बतौर गेस्ट ऑफ ऑनर बुलाने का पाकिस्तान ने विरोध किया। लेकिन संगठन में पाकिस्तान की बात नहीं मानी गई, जबकि पाकिस्तान के कहने पर 1969 की ओआईसी बैठक में भारत को आमंत्रित नहीं किया गया था।
एक्सपर्ट व्यू : जंग नही चाहता था पाक, इसलिए अभिनंदन की रिहाई पर राजी हुआ
- विदेश मामलों के जानकार रहीस सिंह ने 'भास्कर प्लस ऐप' को बताया कि पाकिस्तान ने अभिनंदन को छोड़ने का फैसला लिया क्योंकि वह युद्ध नहीं चाहता। इसका सबसे बड़ा कारण उसकी आर्थिक स्थिति है। वहां की सरकार अपने जरूरी खर्चों के लिए धन नहीं जुटा पा रही है तो युद्ध के लिए धन कहां से लाएगी। पुलवामा में हुए हमले के बाद दुनियाभर के देश भारत के साथ हैं। पाक के सहयोगी देश सऊदी अरब और चीन ने भी आतंकी हमले की निंदा की थी। चीन ने पुलवामा हमले पर यूएन के निंदा प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए। सऊदी ने पाक को आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा। ऐसे में वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान अलग-थलग पड़ गया। उसे खुद को बचाने के लिए भी अभिनंदन को छोड़ने का फैसला लेना पड़ा।
- सिंह बताते हैं कि भारत ने पुलवामा हमले के बाद से ही अपने कूटनीतिक प्रयासों के जरिए पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाए रखा। पाकिस्तान इस बार अकेला था और उसके पास अभिनंदन को छोड़ने के विकल्प के अलावा कुछ और नहीं बचा था। पाकिस्तान सरेंडर की मुद्रा में है। ऐसे में अब दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ सकती है। पाकिस्तान बार-बार बातचीत के जरिए मामला सुलझाने की बात भी कह रहा है। पाकिस्तान पहली बार इतनी सौम्य भाषा बोल रहा है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। यह भारत की कार्रवाई और कोशिशों का ही नतीजा है।
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