56 साल पुरानी तांबे की नदी, जिसमें छिपा है सोना

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बलरामसिंह निर्वाण (सीकर). दैनिक भास्कर के शेखावाटी में ऐतिहासिक सफलता के 22 साल पूरे होने पर भास्कर टीम खेतड़ी पहुंची। यहां एशिया की सबसे पहली और 56 साल पुरानी भूमिगत तांबे की खदान तो विख्यात है ही। पहाड़ियों के बीचों-बीच सोने-चांदी और अन्य बेशकीमती धातुओं की नदी भी है। इसके बारे में बेहद कम लोगों को ही पता है, क्योंकि ये सिर्फ 56 साल में धीरे-धीरे विकसित हुई हैं। ये तांबे की नदी ढाई से तीन किमी लंबी है तथा इसकी चौड़ाई एक किमी के आसपास है। धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ता जा रहा है आसपास के कई पहाड़ इस नदी में समा चुके हैं। इसकी गहराई 15.17 मीटर है।

अर्थशास्त्र

विशेषज्ञ के मुताबिक अगर इस डेम यानी नदी में जमा मिट्टी बिकती है तो कंपनी को करीब 200 करोड़ से ज्यादा की आमदनी होगी। केसीसी के बड़े अधिकारियों ने दो साल पहले इस अपशिष्ट की जांच चीन की एक कंपनी से करवाई। जांच से पता चला कि नदी में कई कीमती धातुएं हैं। उसके बाद केसीसी ने चेन्नई की कंपनी स्टार ट्रेस के साथ 17 जनवरी 2016 को एक प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया। हालांकि थोड़े दिन बाद ही इसे बंद कर दिया गया पर इस बात की पुष्टि हो गई थी कि यहां कुदरत का बेशकीमती खजाना छिपा हुआ है।

इतिहास

1975 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस खान को देश को समर्पित कर दिया था। इस खान की खोज जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस के जियोलॉजिस्ट ने की थी। एचसीएल कंपनी ने इस खदान में काम करना शुरू किया था। उस समय 10 हजार से ज्यादा कर्मचारी काम करते थे। 80 साल के भगवानाराम का कहना है कि सालों पहले हम जब इस डेम के रास्ते से लकड़ियां लाते थे तो उस समय आसपास अरावली के कई पहाड़ थे। जब से ये तांबे की खान से खराब मलबा निकलने लगा है उसके बाद से आसपास के कई पहाड़ धीरे-धीरे इसमें समा गए। अब भी पहाड़ धीरे धीरे जमीन में धंस रहे हैं।

भूगोल

खेतड़ी कॉपर में केसीसी के इस प्रोजेक्ट से करोड़ों रुपयों का तांबा रोजाना निकलता है। कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, केसीसी में तांबे निकलने के बाद शेष रहे अपशिष्ट (द्रव के रूप में) को टैलिंग डेम यानी इस नदी में एकत्रित किया जाता है। इस नदी का क्षेत्रफल करीब आठ फुटबॉल के मैदान जितना बड़ा है। अधिकारियों ने कहा कि अगर दो साल पहले बंद हुआ प्रोजेक्ट दोबारा शुरू होता है तो इसमें से कीमती धातुओं और खनिज की रिकवरी होगी, जिनमें सोना व चांदी भी शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि इस खान में अभी भी कई सालों तक खुदाई हो सकती है। खेतड़ी के आसपास करीब 80 किमी तक तांबा फैला हुआ है। जिसकी खुदाई करनी बाकी है।

कौनसे धातु - कितने प्रतिशत
कॉपर 0.13%, आयरन 16.96, सल्फर 1.31, एलुमिन 4.53, सिलिका 73.54, कैलशियम .7%, मैग्निशियम 1.65 पीपीएम, कोबाल्ट 40 पीपीएम, निकल 29 पीपीएम, लेड 17 पीपीएम, जिंक 36 पीपीएम, मैग्नीज 890 पीपीएम, सिल्वर 5.9 पीपीएम, सोना 0.18 पीपीएम, सिलिनियम 0.9 पीपीएम, मोलेबिडियम 9 पीपीएम सहित अन्य धातु हैं।



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भास्कर टीम सुबह 6 बजे खेतड़ी में स्थित इस नदी में पहुंची। दिनभर में 11 घंटे के दौरान सैकड़ों फोटो क्लिक किए। शाम पांच बजे सूर्यास्त के समय यह परफेक्ट फोटो क्लिक हुआ जब सूरज की किरणें गिरी तो जमी हुई यह नदी सोने सी चमकने लगी। फोटो : विशाल सैनी

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