नए ATM कार्ड में न पिन डालना होता है, न ही ओटीपी आता है, कार्ड को मशीन से टच करते ही हो जाता है पेमेंट, एक्सपर्ट बोले यही है खतरा

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न्यूज डेस्क। सूरत के जितेंद्र खत्री परिवार के साथ फिल्म देखने गए थे। टिकट खरीदने के लिए उन्होंने अपना डेबिट कार्ड दिया। काउंटर पर मौजूद एक्जीक्यूटिव ने 1500 रुपए पेमेंट लेकर कार्ड उन्हें लौटा दिया। जब जितेंद्र ने पूछा कि मैंने पिन तो डाला ही नहीं तो पेमेंट कैसे हो गया तो एक्जीक्यूटिव ने बताया कि आपका कार्ड कॉन्टैक्टलेस है। इससे 2000 रुपए तक की शॉपिंग के लिए पिन की जरूरत नहीं होती। कार्ड को मशीन के पास ले जाने पर ही पेमेंट हो जाता है।

जितेंद्र की ही तरह इन दिनों कई ग्राहकों के पास कॉन्टैक्टलेस पेमेंट फीचर वाले कार्ड पहुंच रहे हैं। 1 जनवरी 2019 से विभिन्न बैंकों के अधिकांश कार्ड ऐसे ही आ रहे हैं। नए कॉन्टैक्टलेस डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स ने ग्राहकों की चिंता बढ़ा दी है। इसकी वजह यह है कि मॉल या दुकानों में इनके जरिए एक बार में दो हजार रुपए तक की शॉपिंग के लिए किसी भी तरह के पिन कोड या ओटीपी की जरूरत नहीं होती। बस कार्ड को पेमेंट मशीन से टच करने पर ही पेमेंट हो जाता है। इससे ज्यादा के लिए ही पिन या ओटीपी लगेगा। यानी आपका कार्ड किसी और के हाथ लग जाए तो वह एक बार में कम से कम दो हजार रुपए तक की शॉपिंग कर लेगा। हो सकता है कि जब तक आपको इसका पता चल, तब तक वह आपके खाते से इससे ज्यादा पैसे उड़ा चुका हो।

तीन गुना तेजी से होता है पेमेंट
पिछले कुछ समय से बड़ी संख्या में ग्राहकों को विभिन्न बैंकों के वीज़ा, मास्टरकार्ड और अमेरिकन एक्सप्रेस कंपनी के इस फीचर वाले डेबिट/क्रेडिट कार्ड मिल रहे हैं। इन बैंकों में एसबीआई, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, एक्सिस और आईडीबीआई जैसे बैंक शामिल हैं। ज्यादातर बैंक अपने विज्ञापनों और वेबसाइट्स पर इसे ज्यादा सुरक्षित बता रहे हैं। उनका तर्क है कि इस सुविधा से कार्ड आपके हाथों में ही रहता है और क्लोनिंग का खतरा नहीं रहता है। साथ ही तीन गुना तेज पेमेंट का दावा भी किया जा रहा है।

एक्सपर्ट बोले, खतरा तो है
कॉन्टैक्टलेस कार्ड की सुरक्षा से जुड़े सवाल पर आईडीबीआई बैंक, भोपाल के डीजीएम श्रीजीत ने कहा, 'इन कार्ड्स से सुरक्षा को खतरा तो है। कम से कम दो हजार रुपए तक तो बिना पिन कोड शॉपिंग की जा सकती है। हालांकि बैंक के एप के जरिए इसकी लिमिट तय कर सकते हैं।' साइबर सुरक्षा के एक्सपर्ट पवन दुग्गल भी मानते हैं कि इस तरह का लेन-देन असुरक्षित हो सकता है और साइबर फ्रॉड को बढ़ावा दे सकता है। इसकी सुरक्षा को लेकर और अधिक स्पष्टता लाने और ग्राहकों को जागरूक करने की जरूरत है। ग्राहकों को भी इस कार्ड का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए। इस मामले में मौजूदा कानून पर्याप्त नहीं हैं। इन कार्ड्स को जारी करने वाले बैंक और कंपनियां इनके पूरी तरह सुरक्षित होने का दावा कर रहे हैं।

ऐसे काम करता है कॉन्टैक्टलेस कार्ड
इन कार्ड्स और मशीनो पर एक खास चिन्ह बना होता है। इस मशीन पर करीब 4 सेंटीमीटर की दूरी पर कार्ड रखना या दिखाना होता है और आपके खाते से पैसे कट जाते हैं। यानी कार्ड को स्वाइप या डिप करने की जरूरत नहीं होती और न ही पिन एंटर करना होता है।

मेरा कार्ड गुम गया और किसी के हाथ लग गया तो क्या होगा?, देखिए अगली स्लाइड्स में...



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