एफआईआर में चिदंबरम आरोपी नहीं, लेकिन इंद्राणी मुखर्जी के एक बयान की वजह से फंसे
आदित्या लोक, स्पेशल करोस्पोंडेंट:
नई दिल्ली. शीना बोरा हत्याकांड में जेल में बंद इंद्राणी मुखर्जी के एक बयान और 2007 में यूपीए सरकार के समय आईएनक्स मीडिया को मिली विदेशी निवेश की मंजूरी पी. चिदंबरम पर भारी पड़ी। इन्हीं वजहों के चलते सीबीआई और फिर प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व वित्त और गृह मंत्री पी. चिदंबरम पर शिंकजा कसा। मामले के 12 साल बाद बुधवार को उनकी गिरफ्तारी हुई। अब उन्हें 26 अगस्त तक सीबीआई की रिमांड में भेज दिया गया है। हालांकि, आईएनक्स मीडिया केस में दर्ज एफआईआर में चिदंबरम आरोपी नहीं हैं। सीबीआई की तरफ से चार्जशीट दायर होना भी बाकी है।
1) इंद्राणी मुखर्जी का इस केस से क्या लेना-देना है?
इंद्राणी और पीटर मुखर्जी ने 2006 में आईएनएक्स मीडिया की स्थापना की थी। एक साल बाद 13 मार्च 2007 को कंपनी ने विदेशी निवेश के प्रस्ताव की अर्जी विदेशी निवेश प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) के पास भेजी। उस वक्त यही बोर्ड कंपनियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रस्तावों को मंजूरी देता था। आर्थिक मामलों के सचिव इस बोर्ड के अध्यक्ष हुआ करते थे।
2) गड़बड़ी कहां हुई?
न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2007 में आईएनएक्स मीडिया ने 4.62 करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हासिल करने का प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव को तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की स्वीकृति के बाद बोर्ड ने मंजूरी दी थी। हालांकि, नियम-शर्तों का उल्लंघन करते हुए कंपनी ने प्रति शेयर 800 रुपए प्रीमियम के हिसाब से 305 करोड़ रुपए का निवेश हासिल किया। इससे संदेह पैदा हुआ और आयकर विभाग ने एफआईपीबी को पत्र भेजकर मामले की जांच करने की मांग की। इस पर बोर्ड ने आईएनएक्स मीडिया से स्पष्टीकरण देने को कहा।
3) चिदंबरम सवालों के घेरे में कैसे आए?
सीबीआई की एफआईआर के मुताबिक, आईएनएक्स मीडिया ने दंडात्मक कार्रवाई से बचने के लिए तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति से संपर्क किया। कार्ति तब चेस मैनेजमेंट कंपनी के प्रमोटर थे। आईएनएक्स मीडिया का मकसद यह था कि एफआईपीबी के नौकरशाहों को अपने प्रभाव में लिया जाए और मामला रफा-दफा किया जाए। बोर्ड के अफसरों ने आईएनएक्स मीडिया को नई अर्जी दाखिल करने की सलाह दी और जांच करने के आयकर विभाग के अनुरोध को नजरअंदाज कर दिया गया। वित्त मंत्रालय ने नई अर्जी को मंजूरी भी दे दी। इसके लिए आईएनएक्स मीडिया ने कंसल्टेंसी चार्ज के तौर पर एडवांटेज स्ट्रैटजिक कंपनी को 10 लाख रुपए की फीस दी। सीबीआई का कहना है कि एडवांटेज स्ट्रैटजिक कंपनी पर कार्ति चिदंबरम का नियंत्रण है। कार्ति और चिदंबरम इस दावे को खारिज करते हैं।
4) ईडी कैसे इस मामले तक पहुंची?
2जी स्पेक्ट्रम आवंटन केस से जुड़े एयरसेल-मैक्सिस केस की जांच प्रवर्तन निदेशालय को आईएनएक्स मीडिया केस तक ले गई। दरअसल, ईडी 2016 में एयरसेल-मैक्सिस केस में एडवांटेज स्ट्रैटजिक कंपनी की भूमिका की जांच कर रही थी। कार्ति चिदंबरम पर इस कंपनी के जुड़े होने का आरोप है। ईडी की जांच में पता चला कि एडवांटेज स्ट्रैटजिक ने विदेशी निवेश की मंजूरी हासिल करने वाली कुछ और कंपनियों से कंसल्टेंसी चार्ज हासिल किया था।
5) जांच में इंद्राणी की स्थिति क्या है और उसके किस वजह बयान की वजह से चिदंबरम फंसे?
अपनी बेटी शीना बोरा की हत्या के मामल में जेल में बंद इंद्राणी मुखर्जी आईएनएक्स मामले में सरकारी गवाह बन चुकी है।
6) इंद्राणी के किस बयान की वजह से चिदंबरम फंसे?
अपनी बेटी शीना बोरा की हत्या के मामले में जेल में बंद आईएनएक्स मीडिया की पूर्व सीईओ इंद्राणी मुखर्जी इस मामले में सरकारी गवाह बन चुकी है। इंद्राणी ने ईडी के सामने 2017 में दिए बयान में कहा कि वह और पति पीटर मुखर्जी पी. चिदंबरम से दिल्ली के नॉर्थ ब्लॉक में 2008 में मिले थे। चिदंबरम ने उनकी कंपनी को विदेशी निवेशी की मंजूरी दिलाने के ऐवज में बेटे कार्ति के बिजनेस में मदद करने को कहा था। इसके बाद वह कार्ति से 2008 में दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल में मिली। तब कार्ति ने उससे कहा कि वह उससे या उसके सहयोगियों से जुड़े विदेशी खातों में 10 लाख डॉलर की रकम ट्रांसफर करे। तब पीटर ने इंद्राणी से कहा कि कथित अनियमितताओं का मामला कार्ति की मदद कर हल किया जा सकता है। इसके बाद हमने विदेशी निवेश की मंजूरी के मामले में कार्ति से सलाह ली। कार्ति को इस मामले के बारे में पहले से पता था। जब पीटर ने कहा कि विदेशी खातों में 10 लाख डॉलर की रकम ट्रांसफर नहीं की जा सकती, तब कार्ति ने दो कंपनियों चेस मैनेजमेंट और एडवांटेज स्ट्रैटजिक के नाम सुझाए जिन्हें पेमेंट किया जा सकता था। कार्ति ने कहा कि इन दोनों कंपनियों को आईएनक्स मीडिया का कंसल्टेंट पार्टनर बना दिया जाएगा। इसके बाद चेक से 9.96 लाख रुपए का भुगतान एडवांटेज स्ट्रैटजिक कंपनी को किया गया। पीटर ने भी ईडी में दर्ज कराए बयान में कहा कि चिदंबरम ने उनसे बेटे कार्ति के कारोबारी हितों का ध्यान रखने को कहा था।
7) जांच में अभी चिदंबरम की स्थिति क्या है?
चिदंबरम इस मामले में दर्ज एफआईआर में आरोपी नहीं हैं। सीबीआई ने कोई चार्जशीट भी दायर नहीं की है। सीबीआई ने उन्हें पूछताछ के लिए गिरफ्तार किया है। वह उनसे 100 से भी ज्यादा सवाल करेगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह भी जरूरी नहीं है कि जिसे शुरुआती जांच में आरोपी माना जा रहा हो, उसका नाम एफआईआर में होना जरूरी है। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, एडवोकेट अजीत सिन्हा बताते हैं कि एफआईआर सिर्फ प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए है। इसके बाद जांच शुरू होती है और बाकी आरोपियों का खुलासा होता है।
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