Republic Day 2019 : देश के लिए सीने पर खाई थी गोली, अब राष्ट्रपति के हाथों मिला शहीद बेटे को वीरता का सम्मान, मां की आंखें हो गईं नम

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नेशनल डेस्क. देशभर में गणतंत्र दिवस (Republic Day 2019) की धूम है। इंडिया गेट पर स्थित अमर जवान ज्योति पर प्रधानमंत्री ने पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बादपरेड की शुरुआत हुई। राजपथ पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने लांस नायक नजीर अहमद वानी को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया। शहीद की पत्नी ने ये सम्मान लिया।इस दौरान नजीर वानी की मां वहां मौजूद थीं। राष्ट्रपति के हाथों बेटे को मिले इस सम्मान को देखते ही नजीर की मां की आंखें नम हो गईं। लांस नायक नजीर अहमद वानी जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में एक ऑपरेशन के दौरान शहीद हो गए थे।

- एक दिन पहले वानी की पत्नी मेहजबीन ने कहा कि उनके पति के पराक्रम का ओज ऐसा था जिसने उनकी शहादत की खबर सुनकर भी आंखों से आंसू नहीं बहने दिए। पेशे से शिक्षक एवं दो बच्चों की मां मेहजबीन ने कहा कि नाजीर का प्यार और निडर व्यक्तित्व, युवाओं को अच्छा नागरिक बनने की दिशा में प्रोत्साहित करने का प्रेरणास्रोत है। उन्होंने बताया कि दक्षिण कश्मीर के एक स्कूल में 15 साल पहले हुई मुलाकात में दोनों के बीच पहली नजर का प्यार हो गया था। जिसके बाद दोनों ने शादी कर ली।

आतंकियों का साथ छोड़कर सेना में हुए थे शामिल : शहीद लांस नायक नजीर अहमद वानी (Lance Naik Nazir Ahmad Wani) आतंकियों का साथ छोड़कर सेना में शामिल हुए थे। उन्होंने घाटी में एक मुठभेड़ में 6 आतंकियों को मार गिराया था और शहीद हो गए थे। उन्हें दो बार सेना मेडल भी मिल चुका है। उनकी शहादत के बाद परिवार ही नहीं पूरे गांव ने उन्हें नम आंखों से विदाई दी थी।

एक आतंकी से आर्मी मैन बनने का सफर : जम्मू-कश्मीर की कुलगाम तहसील के अश्मूजी गांव के रहने वाले नजीर एक समय आतंकी थे। उन्होंने आतंकियों के साथ बंदूक थाम ली थी। हालांकि, कुछ ही वक्त बाद उन्हें गलती का अहसास हुआ और वो आतंकवाद छोड़ सेना में भर्ती हो गए। उन्होंने अपने 2004 में करियर की शुरुआत टेरिटोरियल आर्मी की 162वीं बटालियन से की थी।

शहादत की कहानी : 23 नवंबर 2018 को 34 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात वानी जब अपने साथियों के ड्यूटी पर थे, तब उन्हें शोपियां के एक गांव में हिज्बुल और लश्कर के 6 आतंकियों के होने की खबर मिली थी। वानी ने अपनी टीम के साथ आतंकियों के भागने का रास्ता रोकने के लिए ऑपरेशन को अंजाम दिया। एनकाउंटर में वानी और उनके साथियों ने 6 आतंकियों को मार गिराया था। वानी जख्मी होने के बाद भी आतंकियों के सामने टिके रहे थे और दो आतंकियों ने उन्होंने खुद मार गिराया था। हालांकि, इसके बाद हॉस्पिटल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। वानी के उनके पैतृक गांव में 21 तोपों की सलामी के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया गया था। आर्मी ने वानी को अपना सच्चा सैनिक बताया था। वो अपने पीछे परिवार में पत्नी और दो बच्चे छोड़ गए।



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Happy republic day Special Story, lance naik nazir ahmed wani awarded ashok chakra

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