70 वर्षों में देश के संविधान में किए जा चुके हैं 103 संशोधन, इनमें से ये 12 सबसे महत्वपूर्ण

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संविधान सभा में नेहरू जी ने कहा था-'बदलती आवश्यकताओं के अनुसार भविष्य में संविधान में संशोधन की जरूरत हो सकती है, क्योंकि कोई भी संविधान आने वाली पीढ़ियों को बांध नहीं सकता।' दरअसल संविधान में संशोधन संविधान के ही अनुच्छेद 368 के अंतर्गत हो सकता है। इसमें अब तक 103 संशोधन हो चुके हैं। इसके लिए 124 संविधान संशाेधन विधेयक पारित हुए हैं। एेसे में कई बार यह भ्रांति हो जाती है कि संविधान में 124 संशोधन हो चुके हैं। हमारे संविधान को विश्व के सबसे अधिक संशोधित संविधानों में से माना जाता है। लेकिन इनमें से अधिकांश संशोधन छोटे-मोटे स्पष्टीकरण वाले ही हैं। जैसे- राज्य का नाम बदलना, भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करना या आरक्षण की समय अवधि बढ़ाना। यहां जानिए बीते 70 वर्षों में हुए 12 महत्वपूर्ण संशोधनों के बारे में...

  1. 1956 : इससे भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन किया गया। राज्य पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर यह संशोधन किया गया।

  2. 1976 : 42वां संशोधन ऐसा था, जिसके जरिए सरकार ने आपातकाल के दौरान बहुत सारे अधिकार अपने हाथ में ले लिए और न्यायपालिका के अधिकारों में भी कटौती कर दी। तब कई संशोधन तो ऐसे किए गए, जो लोकतंत्र की भावना के विरुद्ध थे। फिर आपातकाल समाप्त होने के बाद 43वें, 44वें संशोधनों के द्वारा उन अधिकांश संशोधनों को समाप्त किया गया, जो 42वेें संशोधन के जरिए लाए गए थे। इसके बावजूद 42वें संशोधन की कई ऐसी बातें थीं, जो जारी रहीं। जैसे संविधान में नागरिकों के मूल कर्तव्यों के संबंध में जो चार(क) भाग जोड़ा गया था, वो नहीं बदला और आज भी क़ायम है। इसे बहुत महत्वपूर्ण समझा जाता है, क्योंकि संविधान में मूल अधिकारों का विवेचन तो था, लेकिन मूल कर्तव्यों के बारे में कुछ नहीं कहा गया था। मूल कर्तव्यों की बात 42वें संशोधन से ही संविधान में आई। इसके अलावा एक महत्वपूर्ण बदलाव राष्ट्रपति के बारे में था। पहले सारी कार्यकारी शक्तियां राष्ट्रपति में ही निहित थीं। 42वें संशोधन में कहा गया है कि राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद की सलाह से ही काम करना होगा, जो आज भी है।

  3. 1978 : संपत्ति का अधिकार पहला महत्वपूर्ण संशोधन था। ज़मींदारी उन्मूलन और संपत्ति के अधिकार को लेकर लंबे समय तक न्यायपालिका और विधायिका के बीच रस्साकशी चली थी। ज़मींदारी उन्मूलन के संबंध में जो क़ानून संसद ने बनाया था, उसे न्यायपालिका ने निरस्त कर दिया। इसके बाद संविधान में संशोधन किया गया। फिर भी न्यायपालिका को स्वीकार्य नहीं हुआ तो कई संशोधन करने पड़े, जिनमें- पहला, चौथा, 17वां,

    29वां, 34वां आदि संशोधन हैं। आखिर 1978 में 44वें संशोधन द्वारा संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकारों के अध्याय से निकाल दिया गया।

  4. 1985 : इसके जरिए संविधान में दसवीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसे दल-बदल विरोधी कानून कहा जाता है। इसमें दल बदलने वालों की सदस्यता समाप्त करने का प्रावधान किया गया।

  5. 1992 : 73वां और 74वां संशोधन से पंचायती राज व्यवस्था आई। नगर पालिकाओं और पंचायतों को संवैधानिक दर्जा दिया गया और प्रावधान किया गया कि इन्हें 6 महीने से अधिक समय के लिए निलंबित नहीं रखा जा सकता।

  6. 2002 : इस संविधान संशोधन के माध्यम से छह से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार लाया गया। संविधान आयोग ने सिफ़ारिश की थी कि शिक्षा के अधिकार को मूल अधिकार माना जाए, लेकिन संशोधन में ऐसा सिर्फ 6 वर्ष से 14 वर्ष तक की आयु के लिए किया गया।

  7. 2004 : इसके माध्यम से केंद्र और राज्यों में मंत्रियों की संख्या पर अंकुश लगाया गया। तय किया गया कि मंत्रियों की संख्या निम्न सदन के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। इसके पहले कुछ राज्यों में ऐसा हो रहा था कि विधानसभा में कुल सदस्यों की संख्या तो 60 है और इसमें से 49 को मंत्री बना दिया गया। बाकी को भी मंत्री के समकक्ष दर्जा देकर पद दे दिया गया।इसे रोकने के लिए संविधान आयोग की सिफ़ारिश पर यह संशोधन लाया गया।

  8. 2006 : इसके माध्यम से संविधान के अनुच्छेद 15 में बदलाव करके सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़ों को शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की व्यवस्था की गई। पहले यह प्रावधान सिर्फ एससी-एसटी और एंग्लो इंडियंस के लिए था। इस संशाेधन के जरिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को यह सुविधा दी गई।

  9. 2014 : यह बहुत महत्वपूर्ण संशोधन था, जिसके द्वारा नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट कमीशन का प्रावधान किया गया। दुनिया में कोई देश ऐसा नहीं है, जहां जज अपने ही ब्रदर जज को खुद चुनते हों, लेकिन हिंदुस्तान में यह व्यवस्था थी और अभी भी है। इसमें जजों को जजों के कॉलेजियम द्वारा ही चुना जाता है, इसी में सुधार के लिए 99 वां संशोधन लाया गया। लेकिन जब मामला अदालत के सामने पहुंचा तो सुप्रीम कोर्ट ने उसे असंवैधानिक घोषित कर दिया।

    • 61वां संशोधन ः 1989 में इस संशोधन से मताधिकार की आयु 21 वर्ष से कम करके 18 वर्ष की गई थी।
    • 101वां संशोधन: 2017 में गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स (जीएसटी) को लागू करने के लिए 101वां संविधान संशोधन किया गया।
    • 103वां संशोधन: 2019 में संपन्न संसद के शीतकालीन सत्र में अंतिम संशोधन आर्थिक रूप से पिछड़ों को आरक्षण देने के लिए किया गया है।
  10. दुनिया में भारत का ही संविधान है, जो हाथ से बने कागज पर हाथ से लिखा हुआ है। हर पन्ने पर सोने की पत्तियों वाली फ्रेम बनी है। साथ ही हर अध्याय के आरंभिक पृष्ठ पर एक कलाकृति भी बनाई गई है। संविधान की मूल प्रति को पहले फलालेन के कपड़े में लपेटकर नेफ्थलीन बॉल्स के साथ रखा गया था।

    1994 में संसद भवन के पुस्तकालय में इसे वैज्ञानिक विधि से तैयार चेम्बर में सुरक्षित कर दिया गया। इससे पहले यह देखा गया कि दुनिया में अन्य संविधानों को किस तरह सुरक्षित रखा गया है। पता चला कि अमेरिकी संविधान सबसे सुरक्षित वातावरण में है। वॉशिंगटन स्थित लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस में हीलियम गैस के चेम्बर में इस एक पेज के संविधान को रखा गया है। इसके बाद अमेरिका के गेट्टी इंस्टीट्यूट, भारत की नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी व भारतीय संसद के बीच करार के बाद गैस चेम्बर बनाने की पहल हुई।

    चूंकि भारतीय संविधान आकार में बड़ा और भारी है, इसलिए चेम्बर बड़ा हो गया। इसमें हीलियम गैस रोकने की तमाम कोशिशें नाकाम हो गईं तो नाइट्रोजन गैस का चेम्बर बनाया गया। कागज की सुरक्षा के लिए ऐसी गैस की आवश्यकता थी, जो इनर्ट यानी नॉन-रिएक्टिव हो। नाइट्रोजन भी ऐसी ही है। भारतीय संविधान काली स्याही से लिखा है, लिहाजा ये आसानी से उड़ (ऑक्सीडाइज) सकती थी।

    इसे बचाने के लिए ह्युमिडिटी 50 ग्राम प्रति घन मीटर के आस-पास रखने की जरूरत थी। इसलिए एयरटाइट चेम्बर बनाया। ह्युमिडिटी मेन्टेन रखने के लिए चेम्बर में गैस मॉनिटर लगाए गए। चेम्बर के निर्माण के समय लोकसभा सचिवालय में अतिरिक्त सचिव रहे डॉ. रविंदर कुमार चड्ढा ने दैनिक भास्कर को बताया कि हर साल चेम्बर की नाइट्रोजन गैस खाली की जाती है और संविधान की सेहत जांची जाती है। हर दो महीने में इस चेम्बर की चेकिंग भी की जाती है। सीसीटीवी कैमरे से इस पर लगातार निगरानी रहती है।



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      103 amendments have been made Constitution in 70 years

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