दिव्यांग बेटे के सपने को जीते हैं 79 साल के पिता, 42 साल में बेटे के साथ 1200 रेस पूरी कीं

आदित्या लोक, स्पेशल करोस्पोंडेंट:

नई दिल्ली.यह कहानी पिता डिक हॉयट और उनके बेटे रिक की है। ऐसे पिता जो अपने बेटे को 42 साल में व्हीलचेयर पर बैठाकर 1200 से अधिक रेस दौड़ चुके हैं। जो बेटे के स्वीमिंग बोर्ड को अपने सीने से बांधकर मीलों तैर चुके हैं। जो बेटे को साइकिल पर बैठाकर इतनी दूर निकल चुके हैंकि खुशियां छीनने आई नियति कहीं पीछे छूट गई है। पिता-पुत्र साइकिल पर पूरा अमेरिका घूम चुके हैं। पढ़िए, उनकी कहानी डिक हॉयट की जुबानी...

बात 1962 की है। मैं पिता बना था। खुशी थी, लेकिन अधूरी, क्योंकि मेरा बेटा रिक बीमार था। दिमाग में ऑक्सीजन की कमी से उसे लकवा मार गया था। डॉक्टरों ने कहा था, 'यह बच्चा सामान्य नहीं है। हमें इसकी सांसें रोक देनी चाहिए।' लेकिन कोई भी पिता यह कैसे कर सकता है। मैं रिक को घर ले आया। अक्सर मैं डर जाता था कि क्या सच में रिक कभी चल-बोल नहीं पाएगा। फिर एक दिन मैंने गौर किया कि रिक की आंखें एकटक मुझे देखती हैं। मुझे महसूस हुआ कि शरीर से भले ही रिक कमजाेर हो, पर दिमाग तेज है।

मैं उसे अल्फाबेट सिखाने लगा और वह सीखने लगा, लेकिन अपनी बात रखने का अब भी उसके पास कोई जरिया नहीं था। इसलिए मैंने टफ्ट यूनिवर्सिटी के इंजीनियर्स से सॉफ्टवेयर बनवाया। कंप्यूटर के सामने रिक खुशी से सिर हिलाता तो स्क्रीन पर कर्सर भी घूमने लगता। सिर के पास लगे बटन को दबाकर रिक ने लिखना सीखा। कंप्यूटर पर पहले शब्द उसने लिखे- गो ब्रुइन्स। वो ब्रुइन्स का मैच देखने जाना चाहता था। (द बोस्टन ब्रुइन्स आइस हॉकी की प्रसिद्ध टीम है)। मैं उसे मैच दिखाने ले गया। उस पल मुझे पता चला कि रिक खिलाड़ी मन का बच्चा है।

मैं उसे सामान्य बच्चों के साथ स्कूल भेजना चाहता था, पर स्कूल रिक को नहीं लेना चाहते थे। काफी संघर्ष के बाद 13 साल की उम्र में उसका स्कूल में एडमिशन हो सका। फिर एक दिन उसने मुझसे कहा- स्कूल में एक रेस हो रही है। हादसे में पैर खो चुके एक खिलाड़ी की मदद के लिए। मैं भी पांच मील की रेस में दौड़ना चाहता हूं। मैंने तय किया इतना तो मैं रिक के लिए आसानी से दौड़ सकता हूं। उसे व्हीलचेयर पर बैठाकर मैंने स्कूल की रेस पूरी की। उस रात रिक ने कहा- 'डैड जब मैं दौड़ रहा था, मुझे लग रहा था कि मैं हैंडीकैप नहीं हूं।' यह बहुत बड़ी फीलिंग थी।

मैं इस अहसास को और मजबूत करना चाहता था, इसलिए उसे रनिंग क्लब ले जाने लगा। विशेष रनिंग चेयर बनवाई। फिर हम सप्ताह में तीन रेस तक पूरी करने लगे। हम डबल रेस में भी गए। तीन मील दौड़ना और आधा मील तैरना। स्वीमिंग के लिए मैंने रस्सी का एक सिरा अपनी कमर पर और दूसरा सिरा रिक के स्वीमिंग बोर्ड पर बांधा। जैसे-जैसे हमारे खेल बढ़ते, उसकी खुशियां और मेरी हिम्मत बढ़ती।

1985 में रिक और मैं पहली बार ट्रायथलॉन में शामिल हुए। 10 मील दौड़ना, एक मील तैरना और 50 मील साइकिलिंग। फिर हम दोनों 45 दिन की अमेरिका की सैर पर निकले। साइकिलिंग, रनिंग मिलाकर 3735 किमी चले। इन वर्षों में रिक ने ग्रेजुएशन किया। मैं 37 साल सर्विस के बाद सेना से रिटायर हो गया। लेकिन रनिंग से न मैं और न ही रिक रिटायर होने के मूड में हैं। मैं 79 साल का हो गया हूं और रिक 57 का। हमारा सफर जारी रहेगा।'

रिक का दिल कहता है,एक बार ऐसा हो कि डैड चेयर पर बैठें और मैं उन्हें लेकर दौडूं

डैड मेरे हाथ और पैर ही नहीं हैं, वे मेरी प्रेरणा भी हैं। उन्होंने मेरा जीवन बचाया और मुझे जीने का जज्बा दिया। वे हजारों लोगों की प्रेरणा हैं। मेरी इच्छा है- एक बार डैड चेयर पर बैठेें और मैं उन्हें लेकर दौड़ूं। अपने डैड के साथ मैं कुछ भी कर सकता हूं। -रिक हॉयट

पिता-पुत्र की दौड़

257 ट्रायथलॉन 22 डुअथलॉन
72 मैराथन 6 आयरमैन
7 हाफ आयरमैन 8 18 मील रेस
97 हाफ मैराथन 1 20 किमी रेस
37 10 मील रेस 37 7.1 मील रेस
08 15 किमी रेस 219 10 किमी रेस
162 5 मील रेस 02 11 किमी रेस


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बच्चे की ख्वाहिशें पूरी करने के लिए डिक हॉयट ने खुशी-खुशी पूरी जिंदगी खपा दी।
पहली रेस।

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