मिजो नेशनल फ्रंट के नेता जोरमथांगा ने ली मिजोरम के मुख्यमंत्री पद की शपथ, तीसरी बार बने सीएम
नेशनल डेस्क: मिजोरम विधानसभा चुनाव में बहुमत से जीत दर्ज करने के बाद मिजो नेशनल फ्रंट (एनएनएफ) के अध्यक्ष जोरमथांगा ने आज मिजोरम के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 40 सदस्यीय विधानसभा में मिजो नेशनल फ्रंट को 26 सीटें मिली हैं। वहीं कांग्रेस को 5 तो बीजेपी को महज एक सीट हासिल हुई है। एमएनएफ ने शपथ ग्रहण से पहले ही साफ कर दिया था कि वो बीजेपी को सरकार में शामिल नहीं करेंगे।
कभी खूंखार उग्रवादी थे जोरामथांगा
मार्च 1966 में लालडेंगा की अगुवाई वाली नेशनल मिजो फ्रंट (एनएमएफ) ने भारत से आजादी की घोषणा कर दी थी, नेशनल मिजो फ्रंट को लगा था कि सरकार राज्य में आए अकाल से ठीक ढंग से निपट नहीं पाई और निष्क्रिय रही है। 1986 में सरकार और एमएनएफ के बीच मिजोरम पीस डॉक्यूमेंट पर साइन किए गए। जोरामथांगा 1966 में एमएनएफ से जुड़े थे, उस दौरान एमएनएफ एक भूमिगत संगठन के तौर पर काम करता था, इस संगठन में रहते हुए 1966 से 1986 तक करीब 20 साल तक वो अंडर ग्राउंड रहे। हाल ही में उन्होंने ऑटोबायोग्राफी में इसका जिक्र किया था। जोरमथांगा भारतीय सेना के खिलाफ गुरिल्ला वॉर में भी शामिल रह चुके हैं।
28 सालों से हैं एमएनएफ के अध्यक्ष
जोरमथआंगा 1989 में हुए विधानसभा चुनावों में चम्फाई सीट से विधायक चुने गए, 1990 में लालडेंगा की कैंसर की वजह से मौत हो गई। इसके बाद जोरामथंगा को एमएनएफ का अध्यक्ष बनाया गया और वो आज तक इस पद पर बने हुए है। जोरामथंगा के नेतृत्व वाले एमएनएफ ने 1998 में राज्य विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की, उन्होंने 2003 के राज्य विधानसभा चुनाव में सत्ता बरकरार रखी और वह मुख्यमंत्री बने रहे। उनकी पार्टी को 2008 के चुनाव में करारी हार झेलनी पड़ी थी और यह पार्टी केवल तीन सीटों तक ही सिमट कर रह गई थी। जोरामथंगा दोनों सीटों पर हार गये थे। जोरमथांगा चाहते हैं कि उनकी बायोग्राफी पर हॉलीवुड फिल्म बने।
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