कर्ज में डूबा आईएल एंड एफएस ग्रुप 36 लग्जरी कारें बेचेगा, 9 करोड़ रु हो सकती है वैल्यू
नई दिल्ली. 91,000 करोड़ रुपए के कर्ज में फंसा ग्रुप आईएल एंड एफएस अपनी 36 लग्जरी कारें नीलाम कर रहा है। इनकी कीमत करीब 9 करोड़ रुपए आंकी जा रही है। कारें बेचने के लिए आईएल एंड एफएस ने 18 दिसंबर तक बोलियां मांगी हैं। बाकी कारों के लिए बाद में बिड मांगी जाएंगी। समूह के पास कुल 72 लग्जरी गाड़ियां हैं।
आईएल एंड एफएस की लग्जरी कारों के बेड़े में 8 ऑडी, 6 बीएमडब्ल्यू, दो जगुआर और एक लेक्सस गाड़ी भी शामिल है। 2 मर्सिडीज बेंज जीएलएस 350डी सबसे महंगी कारें हैं। इसकी कीमत 54 लाख रुपए और 51 लाख रुपए है। बाकी कारों की औसत कीमत 24 लाख रुपए है। एक बीएमडल्ब्यू गाड़ी इसी साल मई में खरीदी गई। इस बारे में स्थिति साफ नहीं कि आईएल एंड एफएस को इनती लग्जरी कारों की जरूरत क्यों पड़ी।
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ज्यादातर गाड़ियां तीन साल से अंदर खरीदी गई हैं। पिछले साल खरीदी गई गाड़ियों की संख्या सबसे ज्यादा है। जिन 36 गाड़ियों को बेचा जा रहा है उनमें से 12 पेरेंट कंपनी आईएल एंड एफएस की हैं। बाकी गाड़ियां आईएल एंड एफएस ग्रुप की सब्सिडियरी कंपनियों की हैं।
कंपनी लग्जरी कारों की संख्या आईएल एंड एफएस ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क्स 7 आईएल एंड एफएस फाइनेंशियल सर्विसेज 6 आईएल एंड एफएस रेल 3 आईएल एंड एफएस एनर्जी 3 आईएल एंड एफएस टेक्नोलॉजीज 2 आईएल एंड एफएस एजुकेशन 1 आईएल एंड एफएस मेरीटाइम इंफ्रास्ट्रक्चर 1 आईएल एंड एफएस विंड पावर 1 लग्जरी गाड़ियों के अलावा आईएल एंड एफएस ग्रुप दूसरे असेट्स भी बेच रहा है। इनमें कोलकाता के एक और मुंबई के दो गेस्ट हाउस का फर्नीचर और दूसरी वस्तुएं शामिल हैं।
आईएल एंड एफएस ग्रुप पिछले कई महीनों से लोन पेमेंट में डिफॉल्ट कर रहा है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में अपील कर सरकार ने एक अक्टूबर को इसका नियंत्रण अपने हाथ में लेकर मैनेजमेंट में बदलाव किया था।
आईएल एंड एफएस के नए बोर्ड ने कर्ज से उबारने के लिए खर्चों में कटौती शुरू की। इसके तहत ग्रुप की कारों के अधिकतम खर्च की सीमा 50 लाख रुपए से घटाकर 25 लाख रुपए की गई। अब लग्जरी कारों और दूसरे असेट्स की बिक्री की जा रही है।
नए बोर्ड ने 50 लाख या इससे ज्यादा सीटीसी वाले कर्मचारियों की सैलरी में भी 10% कटौती कर दी। साथ ही उन 69 कर्मचारियों की सेवाएं खत्म कर दीं जो रिटायरमेंट के बाद भी कंसल्टेंट के तौर पर जुड़े हुए थे।
आईएल एंड एफएस ग्रुप पर 91,000 करोड़ रुपए के कर्ज की वजह से डूबने की कगार पर पहुंच गया था। इसकी वजह से पूरा फाइनेंशियल सेक्टर संकट में आ गया था। सितंबर महीने में नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आ गई। ऐसे में सरकार को आगे आकर इसका कंट्रोल लेना पड़ा था।
आईएल एंड एफएस इंफ्रा, फाइनेंस और ट्रांसपोर्ट जैसे सेक्टर में काम करती है। इसे नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (एनबीएफसी) का दर्जा हासिल है।
साल 1987 में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया और हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कंपनी ने इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को कर्ज देने के लिए आईएल एंड एफएफ कंपनी बनाई थी।
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