सवाल-80 साल की हो गई हैं, पार्टी कैसे संभालेंगी?, शीला- उम्र को छोड़िए, अब कांग्रेस खड़ी हो जाएगी
नई दिल्ली (अखिलेश कुमार). लोकसभा चुनाव के ऐन पहले दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की कमान तीन बार की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को सौंप दी गई। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली की कमान सौंपने के लिए मतदाता पहचान पत्र नंबर से जुड़े शक्ति ऐप पर 50 हजार कार्यकर्ताओं के सर्वे का सहारा लिया। उसमें शीला दीक्षित पहली पसंद बनीं। कांग्रेस की घोषणा के बाद भास्कर ने शीला दीक्षित और तीनों वर्किंग प्रेजिडेंट से सीधी बात की। पेश हैं उनसे बातचीत के अंश...
सवाल-आप 80 साल की हैं, पहले लोकसभा चुनाव है, फिर विधानसभा। अरविंद केजरीवाल 50 साल और मनोज तिवारी 47 साल के हैं। आप चुनावी भागदौड़ में पिछड़ेंगी तो नहीं?
जवाब: आप जब अभी बात कर रहे हैं तब भी मैं भागदौड़ कर रही हूं। उम्र को छोड़िए, उस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगी। आगे सब समय ही बताएगा।
सवाल-1998 में अध्यक्ष बनीं तो 6 महीने बाद ही दिल्ली में कांग्रेस को सत्ता मिल गई थी। आप सीएम भी बनीं। 2020 में विस चुनाव है, तब क्या आप सीएम प्रत्याशी होंगी?
जवाब: मीटिंग होने दीजिए तब बताऊंगी।
सवाल- कांग्रेस का आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन की चर्चा है?
जवाब: जब तक मैं पार्टी से मीटिंग नहीं कर लेती, कुछ नहीं कहूंगी। चर्चा तो आप लोग करते ही रहते हैं। पहले मीटिंग हो जाए तब बात करिएगा।
सवाल- लोकसभा व विस चुनाव लड़ने को लेकर आपका क्या प्लान है?
जवाब: 6 महीने, तीन महीने या दो हफ्ते पहले कुछ नहीं बताऊंगी। पहले सेटल डाउन होने दीजिए।
सवाल- कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है लेकिन दिल्ली में लोस व विस में शून्य का आंकड़ा है। पार्टी कैसे उभारेंगी?
जवाब: सब मुद्दे लेकर जाऊंगी। आप खुद रियलाइज करेंगे। भाजपा हो या आप, मैं उन्हें इतना ही कहना चाहती हूं अब कांग्रेस खड़ी हो जाएगी।
शीला दीक्षित पर फिर भरोसे का कारण
- दिल्ली में शीला दीक्षित के बराबर कद का कोई दूसरा नेता नहीं जिसके पीछे पब्लिक चलने को तैयार हो।
- विस चुनाव 2013, लोकसभा चुनाव 2014 और विस चुनाव 2015 भी शीला दीक्षित के 15 साल के कार्यकाल में किए गए विकास कार्य पर लड़े। हालांकि 2014 और 2015 के चुनाव में सीधी कमान इन्हें नहीं दी गई जिससे कांग्रेस हारी।
- दिल्ली में पूर्व मंत्री और पूर्व विधायकों में शीला दीक्षित करीबियों की बड़ी संख्या है। फिर आरडब्ल्यूए और बाजार एसोसिएशन को भागीदारी से जोड़ा था तो वो ग्रुप भी शीला दीक्षित के उतरने से कांग्रेस के साथ आने की उम्मीद जताई जा रही है।
3 वर्किंग प्रेजिडेंट से 3 सवाल; जवाब लगभग एक जैसे :पार्टी शून्य पर है, कैसे उभारेंगे?
- हारून यूसुफ - नई कमेटी कांग्रेस को मजबूत करके आगे ले जाएगी। आम आदमी पार्टी झूठ के दम पर सत्ता में आई। आसमान में तारे बिखेरने की बात की थी। जनलोकपाल गायब हुआ। सब मुद्दों पर लड़ेंगे। बूथ लेवल पर पार्टी को मजबूत करके कार्यकर्ताओं को उतारेंगे।
- देवेंद्र यादव- शीला दीक्षित का अनुभव और तीन वर्किंग प्रेजिडेंट एक टीम के तौर पर उतरेंगी तो पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह और बढ़ेगा। युवा टीम है तो हर वर्ग के लोग जुड़ेंगे।
- राजेश लिलोठिया - पार्टी जीरो नहीं है। चुनाव जरूर हारे हैं, पहले हम 15 साल सत्ता में रहे। पहले हम तीनों ने शीला दीक्षित के मुख्यमंत्री रहते टीम में काम किया है। संगठन को स्ट्रीम लाइन करके जीत की दिशा देंगे।
आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर आपका क्या कहना है?
- हारून यूसुफ-अभी गठबंधन की कोई बात नहीं है। हाईकमान का फैसला मानेंगे।
- देवेंद्र यादव- हम तैयार हैं अकेले लड़ने के लिए। फैसला हाई कमान पर।
- राजेश लिलोठिया-गठबंधन की बात मेरी जानकारी में नहीं है। उसका फैसला राहुल गांधी या कोर कमेटी करेगी। मेरा व्यक्तिगत मत है कि हमें सहारे की जरूरत नहीं है।
शीला दीक्षित की उम्र 80 साल है, ऐसे में भागदौड़ कितना कर पाएंगी?
- हारून यूसुफ- शीला जी ने 15 साल सत्ता चलाई है। बड़ी जिम्मेदारी निभाई है।
- देवेंद्र यादव- उम्र कोई मायने नहीं रखती। अनुभव से बहुत सीखने को मिलता है। उनके नेतृत्व में बड़े से बड़े नेता भी घर नहीं बैठेंगे।
- राजेश लिलोठिया-उम्र बेशक 80 है लेकिन स्वस्थ्य हैं। ये बात हमारे प्रभारी पीसी चाको ने प्रेस कांफ्रेंस में भी कही है। किसी तरह की परेशानी उम्र की वजह से नहीं होगी, नेतृत्व मिलेगा और अागे बढ़ेंगे। वो ब्रांड हैं।
आप बोली- कांग्रेस को डूबने से अब कोई नहीं बचा सकता :
कांग्रेस एक डूबता हुआ जहाज है, इसे कोई नहीं बचा सकता, चाहे वह शीला जी ही क्यों न हों। दिल्ली की जनता जानती है कि कांग्रेस को वोट देने का मतलब है वोट बेकार करना या फिर बीजेपी की मदद करना। कांग्रेस का उठ पाना असंभव है। - दिलीप पांडे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, आप
नई टीम के गठन से दिल्ली में हर वर्ग के वोटर को साधा :
शीला दीक्षित यूपी में कानपुर की बहू हैं और कन्नौज से सांसद रही हैं। ब्राह्मण परिवार में शादी हुई और पंजाबियत से सीधा नाता रहा है। वर्किंग प्रेजिडेंट में राजेश लिलोठिया रिजर्व श्रेणी से संबंधित हैं तो देवेंद्र यादव ओबीसी का प्रतिनिधित्व करते हैं। दिल्ली में मुस्लिम बड़ी आबादी है इसलिए हारून यूसुफ पर भरोसा जताया।
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