बीजेपी और सीपीआई(एम) पर आरोप लगाया ममता ने ।


विशेष संवाददाता: हर्ष शर्मा
ममता ने डॉक्टरों से निवेदन करते हुए कहा है कि सभी जिलों से मरीज आ रहे हैं. यदि आप अस्पतालों का ध्यान रखते हैं तो मैं आभारी एवं सम्मानित महसूस करूंगी.

पश्चिम बंगाल के डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा चार घंटे में हड़ताल खत्म करने का अल्टीमेटम दिए जाने के बावजूद अपनी हड़ताल खत्म करने से इनकार कर दिया. डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री पर धमकी देने का आरोप लगाया है, जिसके बाद ममता ने डॉक्टरों से मरीजों की देखभाल करने का निवेदन किया है.
ममता बनर्जी मेडिकल कॉलेज के सीनियर डॉक्टरों/प्रोफेसरों और अस्पतालों को पत्र लिखकर कहा, "कृप्या सभी मरीजों की देखभाल करें, गरीब लोग सभी जिलों से आ रहे हैं. यदि आप अस्पतालों का ध्यान रखते हैं तो मैं आभारी एवं सम्मानित महसूस करूंगी. वे आसानी और शांति से चलने चाहिए."
बता दें कि सीएम ममता बनर्जी ने गुरुवार को राज्य सरकार द्वारा संचालित एसएसकेएम अस्पताल का निरीक्षण किया. उन्होंने यहां हड़ताल पर गए डॉक्टरों को चार घंटे के अंदर काम पर लौटने अथवा हॉस्टल खाली करने का अल्टीमेटम दिया. उन्होंने कहा कि जो प्रदर्शन कर रहे हैं वे डॉक्टर नहीं थे लेकिन बाहरी लोग राज्य में परेशानी खड़ी करना चाहते हैं. ममता बनर्जी ने कहा, "सरकार किसी भी तरह से उनका समर्थन नहीं करेगी. मैं उन डॉक्टरों की निंदा करता हूं जो हड़ताल पर गए हैं. पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान मर जाते हैं लेकिन, पुलिस हड़ताल पर नहीं जाती है."
बीजेपी और सीपीआई(एम) पर आरोप
'हमें न्याय चाहिए' के शोर के बीच ममता बनर्जी ने कहा, "आपको अपना काम करना होगा. आपको लोगों को सेवा दिए बिना डॉक्टर नहीं हो सकते हैं. इसी तरह पुलिस हड़ताल नहीं कर सकती. यह उनकी ड्यूटी है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बीजेपी और सीपीआई(एम) यहां राजनीति कर रही हैं. वे यहां हिन्दू मुस्लिम कार्ड खेल रहे हैं. स्वास्थ्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने बुधवार को जूनियर डॉक्टरों से मुलाकात की और उनसे मुझसे बात करने की अपील की. मैं फोन पर थी लेकिन उन्होंने मुझसे फोन पर बात करने से इनकार कर दिया."
हालांकि ममता बनर्जी के दौरे ने प्रदर्शनकारियों को नाराज कर दिया, उन्होंने कहा कि उन्हें (ममता बनर्जी को) एनआरएस कॉलेज और अस्पताल का दौरा करना चाहिए, जहां जूनियर डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए एक मरीज के परिजनों ने हमला किया था.
इंटर्न डॉक्टर के साथ मारपीट के बाद हुई हड़ताल
मंगलवार को जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल उस समय शुरू हुई जब एक मरीज की मौत के बाद उसके परिजनों ने एक इंटर्न डॉक्टर के साथ मारपीट कर दी. डॉक्टर के साथ हुई मारपीट से नाराज अन्य डॉक्टरों ने बुधवार सुबह नौ बजे से रात नौ बजे तक काम पूरी तरह से बंद कर दिया. हालांकि इमरजेंसी डिपार्टमेंट  खुला हुआ था. डॉक्टरों की उपस्थिति काफी कम होने के कारण मरीजों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा था.
हड़ताल में प्राइवेट डॉक्टर भी शामिल
सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों की हड़ताल में प्राइवेट डॉक्टर भी शामिल हो गए हैं. बताया जाता है कि एनआरएस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के जूनियर डॉक्टर के साथ सोमवार रात मारपीट हुई थी. जूनियर डॉक्टर के सिर में गहरी चोट लगी थी और उसे गंभीर हालत में प्राइवेट हॉस्पिटल में  भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि जब इस संबंध में पुलिस से शिकायत की गई तो पुलिस ने डॉक्टरों के साथ मारपीट की और कोई एक्शन नहीं लिया. डॉक्टरों की मांग है कि उन्हें सुरक्षा दी जाए, जिससे मारपीट जैसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके.
परेशानी में मरीज
बता दें कि बुधवार से ठप हुईं स्वास्थ्य सेवाएं गुरुवार को भी बहाल नहीं हो सकीं. डॉक्टरों की हड़ताल के कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि फिलहाल इस समस्या का हल निकलते नहीं दिख रहा है.
विशेष संवाददाता: हर्ष शर्मा
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