अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन 6 महीने बढ़ाने का प्रस्ताव रखा

आदित्या लोक, स्पेशल करोस्पोंडेंट:

नई दिल्ली. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर में 6 महीने के लिए राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के लिए प्रस्ताव पेश किया। इस दौरान शाह ने कहा कि रमजान, अमरनाथ यात्रा को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने बाद में चुनाव कराने का सुझाव दिया है। इस साल के अंत तक वहां चुनाव कराए जाएंगे।

उन्होंने कहा, ''जम्मू-कश्मीर में यह पहली बार नहीं है कि यहां राज्यपाल या राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। कई बार ऐसी स्थिति बनी है कि कानून में संशोधन किया गया। राज्य में पहली बार आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। सरकार ने आतंकवाद को खत्म करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। एक साल के अंदर वहां पंचायत चुनाव कराए गए। 40 हजार पंच और सरपंच बने, जो आज काम कर रहे हैं। हम 3 हजार करोड़ रुपए पंचायतों को देने के लिए तैयार हैं।''

'मोदी सरकार ने जम्मू और लद्दाख के क्षेत्र को बराबर अधिकार दिया'
शाह ने कहा, ''राज्य में कई बार रक्त रंजित चुनाव देखे गए, लेकिन लोकसभा चुनाव में एक भी व्यक्ति की जान नहीं गई। मोदी सरकार ने जम्मू और लद्दाख के क्षेत्र को बराबर अधिकार दिया।2018 में सालों से लंबित मामलों को निपटाने का काम किया गया। राष्ट्रपति शासन के एक साल में राज्य में शरणार्थियों के मसले, बंकर तैयार करने का काम हुआ। 15 हजार में से करीब 3 हजार बंकर बन चुके हैं। हमारे लिए सीमा पर रहने वाले हर नागरिक की जान कीमती है।''

दो दिन के कश्मीर दौरे पर गए थे शाह
अमित शाह बुधवार को जम्मू-कश्मीर के दो दिन के दौरे पर पहुंचे थे। गुरुवार को उन्होंने शहीद एसएचओ (थाना प्रभारी) अरशद खान के परिवार से मुलाकात की। खान 12 जून को अनंतनाग में हुए फिदायीन हमले में शहीद हुए थे। शाह ने कहा कि अरशद खान की वीरता और साहस पर पूरे देश को गर्व है। दौरे में शाह ने राज्य में ओवरऑल सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा की भी चर्चा की गई। यात्रा 1 जुलाई की शुरू हो रही है।



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