लोकसभा में पास हुआ सरोगेसी बिल-2016, जानिए अब जिन पैरेंट्स के बच्चे नहीं हैं? वे सरोगेसी से बच्चा पैदा कर पाएंगे या नहीं

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न्यूज डेस्क। 2016 में पेश हुआ सरोगेसी बिल गुरुवार को लोकसभा में पेश हो गया। इस बिल के तहत कमर्शियल सरोगेसी को बैन कर दिया गया है। हालांकि क्लोज रिलेटिव्स में सरोगेसी कानूनी तौर पर वैध होगी। जिन पैरेंट्स के बच्चे नहीं हैं, उन्हें सरोगेसी के लिए अलाउ किया गया है। हेल्थ मिनिस्टर जेपी नड्डा ने कहा कि, यह बिल कमर्शियल सरोगेसी को रोकने के लिए है। जानिए इस बिल से जुड़ी खास बातें, जो आपके काम आ सकती हैं।

क्या होती है सरोगेसी?
सरोगेसी में तीन लोग शामिल होते हैं। कुछ कपल्स जब किन्हीं कारणों से माता-पिता नहीं बन सकते तो वे तीसरी महिला की मदद लेते हैं। आईवीएफ टेक्नोलॉजी के जरिए पति के स्पर्म और पत्नी के एग्स से बना एंब्रियो तीसरी महिला की कोख में इंजेक्ट किया जाता है। इससे जो बच्चा जन्म लेता है उसका डीएनए, सरोगेसी कराने वाले कपल का ही होता है।

इसके लागू होने के बाद क्या होगा
- इस बिल के जरिए भारत में सरोगेसी के नियमों को सुनिश्चित किया जाएगा। कमर्शियल सरोगेसी सर्जरी को रोका जाएगा। जिन पैरेंट्स के बच्चे नहीं हैं, वे इसके तहत बच्चा कर पाएंगे।

कौन करा सकेगा सरोगेसी
- नए बिल के तहत, सरोगेट मां और बच्चे को लेने वाले कपल नजदीकी रिश्तेदार होना चाहिए।
- इसके तहत नेशनल सरोगेसी बोर्ड, स्टेट सरोगेसी बोर्ड का गठन होगा। निगरानी के लिए अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी।
- सरोगेट मदर और बच्चा लेने वाले कपल को संबंधित अधिकारी के पास एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट जमा करना होगा।

कोई नहीं करा सकेगा सरोगेसी
1. यह बिल सिर्फ इंडियन सिटीजन को सरोगेसी के लिए अप्लाई करता है। फॉरेनर्स, नॉन रेसिडेंट इंडियंस को बैन किया गया है।
2. होमोसेक्शुअल, सिंगल पैरेंट्स और लिव-इन कपल्स को भी सरोगेसी के लिए अलाउ नहीं किया गया है।
3. ऐसे कपल जिनके पहले से बच्चे हैं, उन्हें भी सरोगेसी के लिए अलाउ नहीं किया गया है। हालांकि ऐसे कपल संबंधित कानून के तहत किसी बच्चे को एडॉप्ट कर सकते हैं।



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surrogacy bill 2016 passed in Lok Sabha

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