पंजाब का मामला : सर्दी से बचने के लिए कपल ने तसले में आग जलाकर रखी थी, सुबह दोनों मृत पाए गए, पोस्टमार्टम जांच में पता चला आग लगने नहीं बल्कि इस कारण से हो गई कपल की मौत, एक्सपर्ट बोले, अक्सर इस गलती के चलते अंग बंद कर देते हैं काम करना

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फीचर डेस्क। पंजाब के जालंधर में दम घुटने से दंपति की मौत का मामला सामने आया है। दंपति ने सर्दी से बचने के लिए बेडरूम में तसले में आग जलाकर रखी थी। पोस्टमार्टम में मौत का कारण दम घुटना आया है। बेडरूम की जांच की गई तो ये बात भी सामने आई कि वहां कोई वेंटिलेशन नहीं था। एक खिड़की थी लेकिन वो भी सर्दी के चलते बंद थी। संभवत इसी कारण दंपति का दम घुट गया और मौत हो गई।

ये कोई पहला मामला नहीं है, जबकि किसी की कमरे में सोते हुए मौत हो गई हो। बल्कि अक्सर इस तरह के मामले सामने आते रहते हैं। कुछ समय पहले बेंगलुरु के राजराजेश्वरी नगर में एक कपल बाथरूम में मृत पाया गया था। पुलिस ने बताया था कि बाथरूम में लगे गैस गीजर से निकले कार्बन मोनो ऑक्साइड की वजह से कपल की मौत हुई। मार्च 2018 में ही गाजियाबाद में रहने वाली सिंघानिया दंपती की मौत का मामला भी सामने आया था।

ऐसे में ऑक्सीजन कम होने लगती है
डॉ. राजीव शर्मा के मुताबिक, जब कमरा बंद कर आग जलाई जाती है तो ऑक्सीजन खत्म होने लगती है। सिर्फ मोनो ऑक्साइड रह जाती है। बाथरूमों में लगे गैस गीजर से भी मोनो ऑक्साइड ही निकलती है। यह न्यूरो टॉक्सिक है जो नसों पर अटैक करती है। नसें निष्प्रभावी होने लगती हैं और व्यक्ति नींद में ही बेसुध हो जाता है। जब मोनोआक्साइड पूरी तरह खून में मिल जाती है तो अंग काम करना बंद कर देते हैं। नींद में ही मौत हो जाती है। अगर रात को कमरे में आग जलानी
हो तो हवा की वेंटिलेशन जरूर होनी चाहिए।

बाथरूम में गैस गीजर के चलते होता है ऐसा ही
- गवर्नमेंट होलकर साइंस कॉलेज, इंदौर के प्रोफेसर आरसी दीक्षित ने बताया कि गैस गीजर LPG की मदद से पानी को गर्म करते हैं। LPG ऑक्सीजन से संपर्क करने के बाद ही जलती है। एलपीजी में ब्यूटेन और प्रोपेन गैस होती है, जो जलने के बाद कार्बन डाईऑक्साइड (CO2) पैदा करती है। ऐसे में बाथरूम के छोटे होने पर ऑक्सीजन की मात्रा कम और CO2 की मात्रा बढ़ने लगती है, जिससे इंसान का दम घुटने लगता है और उसकी मौत भी हो सकती है।

- यशोदा अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि एलपीजी गीजर से पैदा होने वाली आग के कारण ऑक्सीजन की खपत में कमी आ जाती है। साथ ही कार्बन मोनोआक्साइड भी बनती है।

- पुणे के न्यूरोलॉजिस्ट राहुल कुलकर्णी द्वारा गैस गीजर के खतरों पर किए गए शोध के मुताबिक, गैस गीजर के बर्नर से पैदा होने वाली आग के कारण ऑक्सीजन की खपत अधिक होती है और कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है। कार्बन मोनोआक्साइड भी बनती है। यह रंगहीन और गंदहीन गैस होने के साथ-साथ बेहद जहरीली होती है। बिना वेंटिलेशन वाले बाथरूम में गैस गीजर से निकलने वाली गैस के कारण खून में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, जिससे लोगों की मौत हो जाती है।

किन बातों का ध्यान रखना जरूरी
- चिमनी, अंगीठी या अलाव खुले स्थान पर ही रखें।
- कमरे में अलाव है तो रोशनदान या खिड़कियां खुली रखें, ताकि ऑक्सीजन सप्लाई हो सके।
- घर के रोशनदान, खिड़कियों को गत्ते, कागज या पॉलीथिन लगाकर बंद नहीं करें।
- वहीं गैस गीजर में यूज होने वाले LPG सिलेंडर को हमेशा बाथरूम के बाहर रखें और गैस को मजबूत पाइप की मदद से बाथरूम के अंदर ले जाएं। साथ ही, सिलेंडर को ग्राउंड लेवल पर ही रखें, क्योंकि LPG भारी होती है।
- गैस सिलेंडर से गीजर में यूज होने वाले पाइप को हमेशा चेक करते रहें। कई बार पाइप कनेक्शन वाली जगह से टूटने लगता है। या फिर चूहे पाइप को काट देते हैं। ऐसे में गैस रिसने का खतरा हो जाता है।
- जब भी आप कोई गैस गीजर या सिलेंडर में यूज होने वाला पाइप खरीदते हैं तब उसमें ISI मार्क जरूर देखें। ये मार्क बेहतर क्वालिटी के प्रोडक्ट को ही दिया जाता है।
- गैस गीजर बाथरूम में है तो ताजी हवा के लिए एग्जॉस्ट लगाएं।
- गैस गीजर बाथरूम में होने पर नहाने से पहले ही पानी गर्म कर लें।
- गैस लीकेज हो तो गीजर ऑन न करें, वर्ना हादसा हो सकता है।
- गैस लीक होने की सूरत में खिड़कियां और दरवाजे खोल दें।
- कोई व्यक्ति इससे बेहोश हो जाए तो उसे तुरंत खुली हवा में ले आएं।
- बेहोश व्यक्ति को आनन-फानन में कोई भी लिक्विड न दें। बल्कि उसे तुरंत डाक्टर के पास लेकर जाएं।



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