किसान कर्ज माफी गेम चेंजर मुद्दा, अपने गठबंधन को संभालना मोदी-शाह के लिए होगा मुश्किल: बरखा
टीवी जर्नलिस्ट बरखा दत्त का कहना है कि विधानसभा चुनाव के नतीजों ने 2019 की लड़ाई को खुला बना दिया है। मोदी अपराजेय हैं, जैसी धारणा अब नहीं रही। दैनिक भास्कर के मुकेश कौशिक ने आगामी आम चुनाव के मुद्दों पर उनसे खास बातचीत की। पेश हैं इंटरव्यू के मुख्य अंश-
सवाल:हाल के विधानसभा चुनाव के नतीजों का 2019 के लिए क्या मैसेज है?
बरखा: दो संदेश हैं। 2019 का गेम एकदम ओपन हो गया है। एक ओर भाजपा अब भी मजबूत स्थिति में है, तो आर्थिक असंतोष और राजनीतिक निराशा का माहौल बन रहा है।
सवाल:विपक्षी महागठबंधन बनता दिख रहा है, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन दिक्कत में है। ऐसे में क्या तस्वीर उभरेगी?
बरखा: मैं इसकी कोई भविष्यवाणी नहीं करना चाहती, क्योंकि अधिकतर जर्नलिस्ट चुनाव को गलत आंकते हैं। मैं इतना ही कहूंगी कि छह महीने पहले लगता था कि प्रधानमंत्री मोदी को कोई हरा नहीं सकता। अब ऐसा नहीं है। अपने गठबंधन के साथियों को संभाल पाना मोदी-शाह की जोड़ी के लिए मुश्किल होगा। इनमें से बहुतेरे प्राइवेटली भाजपा लीडरशिप से नाराज हैं।
सवाल:मोदी के खिलाफ 'कोई विकल्प नहीं (टीना फैक्टर)है', क्या यह फैक्टर मोदी के फेवर में काम करेगा?
बरखा: मोदी की कोशिश होगी कि चुनाव को प्रेसिडेंशियल इलेक्शन में बदल दें और पर्सनेलिटीज़ में टक्कर हो। विपक्ष की कोशिश होगी कि टीना फैक्टर को दूर रखा जाए और जितना भी मुमकिन हो, चुनाव लोकलाइज़ कर दिया जाए। शेष |
सवाल:क्या यूपी में बीएसपी और एसपी के बीच गठबंधन हो पाएगा?
बरखा: मेरा अनुमान है कि गठबंधन हो जाएगा। बीएसपी और एसपी दोनों के ही लीडरों को यह अहसास है कि उनका राजनीतिक भविष्य आने वाले चुनाव के नतीजों पर ही टिका है और साथ आना ही उनके लिए अच्छे प्रदर्शन की गारंटी है।
सवाल:चुनावों से पहले दलित और अपर कास्ट का डिवाइड सामने आता है, आने वाले चुनाव में यह किस रूप में सामने आएगा?
बरखा: मुझे लगता है कि हिंदुत्व को काउंटर करने के लिए जातीय समीकरणों का इस्तेमाल किया जाएगा। विपक्ष जिस हद तक चुनाव को लोकलाइज करेगा, उसी हद तक भाजपा भी जातियों को हिंदुत्व की छत्रछाया में लाने की कोशिश करेगी।
सवाल:किसान वोट बैंक की राजनीति क्या असर दिखाएगी?
बरखा: अर्थशास्त्रियों का एकमत से कहना है कि कर्ज माफी जैसे लोकप्रिय कदम समाधान नहीं हैं। मैं एक्सपर्ट नहीं हूं कि यह बता दूं कि फसलों के सड़ने का अम्बार लगने और किसानों की खुदकशी की दर बढ़ने का हल आखिर क्या है। मुझे लगता है कि किसानों की कर्ज माफी गेम चेंजर राजनीतिक मुद्दा हो सकता है।
सवाल:जीएसटी और नोटबंदी के मुद्दे चुनाव में किस हद तक हावी होंगे?
बरखा: मुझे लगता है कि देर से ही सही पर मोदी सरकार नोटबंदी का राजनीतिक खमियाजा भुगत रही है।
सवाल:2014 में भाजपा की आधी से अधिक सीटें यूपी, एमपी, राजस्थान जैसे हार्टलैंड राज्यों से आईं थी। यहां पार्टी कमजोर होती है तो भरपाई कहां से करेगी?
बरखा: भाजपा को उम्मीद है कि प. बंगाल, ओडिशा और पूर्वोत्तर से पूरा करेगी। लेकिन अभी साफ नहीं है कि भरपाई हो पाएगी या नहीं, क्योंकि अभी यह पता नहीं है कि हार्टलैंड में क्या होने जा रहा है।
सवाल:मोदी सरकार दावा कर रही है कि उसने करप्शन फ्री कार्यकाल दिया, जबकि विपक्ष कई घोटालों के आरोप लगा रहा है। इसका 2019 के चुनाव में क्या असर होगा?
बरखा: मेरे खयाल से अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे और क्रिश्चियन मिशेल के मुद्दे को बीजेपी रफाल मुद्दे को काउंटर करने के लिए उठाएगी। रफाल स्कैम के आरोप के खिलाफ भाजपा लिकर कारोबारी विजय माल्या की वापसी और विपक्षी नेताओं पर लगे आरोपों का इस्तेमाल करेगी।
सवाल:आपके हिसाब से मोदी सरकार की दो बड़ी उपलब्धियां और दो बड़ी विफलताएं क्या हैं?
बरखा: पहली कामयाबी तो यह है कि पॉलिटिक्स के तात्कालिक स्टाइल से गेम के नियम बदल गए और दूसरे इस स्टाइल काे अपनाने को मजबूर हो गए। दूसरे शब्दों में कहें तो सेल्फ मेड पॉलिटिक्स के लिए स्पेस बनाया और अभिजात्यता यानी एलिटिज्म को चुनौती दी। दूसरे, स्वच्छता और सिविक सेंस मुख्यधारा में बातचीत का मुद्दा बन गए। विफलता- पहली यह कि सामाजिक समरसता कमजोर हुई और मॉब हिंसा मजबूत हुई। दूसरी बात यह कि मीडिया की सूचना तक पहुंच बहुत मुश्किल हो गई, जिससे कई जर्नलिस्ट्स को अपने काम में बाधा आती महसूस हुई।
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