Swami Vivekananda Jayanti 2019: सुनिए स्वामीजी की शिकागो वाली फेमस SPEECH
कौन थे स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद का जन्म कोलकाता में 12 जनवरी 1863 को हुआ था। स्वामी जी के पिता का नाम विश्वनाथ दत्त और माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था। स्वामी जी का मूल नाम नरेंद्रनाथ था, लोग उन्हें नरेन के नाम से भी जानते थे। इनके पिता कोलकाता हाईकोर्ट में अटार्नी ऑफ लॉ थे। स्वामी जी ने कोलकाता के कॉलेज से बी.ए. और लॉ की डिग्री हासिल की थी। लेकिन, उनका मन अध्यात्म की ओर ज्यादा था।
कैसे पड़ा विवेकानंद नाम
नरेंद्र नाथ को विवेकानंद नाम उनके गुरु काली माता के भक्त स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने दिया था। नरेंद्र अद्भुत प्रतिभा के धनी थे और वेदांत पर काफी अच्छी पकड़ थी। विषयों के गहन चिंतन और अध्ययन में उनकी बुद्धि-विवेक को देखकर ही रामकृष्ण परमहंस ने उन्हें सन्यास के बाद विवेकानंद नाम दिया।
क्यों शिकागो गए थे विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद को विश्वपटल पर पहचान शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन से मिली। इस सम्मेलन में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। ये सम्मेलन उनकी पहचान बन गया क्योंकि उन्हें वहां बोलने के लिए सबसे कम समय दिया गया था लेकिन पहले ही वाक्य बोलने के बाद उनके सम्मान में काफी देर तक तालियां बजती रहीं। वो वाक्य था मेरे प्यारे अमेरिकन भाइयों और बहनों।
स्वामी विवेकानंद ने 11 सितंबर 1893 को शिकागो (अमेरिका) में विश्व धर्म सम्मेलन में एक बेहद चर्चित भाषण दिया था। यूट्यूब पर ये भाषण मौजूद है लेकिन इसके असली होने की पुष्टि दैनिक भास्कर नहीं करता है..
सुनिए स्वामी विवेकानंद वो भाषण जिस पर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा था पूरा हॉल
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