चमकी बुखार की चपेट में आने वाले 85% बच्चे गरीब, कुपोषित और घासफूस के घरों में रहने वाले

आदित्या लोक, स्पेशल करोस्पोंडेंट:

मुजफ्फरपुर.बिहार में मस्तिष्क ज्वर 164 बच्चों की जान ले चुका है। अभी भी करीब 600 से ज्यादा बच्चे अस्पतालों में भर्ती हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के दौरे के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी श्रीकृष्ण मेमोरियल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल(एसकेएमसीएच) का दौरा किया। अफसरों को कई निर्देश दिए। मौत के कारणों का पता लगाने के लिए प्रभावित इलाके और पीड़ित परिवारों के सामाजिक-आर्थिक सर्वे का ऐलान किया। शोध के लिए राष्ट्रीय रोग नियंत्रक केंद्र(एनसीडीसी पुणे) और एम्स की टीम गांवों में जाएगी।

दैनिक भास्कर की टीम प्रभावित इलाकों में सोशल ऑडिट करने पीड़ित परिवारों तक पहुंची। टीम ने परिजनसे बातचीतकी औरआसपास के परिवेश का जायजा लिया। अधिकतर मामले में एक बात साफ नजर आई कि परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति काफी कमजोर है। ज्यादातर कुपोषण के शिकार हैं। गंदगी के बीच रहते हैं।कांटी के दरियापुर, बेड़ियाही नारापुर ही नहीं, मीनापुर के राघोपुर, पानापुर, मदारीपुर, गंज बाजार, झोंझा, नून छपरा, देवरिया के विशुनपुर, कटरा के बेरई, मोतीपुर के बर्जी, सकरा के राजापाकर आदि गांवों में भी दलित, पिछड़े समाज के लोगों की स्थिति काफी दयनीय मिली।वरिष्ठ संवाददाता शिशिर कुमार और ललितांशु की रिपोर्ट...

सबसे ज्यादा मुशहरी, कांटी और मीनापुर में 50% मौतें
मस्तिष्क ज्वर से वैसे तो मुजफ्फरपुर के सभी ब्लॉकप्रभावित हैं, लेकिन सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका मुशहरी, कांटी और मीनापुर ब्लॉक हैं। 164 बच्चों में से तकरीबन 50% मौतेंइन प्रखंडों में हुई। मुख्यमंत्री को सौंपी रिपोर्ट में 17 जून तक आंकड़े दिए गए थे। इनमें सिर्फ एसकेएमसीएच में 69 मौतें दिखाई बताई गईं। इनमें 34 बच्चों की मौत इन तीनों ब्लॉक से हैं।

गांव में न शौचालय, न पीने का पानी

मीनापुर धोरिया गांव में विक्की की 2 साल बेटी की मौत हो गई। गांव में न तो शौचालय और न ही पीने का पानी है। वह मजदूरी करता है। गांव के लोग फूस के घर, बगीचे और सड़क किनारे रहते हैं। यहीं के अलीकी 4 साल की बेटी की मौत हो गई। कांटी के दरियापुर गांव में भी लोग फूस के घरों और गंदगी के बीच रहने को मजबूर हैं।

केस स्टडी

  • पांच बेटी के बाद बेटा हुआ, वह भी चला गया: प्रिंस के पिता नुनू महताे 200 रु.दिहाड़ी पर टेंट का काम करते हैं। शादी के माैसम के बाद कमाई भी नहीं हाेती। लीची बागान ही आसरा है। मां शीला देवी ने बताया कि प्रिंस ने सुबह खाना, शाम को बर्फ औरसमाेसा खाया। रात में बिना खाए हम सभी साे गए। सुबह प्रिंस के मुंह से झाग और तेज बुखार आने पर पीएचसी ले गए, वहां से केजरीवाल हाॅस्पिटल रैफर कर दिया। 14 जून को बेटे की मौत हो गई। पांच बेटी के बाद बेटा हुआथा। उसे लीची खिलाई भी नहीं। फिर भी क्या हाे गया कि बेटा चला गया, क्या कहें...।
  • सन्नी की रात 9 बजे तबीयत बिगड़ी, देर रात मौत हो गई: कांटी के बेड़ियाही नारापुर गांव के 13 साल के सन्नी की मौत 13 जून को गई। उसके पिता का 6 साल पहले ही चल बसे। बड़ा भाई लड्डू कांटी थर्मल में हेल्पर है। इसी से परिवार का गुजारा हाेता है। लड्‌डू ने बताया कि बहन ने सुबह सन्नी काे खाना खिलाया। वह खेलने चला गया। शाम को खाना खाकर साे गया। रात में 9 बजे अचानक तबीयत बिगड़ी। एक घंटे के अंदर पहले पीएचसी कांटी में, फिर वहां से एसकेएमसीएच में भर्ती कराया गया,लेकिनदेर रात माैत हाे गई।
  • 24 घंटे के अंतराल में दाे बच्चाें की माैत: दरियापुर गांव में 24 घंटे के अंतराल में दाे बच्चाें की माैत हो गई। जिनके बच्चे मरे उनकी माली हालत अच्छी नहीं है। बगीचे की झाेपड़ी में पूरा परिवार रहता है। एक बच्ची निधि के पिता सुबाेध पासवान मजदूरी करते हैं। दादा ने बताया कि निधि सुबह घूमने निकली फिर राेटी-भुजिया खाकर सो गई। सुबह 9 बजे बड़ी पाेती जगाने गई ताे मुंह से झाग जैसा निकलते देखा। जब वह नहीं उठी ताे पीएचसी में भर्ती कराया। वहां से एसकेएमसीएच ले गए,लेकिन उसकी माैत हाे गई।

परिवारों की पीड़ा : सांसद-विधायक गांव मिलने भी नहीं आए

बीमारी से प्रभावित कांटी, मुशहरी औरमीनापुर के लोगों को भाजपा सांसद अजय निषाद, वैशाली की लोजपा सांसद वीणा देवी, कांटी विधायक अशोक चौधरी, बोचहां विधायक बेबी कुमारी और मीनापुर विधायक मुन्ना यादव से कोई मदद नहीं मिली। बेबी कुमारी ने एक परिवार को चार लाख का चेक दिया तो उसे फेसबुक पर भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

सबसे ज्यादा मौतेंमुजफ्फरपुर में

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मरने वाले 120 बच्चों में से 46 बच्चे और 74 बच्चियां हैं।

जिला पीड़ित माैत
मुजफ्फरपुर 408 85
पू. चंपारण 79 19
समस्तीपुर 6 2
बेगूसराय 1 1
सीतामढ़ी 25 8
शिवहर 13 8
वैशाली 9 1
प.चंपारण 4 2
कुल भर्ती 552 120*

(* यह आंकड़े एसकेएमसीएच और केजरीवाल अस्पताल के सरकारी आंकड़ों पर आधारित है।मरने वाले बच्चों की तादाद वैसे 164 तक पहुंच गई है।)



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
Ground Report: Know Children Who Died To Chamki Fever In Bihar
Ground Report: Know Children Who Died To Chamki Fever In Bihar

कोई टिप्पणी नहीं

Blogger द्वारा संचालित.