कन्हैया कुमार का दावा- मोदी ने जन-धन खाते पर मिनिमम बैलेंस का फाइन लगाकर करोड़ों कमाए...क्या है इस दावे का सच

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नेशनलडेस्क. जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने 22 जनवरी को एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा कि मोदी ने पहले जन-धन खाता खुलवाया, फिर उसमें पैसा डलवाया और फिर मिनिमम बैलेंस पर फाइन लगाकर हजारों करोड़ रुपए कमाए। कन्हैया के मुताबिक, जन-धन खातों में मिनिमम बैलेंस नहीं होने पर सरकार ने गरीबों से फाइन लगाया।

कन्हैया ने क्या किया दावा?
कन्हैया कुमार ने 22 जनवरी को ट्वीट किया था, जिसे उन्होंने अब डिलीट कर दिया है। इस ट्वीट में कन्हैया ने लिखा, "गप्पू जी ने पहले जन-धन योजना में बैंक में खाता खुलवाया, फिर नोटबंदी करके सारा पैसा उसमें डलवाया, फिर मिनिमम बैलेंस पर फाइन लगाकर हज़ारों करोड़ कमाया और फिर धन्नासेठों का तीन लाख करोड़ का लोन माफ़ कर दिया। पता है ना आपको?"

पड़ताल : क्यों गलत है कन्हैया का दावा?

कन्हैया के इस दावे की पड़ताल करने पर हमें 16 सितंबर 2017 को किए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) का ट्वीट मिला, जिसमें बैंक ने साफ-साफ लिखा है कि जन-धन खाताधारकों को अपने अकाउंट में मिनिमम एवरेज बैलेंस मेंटेन रखने की जरूरत नहीं है।

-दरअसल, एसबीआई ने दो साल पहले अकाउंट में मंथली बैलेंस रखना शुरू किया था, जिसपर आपत्ति भी जताई गई थी। सितंबर 2017 में एसबीआई ने अपने ट्वीट में साफ किया था कि, "प्रधानमंत्री जन-धन योजना, स्मॉल अकाउंट और बेसिक सेविंग बैंक डिपॉजिट (बीएसबीडी) अकाउंट में मिनिमम बैलेंस रखना जरूरी नहीं है।"

क्या है प्रधानमंत्री जन-धन योजना?
मई 2014 में मोदी सरकार आने के बाद 28 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री जन-धन योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सभी लोगों का बैंक अकाउंट खोलना है। इस योजना के तहत जीरो बैलेंस पर कोई भी व्यक्ति अपना बैंक अकाउंट खुलवा सकता है। इस योजना के तहत बैंक अकाउंट खुलवाने पर खाताधारक को एक लाख रुपए का एक्सीडेंटल कवर दिया जाता है, साथ ही खाताधारक की मौत होने पर 30 हजार रुपए उसके नॉमिनी को दी जाती है।



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