रसूखदार परिवार 3 पीढ़ियों से उठाते आ रहे फायदा

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नई दिल्ली (अमित कुमार निरंजन).सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण के बिल पर शनिवार को राष्ट्रपति की भी अंतिम मुहर लग गई है। बहस शुरू हो गई है कि इससे सवर्णों को वास्तव में कितना लाभ होगा? लेकिन चौंकाने वाली बात तो यह है कि इससे पहले एससी-एसटी वर्ग के लिए दशकों से लागू आरक्षण का कितना फायदा किसे मिला इसकी जानकारी किसी को नहीं है।

90% पिछड़े परिवारों को लाभ नहीं
भास्कर ने एससी-एसटी वर्ग के आरक्षण की नीति का विश्लेषण किया तो पता चला कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जो करीब तीन-तीन पीढ़ियों से आरक्षण का लाभ ले रहे हैं। पड़ताल में हमें ऐसे कई मामले मिले। हमनेयहां ऐसे 10 प्रतिनिधि परिवारों का ही जिक्र किया है। वहीं विशेषज्ञों का दावा है कि करीब 90% ऐसे पिछड़े परिवार हैं जो एक बार भी इसका उचित लाभ नहीं ले पाए हैं। गौरतलब है कि सरकार के पास अभी ऐसा कोई जरिया नहीं है कि जिससे पता चल सके कि किसे कितना फायदा मिला।

10 फीसदी लोग ही उठा रहे फायदा
मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज के पूर्व प्रोफेसर और रिजर्वेशन विषयों के एक्सपर्ट पी. राधाकृष्णन का कहना है कि किसी भी तरह का क्रीमीलेयर तय न होने से सिर्फ 10 फीसदी लोग ही बार-बार आरक्षण का फायदा उठा रहे हैं। वहीं भाजपा सांसद उदित राज कहते हैं कि आरक्षण को गरीबी उन्मूलन का जरिया नहीं मानना चाहिए। ये सामाजिक समानता के लिए है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई परिवार तीन पीढ़ियों से रिजर्वेशन का फायदा ले रहा है या चार पीढ़ी से। एससी-एसटी कैटेगरी को पीढ़ी दर पीढ़ी रिजर्वेशन देने में कोई खामी नहीं है।

क्रीमीलेयर का समर्थन नहीं

लोक जनशक्ति पार्टी के सांसद चिराग पासवान का कहना है कि अगर सरकार सभी कैटेगरी में बेकलॉग भर दे तो इससे आरक्षण संबंधी कई बातों का जवाब मिल जाएगा।वहीं उन्होंने कहा कि एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमीलियर का हम समर्थन नहीं करते हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी रिजर्वेशन लेने वालों परिवारों में हमें कोई खामी नजर आती है। क्योंकि आरक्षण सामाजिक समरसता का विषय है।दलित इंडियन चेंबर्स ऑफकॉमर्स के संस्थापक मिलिंद कांबले का कहना है कि मैं कई ऐसे एससी परिवारों को जानता हूं, जो रिजर्वेशन का फायदा ले चुके हैं, उन्हें अब आरक्षण छोड़ देना चाहिए। अखिल भारतीय सिविल एवं प्रशासनिक सेवा परिसंघ के पूर्व अध्यक्ष हरदेव ने बताया कि देश में एससी व एसटी कैटेगरी के ऐसे कई ए क्लास ऑफिसर हैं जिनकी कई पीढ़ियां रिजर्वेशन का फायदा ले चुकी हैं और अभी भी ले रही हैं।

रिजर्वेशन आर्थिक आधार पर हो

यूथ फॉर इक्विलिटी के सदस्य डॉ कौशल ने बताया कि रिजर्वेशन आर्थिक आधार पर होना चाहिए। एससी केटेगरी के जो लोग एम्पावर हाेते जा रहे हैं उनके लिए रिजर्वेशन का नियम खत्म होना चाहिए। पूर्व आईएएस और ऑल इंडिया इक्विलिटी फोरम के नेशनल कन्वेनर समीर सिंह चंदेल बताते हैं कि एससी वर्ग के उत्थान के लिए चार प्रकार से कदम उठाए गए हैं। उनके लिए जनकल्याणकारी योजनाएं, शिक्षा में आरक्षण, सरकारी नौकरी में आरक्षण और सांसद व विधायक के लिए रिजर्व सीट का प्रावधान रखा गया है। एससी वर्ग से आईएएस और सांसद बनने वाले करीब 90 फीसदी ऐसे लोग हैं जिनकी पिछली पीढ़ी ने रिजर्वेशन का लाभ किसी न किसी रूप में लिया होता है। इस कारण उनके ही वर्ग से 95 फीसदी वंचित लोगों को अभी भी एक बार भी आरक्षण का लाभ नहीं मिला है।


सिर्फ एससी-एसटी में नहीं है क्रीमीलेयर

ओबीसी के लिए उच्च शिक्षा और नौकरी में 27 प्रतिशत आरक्षण का नियम है। लेकिन इसका फायदा उन्हें ही मिलता जो क्रीमीलियर में नहीं आते हैं यानी उनकी या उनके पिता की वार्षिक आय आठ लाख रुपए से कम हो। वहीं एसटी का 7.5 और एससी का 15 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान उच्च शिक्षा और सरकारी नौकरी में है। वहीं इस वर्ग के लिए लोकसभा, विधानसभा और नगर पालिका में चुनाव लड़ने के लिए आरक्षित सीट रखी गई है। इनके लिए किसी भी प्रकार का क्रीमीलियर का नियम नहीं है। इसके अलावा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के बच्चों के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरी में आरक्षण का प्रावधान है। शहीदों पर आश्रित परिजन के लिए भी आरक्षण का प्रावधान है। लेकिन ये दोनों ही प्रकार के रिजर्वेशन सिर्फ एक पीढ़ी तक ही दिया जाता है। वहीं दिव्यांग के लिए भी आरक्षण का प्रावधान है लेकिन यह उस व्यक्ति को ही मिलता है जो भारत सरकार द्वारा तय नियम के मुताबिक दिव्यांग हों, इनके बच्चों को आरक्षण नहीं मिलता है।

परिवार राजनीति-अफसरशाही में हावी

राजस्थान के बामनवास गांव से निकला श्रीनारायण मीणा का परिवार करीब 40 साल से पॉवर में है। वे सरपंच थे। मीणा समाज को प्रदेश में एसटी आरक्षण प्राप्त है। इस कुटुंब से निकले परिवारों मेें 25 से ज्यादा लोग राजनीति और अफसरशाही में हावी रहे हैं। परिवार के नमोनारायण मीणा आईपीएस रहे। बाद में केंद्र में मंत्री रहे। हरीश मीणा डीजीपी रहे। एसटी की रिजर्व सीट पर चुनाव भी लड़ा। ओपी मीणा भी मुख्य सचिव थे।

परिवार पहली पीढ़ी दूसरी पीढ़ी तीसरी पीढ़ी
जगजीवन राम परिवार (बिहार) जगजीवन राम उपप्रधानमंत्रीरहे। रिजर्व सीट से लड़ते थे,30 से ज्यादा वर्षों तक मंत्री रहे। इनकी पुत्री मीरा कुमार 5 बार सांसद रहीं। आईएफएस और लोकसभा स्पीकर भी रहीं। जगजीवन राम के बेटे सुरेश की बेटी मेधावी कीर्ति झज्जर (रिजर्व) से विधायक रहीं।
डाबीपरिवार (दिल्ली) आईएएस टॉपर (2015) टीना डाबी के दादा नंद किशोर सीएसआईआर में अधिकारी थे। नंदकिशोर के बेटे जसवंत ने यूपीएससी (इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज) परीक्षा पास की थी। जसवंत की बेटी टीना आईएस बनीं। पहली बार एससी कैंडीडेट ने टॉप किया।
गावित परिवार (महाराष्ट्र) माणिकराव होडल्या गावित 8 बार नंदूरबार से सांसद रहे। यूपीए-2 में मंत्री भी रहे। बेटी निर्मला नाशिक की इगतपुरी (एसटी) सीट से 2 बार विधायक रही हैं । निर्मला की बेटी नयना ने 2017 में नाशिक (रिजर्व) जिला परिषद के लिए चुनाव लड़ा था।
प्रसादपरिवार (उत्तरप्रदेश) वरिष्ठ कांग्रेस नेता माता प्रसाद केंद्रीय मंत्री रहे और राज्यपाल रहे। बड़े बेटे केशव इनकम टैक्स कमिश्नर, मझले बेटे डॉ सर्व प्रकाश भास्कर सीएमओ हैं। डॉ सर्व प्रकाश के बेटे प्रियदर्शी रंजन एमसीएच, छोटे बेटे डॉ रवि, चेस्ट स्पेशलिस्ट हैं।
सिंहपरिवार (उत्तरप्रदेश) देवी सिंह अशोक आईपीएस अफसर रहे। इनके बेटे भी आईपीएस अफसर हैं। पुत्र बीपी अशोक आईपीएस हैं। बहू मंजू अशोक सरकारी अधिकारी हैं। बीपी अशोक की बेटी डाॅ. अवलोकिता और दामाद डॉ. योगेश भी आईएएस हैं।
चौधरी परिवार (पंजाब) स्व. मास्टर गुरबंता सिंह
जालंधर की करतारपुर (रिजर्व)
सीट से कांग्रेसी विधायक रहे।
एक बेटे संतोख सिंह मौजूदा सांसद हैं। दूसरे बेटे स्व. जगजीत सिंह मंत्री रहे थे। संतोख के बेटे बिक्रम चुनाव लड़े, हारे। जगजीत के बेटे सुरिंदर अभी एमएलए हैं।


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Rosy family take Advantages of reservation for 3 generations

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