Cheteshwar Pujara Birthday Special : न होली मनाई, न दीपावली... मैच खेलने गए थे तभी मां का हो गया था निधन, ऐसी है इस प्लेयर के स्ट्रगल की कहानी
नेशनल डेस्क.टीम इंडिया की नई दीवार कहे जाने वाले चेतेश्वर पुजारा आज अपना 31वां जन्मदिनमना रहे हैं। उन्होंने ऑस्ट्रलिया के खिलाफ खेली गई टेस्ट सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाकर पुजाराजीत के हीरो बने थे। उन्होंने सीरीज के चार टेस्ट मैचों में तीन शतक और एक अर्धशतक की मददसे 521 रन बनाए और 'मैन ऑफ द सीरीज' का खिताब अपने नाम किया। पुजारा का आज टीमइंडिया के लिए नई दीवार बनना आसान नहीं था। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि क्रिकेटरबनने के लिए पुजारा ने कभी होली और दीपावलीनहीं मनाई।
पिता नहीं मनाने देते थे त्योहार : एक इंटरव्यू में पुजारा ने खुलासा किया कि 'मेरे पिता मुझे कोई त्योहार नहीं मनाने देते थे। होली इसलिए नहीं खेलने देते थे कि कहीं रंग से मेरी आंखें खराब ना हो जाएं, इसके अलावा हाथ जलने के डर से पटाखे नहीं फोड़ने देते थे।
मैच खेलने गए और मां की हो गई थी मौत : 25 जनवरी 1988 को राजकोट में जन्में पुजारा के करियर में उनकी मां का बड़ा योगदान रहा है। लेकिन वो पुजारा की कामयाबी नहीं देख पाईं। पुजारा 2005 में अंडर-19 का मैच खेलने निकले थे तब उन्होंने अपनी मां से फोन पर बात की। उन्होंने ने मां से कहा कि वे पिता को बोल दें कि वे बस मैच के लिए निकल रहे हैं, और जब लौटें तो पिता उन्हें लेने आ जाएं।
- अगले दिन जब पुजारा मैच के लिए स्टेडियम पहुंचे उनकी मां की मौत की खबर आई। ये 17 साल के पुजारा के लिए बहुत बड़ा सदमा था। पुजारा की मां की कैंसर से मौत के बाद उन्होंने क्रिकेट को मां के सपने की तरह जिया। ठीक 5 साल बाद अपने परफॉर्मेंस के दम पर उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया।
बहुत धार्मिक हैं चेतेश्वर पुजारा : पुजारा चाहे मैच खेल रहे हों या ट्रेवेल कर रहे हों, हालात चाहे जो भी हों, पूजा करना कभी नहीं भूलते। चेतेश्वर और उनका परिवार हरिचंद्र दास महाराज जी का भक्त है। मैचों के दौरान वो या तोअपनी पारी के बाद या फिर मैदान में जाने से पहले पूजा जरूर करते हैं। उनके पिता कहते हैं, पूजा उसके मन को शांत रखती है। यही कारण है कि वो इतना एकाग्र और शांत रहता है। पुजारा को पढ़ना भी बहुत पसंद है। वो कामयाब लोगों की जीवनी पढ़ कर प्रेरणा लेते हैं। उनके ट्रेवल बैग में अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा और अंबानी परिवार से जुड़ी किताबों के साथ-साथ अन्य किताबें भी रहती हैं। उन्हें जब भी वक्त मिलता है वो किताबें जरूर पढ़ते हैं।
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