एंटी-इनकम्बेंसी थी, समझ नहीं पाए; नक्सलवाद खत्म न कर पाने की टीस जरूर रहेगी: रमन

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शिव दुबे(रायपुर).चौथी पारी की तैयारी कर रहे रमन सिंह को भरोसा था कि उनकी सरकार के कामों की बदौलत जनता फिर से जनादेश देगी। लेकिन 90 में से 68 सीटों पर हार के बाद समीक्षा के दौर से गुजर रहे निवर्तमान मुख्यमंत्री रमन सिंह ने माना कि सरकार विरोधी लहर को समझने में चूक हुई। इसी कारण 12 में से 8 मंत्री हार गए। कहीं न कहीं जनता के मूड को भांपने में कमी रह गई। उनके मन में टीस है कि छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म नहीं कर पाए। पर उसे कम कर पाने में जो सफलता मिली, उसका संतोष भी है। वे केंद्र में जाने की बजाय छत्तीसगढ़ में ही काम करना चाहते हैं। पेश है उनसे बातचीत :-

सवाल: 90 में से 68 सीटों पर हार मिली, ऐसी उम्मीद थी क्या?
रमन:उम्मीद नहीं थी। हमें अपने काम पर भरोसा था। विकास किया, उसकी बदौलत हम चौथी बार आने की तैयारी कर रहे थे। पर जनता ने कांग्रेस के वादों पर भरोसा किया। जनादेश इसे ही कहते हैं।

सवाल: भाजपा से या कहें आप से चूक कहां हो गई?
रमन:मुझे लगता है कि हमारी चूक उतनी महत्वपूर्ण नहीं है। कांग्रेस के वादों ने अपना असर दिखाया है। लोगों को कांग्रेस के वादे आकर्षक लगे।

सवाल:फिर भी राजनीतिक रुप से कमजोरी कहीं रही होगी?
रमन:मैं ऐसा नहीं मानता। सभी ने अपनी जगह मेहनत की थी। लोकतंत्र में परिणाम सम्यक रूप से आते हैं।

सवाल:पहले आप नहीं मानते थे सरकार विरोधी लहर है। अब तो आप मानेंगे कि एंटी इनकम्बेंसी थी।
रमन:हां, बिना एंटी-इनकम्बेंसी के ऐसा परिणाम नहीं आता। हमें उसे समझने में जरूर कमी रह गई।

सवाल:मंत्रियों का परफारमेंस कमजोर रहा। 12 में से 8 मंत्री हार गए?
रमन:सब अपना काम कर रहे थे। जब ऐसी विरोधी लहर हो तो सभी का योगदान तो होगा ही।

सवाल: अफसरशाही पर समय पर अंकुश नहीं लगा पाना भी हार का एक कारण बताया जा रहा है?
रमन:अफसर सरकार के लिए काम करते हैं। ऐसा मानना गलत होगा कि अफसरों के कारण चुनाव हार गए। फिर भी ऐसी धारणा बनी।

सवाल: 15 साल की सरकार में कोई काम ऐसा किया जिससे लगा कि बड़ी चूक हो गई है?
रमन:ऐसा तो कभी नहीं लगा। हमने राज्य के सभी क्षेत्रों में विकास किया है। छत्तीसगढ़ की गिनती आजकल देश के अग्रणी राज्यों में होने लगी है।

सवाल: इतने दिन सरकार चलाने के बाद अब मन में कोई टीस रह गई है?
रमन:वैसे तो अपने काम से संतुष्ट हूं। पर नक्सलवाद पर पूरी तरह अंकुश लग जाता तो अच्छा होता। ऐसा हो नहीं पाया। हां नक्सलवाद कम जरूर हुआ है।

सवाल: अब केंद्र की राजनीति में जाएंगे या छत्तीसगढ़ में रहेंगे?
रमन:मैंने यहां दोबारा काम शुरू कर दिया है। कार्यकर्ताओं से मिल रहा हूं। पार्टी का काम कर रहा हूं। पद अपनी जगह है, पार्टी अपनी जगह। केंद्र में जाने के बारे में सोचा भी नहीं है

सवाल:तीसरी शक्ति के तौर पर उतरे बसपा-जोगी गठबंधन का आकलन करने में चूक हुई क्या? कई सीटों पर इससे भाजपा को नुकसान हुआ है?
रमन:इसमें चूक जैसी कोई बात नहीं है। कहीं पर नुकसान तो कहीं पर फायदा हुआ है। जीत-हार में कई फैक्टर होते हैं। यह भी एक है।

सवाल: छत्तीसगढ़ में वापसी के लिए क्या पुराने कामों से सबक लेंगे?
रमन:चुनाव के दूसरे दिन से हम लोगों ने अपना काम प्रारंभ कर दिया है। राजनीति में कभी आराम नहीं होता। जनता के बीच रोज रहना पड़ता है।



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interview with former chief minister raman singh

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