पेट्रोल पंपों और कुकिंग गैस एजेंसी के बंटवारे में सरकार गरीब सवर्णों के लिए बढ़ा सकती है 10 फीसदी कोटा

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नेशनल डेस्क. केंद्र सरकार ने हाल ही में गरीब सवर्णों को सरकारी नौकरी और पढ़ाई में 10 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान किया है। अब सरकार इसके तहत गरीब सवर्णों को राज्य सरकार द्वारा संचालित ऑयल मार्केटिंग कंपनीज के जरिए पेट्रोल पंप और कुकिंग गैस एजेंसी बांटी जा सकती है। दो सरकारी अफसरों ने नाम का खुलासा न करने की शर्त पर बताया कि ऐसा इसलिए संभव हैं क्योंकि ये कंपनियां केंद्र सरकार के रिजर्वेशन पॉलिसी को फॉलो करती हैं।

आरक्षण के तहत पेट्रोल पंप
- इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से एक अफसर ने बताया, नए पारित कानून के अधिसूचित होने के बाद ईडब्ल्यूएस श्रेणी को 10 फीसदी आरक्षण (रीटेल आउटलेट्स के आवंटन में) देने का औपचारिक प्रस्ताव सही समय पर शुरू किया जाएगा।
- हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय के सीनियर अफसरों ने इस पर कोई कमेंट नहीं किया है। विधेयक को प्रेसिडेंट की मंजूरी मिलने के बाद जल्द ही अधिसूचित किया जाएगा।
- राज्य के स्वामित्व वाले फ्यूल रीटेलर्स- इंडियन ऑयल कॉर्प, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्प लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉर्प लिमिटेड में पहले से ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण नीति है।
- एचपीसीएल के पूर्व अध्यक्ष और प्रबंध संचालक एस रॉय चौधरी ने कहा ईडब्ल्यूएस श्रेणी के तहत लोगों को आरक्षण देना अच्छा कदम है। पर इसे लेकर सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि ग्राहक और कंपनी को इससे परेशानी न हो। अगर इसमें सामाजिक और व्यावसायिक हितों के बीच संतुलन है, तो यह एक जीत की स्थिति है।

रिजर्वेशन के तहत बंटवारा
- मनमोहन सिंह सरकार के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने जुलाई 2012 को ही पेट्रोल पंप और एलपीजी एजेंसियों के बंटवारे में ओबीसी कोटे की शुरुआत की थी।
- मौजूदा वक्त में ये कोटा एससी-एसटी के लिए 22.5 फीसदी और ओबीसी के लिए 27 फीसदी है, जबकि सामान्य कैटेगरी के लिए पूरे देश में ये 50.5 फीसदी है। हालांकि, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड और मिजोरम में ये अलग है।
- पूर्वोत्तर के राज्यों में रीटेल आउटलेट्स के लिए रिजर्वेशन सामाजिक-आर्थिक संरचना के मुताबिक अलग-अलग है। अरुणाचल प्रदेश में एसटी के लिए 70 फीसदी आरक्षण है। वहीं, विभिन्न श्रेणियों में कोटा के अंदर कोटा है, जिसमें डिफेंस और महिलाएं भी शामिल हैं।



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