सत्य साईं के बिना 7 साल में पुट्‌टपर्थी बेरौनक, एयरपोर्ट पर उड़ानें बंद

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पुट्‌टपर्थी (धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया).किसी स्थान की पहचान व्यक्ति के न होने पर कैसे बदल जाती है, इस बात का उदाहरण है पुट्‌टपर्थी। आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के 50 हजार आबादी वाले कस्बे पुट्‌टपर्थी में पहले हमेशा हलचल रहती थी। अब लगता है, मानो यहां जीवन धीमी गति से बढ़ रहा है। पुट्‌टपर्थी के सत्य साईं बाबा की 2011 में मृत्यु हो जाने के बाद सबकुछ यहां तेजी से बदला है। बीते 23 नवंबर को सत्य साईं बाबा का 93वां जन्मदिन यहां मनाया गया। इस दिन यहां थोड़ी रौनक दिखी। इस मौके पर करीब 50-60 हजार से अधिक श्रद्धालु आए। लेकिन यह जगह अब बेरौनक सी हो गई है।


यहां एयरपोर्ट है, लेकिन नियमित उड़ानेंबंद, अभी सिर्फ चार्टर प्लेन ही उतरते हैं। विदेशी श्रद्धालुओं की संख्या महज 10 फीसदी रह गई है, जबकि घरेलू श्रद्धालुओं की संख्या करीब एक चौथाई तक घट गई है। पहले यहां 20 हजार लोग प्रतिदिन आते थे लेकिन अभी करीब पांच हजार लोग आते हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह हुआ है कि पहले बाबा के समय श्रद्धालु कम से कम 12 से 15 दिन रुक कर जाते थे, लेकिन वर्तमान में अब दो या तीन दिन से ज्यादा नहीं रुकते हैं। इससे स्थानीय दुकानदार और होटल व्यवसायियों का कारोबार घटा है। पिछले 18 साल से हैंडीक्राफ्ट की वस्तुएं बेचने वाले श्रीनगर के जीएस नबी कहते हैं कि बाबा के जाने के सात साल बाद हमारा 30 फीसदी ही कारोबार बचा है। बाबा के कारण ही हमारे सामने यहां रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट बना।


बेंगलुरु एयरपोर्ट से लेकर पुट्‌टपर्थी के रास्ते में पड़ने वाले प्रत्येक प्रतिष्ठान पर साईं बाबा की फोटो आसानी से दिख जाती हैं। बीच-बीच में सड़क किनारे बाबा के बड़े-बड़े होर्डिंग भी मिलते हैं। पुट्‌टपर्थी के ज्यादातर होटल, दुकानें, सुपर बाजार सभी के नाम सत्य साईं से ही शुरू होते हैं, लेकिन अब यहां बाबा के जमाने वाली रौनक नहीं बची है। नगर पंचायत ऑफिस में डेटा एंट्री ऑपरेटर विजय भास्कर बताते हैं कि बाबा के समय कृषि भूमि की कीमत पहले आठ से 10 लाख रु. एकड़ थी। जो अब पांच से छह लाख रु. पर आ गई है। जबकि कस्बे के अंदर रिहाइशी जमीन पहले तीन हजार रुपए प्रति वर्ग फुट थी जो अब दो हजार रु. पर है। यहां लोग अभी भी बाबा के चले जाने से हुई क्षति से उबरने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। होटल व्यवसायी वेणुगोपाल कहते हैं कि पहले यहां जंगल था, सांप थे और छोटा सा मंदिर था।


यहां बस, ट्रेन और प्लेन सब बाबा के कारण ही शुरू हुए। कस्बे की जीवन रेखा अभी भी सत्य साईं बाबा ही है। वर्तमान में पुट्टपर्थी का बाजार और गतिविधियां सत्य साईं बाबा आश्रम, स्कूल, कॉलेज, सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल के इर्द-गिर्द केंद्रित हैं। यहां सत्य साईं हायर सेकंडरी स्कूल, उच्च शिक्षा विश्वविद्यालय, संगीत और कला अकादमी जैसे संस्थान, स्टेडियम और सत्य साईं सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल पुट्टपर्थी के बड़े प्रमुख स्थल हैं। इन सभी का निर्माण सत्य साईं बाबा के भक्तगणों, भारत के रईसों और विदेशियों से प्राप्त दान राशि से करवाया। वेणुगोपाल कहते हैं कि हमने बाबा वाले दिनों में होने वाले कारोबार की उम्मीद छोड़ दी है। चिन्नस्वामी कहते हैं कि पिछले 15 साल से ऑटो चला रहा हूं। पहले 1500 रुपए प्रतिदिन कमा लेता था लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या कम होने के कारण अब 700 रुपए तक ही कमा पाता हूं।


वहीं, बाहर की दुनिया के ठीक विपरीत, आश्रम में रहने वालों की दिनचर्या बाबा के समय जैसी ही चल रही है। यहां भव्य हॉल में नियमित रूप से सुबह-शाम बाबा के समाधिस्थल के सामाने, विशाल और भव्य पंडाल में आरती और पूजा होती है। ट्रस्ट द्वारा संचालित सभी कार्य यथावत चल रहे हैं। अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल और देश में फैले सेवा कार्य नियमित रूप से चल रहे हैं। स्कूल, कॉलेज में पढ़ाई पूरी तरह फ्री है। जिसमें देशभर के विद्यार्थी आते हैं। सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में आंख, हार्ट, किडनी, प्लास्टिक सर्जरी और आर्थोपेडिक संबंधी इलाज फ्री में होता है। ट्रस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक 2017-18 में प्रतिमाह 25 हजार लोग आश्रम में रुके। वहीं, इसी वर्ष के दौरान सौ देशों के करीब 15,500 विदेशी श्रद्धालु यहां रुके।

स्थानीय निवासी श्रीनाथ कहते हैं कि पुट्टपर्थी की समस्या हमेशा से यही रही कि इसकी गतिविधियां बाबा के आसपास केंद्रित थीं। यहां तक कि जब बाबा बेंंगलुरु में व्हाइटफील्ड या कोडउकनाल आश्रम चले जाते थे, पुट्टपर्थी सूना कस्बा बन जाता था। उनके भक्तगण उनके पीछे-पीछे चले जाते थे। स्थानीय विधायक और सत्तारूढ़ टीडीपी के विधानसभा में चीफ व्हिप पल्ले रघुनाथ रेड्‌डी कहते हैं कि सरकार यहां इंटरनेशनल स्प्रिचुअल सेंटर बनाने की योजना बना रही है। कल्चरल सेंटर भी बना रहे हैं। इसके साथ ही 10 करोड़ रुपए की लागत से यहां सौदर्यीकरण का कार्य होगा। बाबा का म्यूजियम भी बना रहे हैं। बाबा जिस नदी में आरती करते थे वहां उनका स्टेच्यू बनेगा। ये तो भविष्य बताएगा कि सरकार की योजनाओं का कितना असर यहां देखने को मिलेगा।



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पुट्‌टपर्थी में सत्य साईं का आश्रम।

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