फ्रांस के राजदूत ने कहा- भारत के साथ 70 साल पुराना रिश्ता भरोसे पर टिका है
नई दिल्ली. फ्रांस के राजदूत अलेक्जेंडर जीग्लर ने शुक्रवार को राफेल मुद्दे पर अपनी बात रखी। अलेक्जेंडर ने कहा, ''भारत और फ्रांस के बीच 70 साल पुराना रिश्ता है। यह भरोसे की नींव पर टिका है। इस बीच दोनों देशों के बीच अच्छे और बुरे दोनों तरह के पल आए, लेकिन रिश्ता कमजोर नहीं हुआ।'' अलेक्जेंडर जयपुर लिटरेचर फेस्टीवल में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राफेल ज्यादा समय तक टिकने वाला राजनीतिक मुद्दा नहीं है।
राजदूत ने कहा, फ्रांस भारत में करीब 3 लाख से अधिक युवाओं के लिए रोजगार के अवसर प्रदान कर रहा है। हम यहां के पर्यटन, शिक्षा और रक्षा क्षेत्र में भी अच्छा सहयोग कर रहे हैं।
भारत और फ्रांस के बीच राफेल मामले पर कांग्रेस लगातार केंद्र की मोदी सरकार को घेरती रही है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 2 जनवरी को ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राफेल मामले में चार सवाल पूछ चुके हैं। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने 14 जनवरी को लोकसभा में राफेल डील पर हुई चर्चा में विपक्ष के सवालों के जवाब दिए थे।
पहले सवाल- एयरफोर्स को 126 एयरक्राफ्ट की जरूरत थी फिर 36 एयरक्राफ्ट ही क्यों खरीदे?
दूसरा सवाल- 560 करोड़ की जगह एक एयरक्राफ्ट खरीदने के लिए 1600 करोड़ रुपए क्यों खर्च किए गए?
तीसरा सवाल- आखिर पर्रिकर जी ने राफेल की फाइल अपने बेडरूम में क्यों रखी थी?
चौथा सवाल- एचएएल के बजाय AA (अनिल अंबानी) को क्यों चुना?सीतारमण ने लोकसभा में कहा था, ''इन्होंने (यूपीए सरकार ने) जब डील की थी, तब 18 विमान तैयार हालत में मिलने थे। बाकी 108 विमान 11 साल की अवधि में बनाए जाने थे। 2006 के बाद 2014 तक आप 18 जहाज भी हासिल नहीं कर सके? हमने डील में फ्लाईअवे विमानों की संख्या कम नहीं की। इसकी संख्या 18 से बढ़ाकर 36 की। हमें इस साल सितंबर में पहला और 2022 तक आखिरी राफेल मिल जाएगा। यूपीए के वक्त एक बेसिक राफेल की कीमत 737 करोड़ थी। हमें यह 9% कम रेट पर 670 करोड़ रुपए में मिलेगा। सेब की तुलना संतरे से ना करें।''
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