मोदी सरकार आज लोकसभा में तीन तलाक को लेकर नया विधेयक पेश करेगी
आदित्या लोक, स्पेशल करोस्पोंडेंट:
नई दिल्ली.तीन तलाक पर प्रतिबंध के लिए केंद्र सरकार शुक्रवार को लोकसभा मेंनया विधेयक पेश करेगी। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में इस विधेयक को लोकसभा से तो पास करा लिया गया था लेकिन राज्यसभा में बहुमत न होने के कारण वहां यहपारित नहीं हो सका था।12 जून को कैबिनेट मीटिंग के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था कि नया विधेयक फरवरी में पेश हुए अध्यादेश का स्थान लेगा। जावड़ेकर ने उम्मीद जताई कि इस बार यह बिल राज्यसभा से भी पास करा लिया जाएगा।
दूसरी ओर, राज्यसभा मेंआम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने दिल्ली में बढ़ते अपराध को लेकर शून्यकाल नोटिस दिया है। राजद सांसद मनोज झा ने मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से बच्चों की मौत को लेकर24 जून के लिए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का नोटिसदिया है। वहीं, केरल के कोल्लम से सांसद एनके प्रेमचंद्रन सबरीमाला मंदिर विवाद पर लोकसभा में प्राइवेट मेंबर बिल पेश करेंगे। 17वीं लोकसभा के पहले सत्र में केंद्र सरकार तीन तलाक समेत 10 बिल पेश कर सकती है।
तीन तलाक पर नया विधेयक क्यों लाना पड़ा?
संसदीय नियमों के मुताबिक, जो विधेयक सीधे राज्यसभा में पेश किए जाते हैं, वो लोकसभा भंग होने की स्थिति में स्वत: समाप्त नहीं होते। जो विधेयक लोकसभा में पेश किए जाते हैं और राज्यसभा में लंबित रहते हैं, वेनिचले सदन यानी लोकसभा भंग होने की स्थिति में अपने आप ही समाप्त हो जाते हैं। तीन तलाक बिल के साथ भी यही हुआ और इसी वजह से सरकार को नया विधेयक लाना पड़ रहा है।
फरवरी में लोकसभा में पास हो गया था बिल
लोकसभा में तीन तलाक पर कानूनी रोक वाला विधेयक फरवरी में पारित हो गया था।राज्यसभा में एनडीए सरकार के पास बहुमत नहीं था, इसलिए बिल वहां अटका रहा। अब सरकार बजट सत्र में इसे पेश करने और दोनों सदनों से पास कराने की उम्मीद कर रही है। अध्यादेश को भी कानून में तभी बदला जा सकता है जबकि संसद सत्र आरंभ होने के 45 दिन के भीतर उसे पास करा लिया जाए। अन्यथा अध्यादेश की अवधि समाप्त हो जाती है।
नए विधेयक में ये हुए थे बदलाव
- अध्यादेश के आधार पर तैयार नए बिल के मुताबिक, आरोपी को पुलिस जमानत नहीं दे सकेगी। मजिस्ट्रेट पीड़ित पत्नी का पक्ष सुनने के बाद वाजिब वजहों के आधार पर जमानत दे सकते हैं। उन्हें पति-पत्नी के बीच सुलह कराकर शादी बरकरार रखने का भी अधिकार होगा।
- बिल के मुताबिक, मुकदमे का फैसला होने तक बच्चा मां के संरक्षण में ही रहेगा। आरोपी को उसका भी गुजारा देना होगा। तीन तलाक का अपराध सिर्फ तभी संज्ञेय होगा जब पीड़ित पत्नी या उसके परिवार (मायके या ससुराल) के सदस्य एफआईआर दर्ज कराएं।
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