13 साल की बच्ची ने डीएम को लगाया फोन, सुनाई घर में अपने साथ हो रहे अत्याचार की कहानी, पुलिस ने तलाश कर बच्ची को कराया आजाद, अब दुनिया के लिए बनी प्रेरणा
नई दिल्ली. तमिलनाडु में जिस बच्ची ने 13 साल की उम्र में अपने बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाई, वही अब बेटी बचाओ अभियान का चेहरा बन चुकी है। गुरुवार को नई दिल्ली में इस लड़की ने नेशनल गर्ल चाइल्ड डे के मौके पर अपनी पूरी जिंदगी का सफर शेयर किया। उसने बताया कि बचपन में ही उसकी खुद से दोगुनी उम्र के शख्स से शादी कराई जा रही थी। तब उसने डीएम को फोन लगाकर इस शादी से अपनी जान बचाई और नई जिंदगी हासिल की।
घरवाले बचपन में करा रहे थे शादी
- तिरुवन्नामलाई जिले की रहने वाली नंदिनी नागराजी की मां बचपन में ही चल बसीं। इसके बाद उसके पिता ने भी उसे छोड़ दिया। वो अपनी नानी के घर पर पली।
- ननिहाल में बचपन में उसकी जबरदस्ती शादी तय कर दी गई। नंदिनी इस शादी से बिल्कुल भी खुश नहीं थी, लेकिन उसे इससे निकल पाने का रास्ता समझ नहीं आ रहा था।
- बात 4 जुलाई 2017 की है। शादी के एक दिन पहले डीएम को 13 साल की एक बच्ची नंदिनी की ओर से डिस्ट्रेस कॉल मिली थी। उसने डीएम को अपनी शादी के बारे में बताया।
- बच्ची ने बताया कि जबरन उसकी शादी दोगुनी उम्र के व्यक्ति से की जा रही है। उस वक्त नंदिनी 9वीं क्लास में थी। डीएम के आदेश पर नंदिनी की तलाश शुरू हुई। उसे खोजकर बालगृह भेज दिया।
एक पम्पलेट सभांलकर रखना आया काम
- नंदिनी ने घटना के बाद बताया कि उसे डीएम का नंबर स्कूल में घटना के कुछ दिन पहले एक कैंपेन के दौरान बांटे गए पम्प्लेट्स से मिला था। उसमें जिले के अफसरों के नाम और नंबर लिखे हुए थे, जिसे नंदिनी ने संभालकर रखा था।
- नंदिनी ने दिल्ली के कार्यक्रम में अपना संघर्ष सुनाते हुए कहा कि मैं अपनी ये कहानी बार-बार सुनाउंगी क्योंकि मेरा बोलना जरूरी है। मुझे अपने ही जैसी कई लड़कियों को बचाना है। वो आगे चलकर आईएएस बनना चाहती हैं।
बेटी बचाओ अभियान का बनीं चेहरा
- नंदिनी की ये कहानी तब से लड़कियों के लिए प्रेरणा की वजह बनी हुई है। इस घटना के 6 महीने बाद जब केंद्र की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना जनवरी 2018 में नंदिनी के शहर पहुंची, तब जिंला प्रशासन ने नंदिनी को इस अभियान का चेहरा बनाया और बाल विवाह के खिलाफ अभियान की जिम्मेदारी सौंपी है।
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