ग्रामीण संकट दूर करने के लिए किसानों का कर्ज माफ करना सबसे खराब समाधान होगा
नई दिल्ली. एसबीआई की रिसर्च में अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि परेशान किसानों को राहत देने के लिए कर्ज माफ करना सबसे खराब समाधान होगा। अर्थशास्त्रियों की ये आशंका तब सामने आई, जब मोदी सरकार 2019 लोकसभा चुनाव से पहले किसानों की कर्जमाफी का मन बना रही है। सरकारी सूत्रों ने कहा कि मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में हार के बाद केंद्र सरकार लोकसभा चुनाव से पहले 26.3 करोड़ किसानों का 4 लाख करोड़ का कर्ज माफ कर सकती है।
रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा गया था कि कर्जमाफी के लिए पैसे के आवंटन की योजना पर सरकार जल्द काम शुरू कर देगी। हालांकि, कृषि मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अशोक दलवी ने कहा था कि केंद्र सरकार ने कर्जमाफी का कोई प्रस्ताव नहीं दिया है।
एसबीआई रिसर्च में अर्थशास्त्रियों ने सुझाव दिया कि कर्जमाफी की बजाय केंद्र आय बढ़ाने वाली योजनाओं को लागू करे। यह ज्यादा प्रभावी विकल्प होगा और ग्रामीण संकट को दूर करने के लिए ऐसा साहसी कदम उठाया जाना चाहिए।
रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि किसानों की कम आय की आशंका के चलते सभी राज्यों का कुछ चुनिंदा राज्यों में किसानों का कर्ज माफ कर सकती है।
रिसर्च के मुताबिक, रिजर्व बैंक और बैंकों ने कई बार यह चिंता जताई है कि कर्जमाफी के चलते कर्ज दिए जाने की संस्कृति बर्बाद हो सकती है। 19 मई तक 70 हजार करोड़ कर्जमाफी के लिए खर्च किए जाएंगे और यह बैंक समुदाय के लिए बड़ी चुनौती होगा।
"50 हजार करोड़ रुपए के कम खर्च पर भी लक्षित समूहों को ज्यादा बड़ा फायदा पहुंचाया जा सकता है। किसानों का कर्ज माफ करना इस समस्या का हल नहीं है।"
"हमें किसानों की आय बढ़ाने की जरूरत है। पूरे भारत में आय बढ़ाने वाली योजनाएं लाने की तुरंत जरूरत है। देश में 21.6 करोड़ छोटे और सीमांत किसान हैं और इन्हें मदद केवल इन योजनाओं के जरिए ही की जा सकती है। इसके अलावा उन्हें उपज का सही दाम देना सुनिश्चित कराया जाना चाहिए।"
रिसर्च में सुझाव दिया गया कि किसानों को हर साल 12 हजार रुपए दो किस्तों में दिया जाना चाहिए। देशभर में ऐसा करने के लिए 50 हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा। तेलंगाना में भी किसानों को साल में दो फसलों के लिए समर्थन देने के लिए रायथू बंधु योजना शुरू की गई है।
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