मनमोहन सरकार में हर महीने 9000 फोन कॉल्स, 500 ईमेल्स पर रखी जाती थी नजर
नई दिल्ली. देश में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने 10 एजेंसियों को लोगों के निजी कम्प्युटरों पर नजर रखने का आदेश दिया है। इस फैसले की आलोचना करते हुए कांग्रेस ने कहा, मोदी इस देश को 'निगरानी राज्य' में बदल देना चाहते हैं। लेकिन, एक आरटीआई में खुलासा हुआ है कि यूपीए की मनमोहन सरकार ने भी साल 2013 हर महीने 9000 फोन कॉल्स और 500 ईमेल्स की निगरानी करवाई थी। इस खुलासे ने मोदी सरकार को राहत देने का काम किया है।
प्रसेनजीत मंडल ने 6 अगस्त 2013 में एक आरटीआई दाखिल की थी। इसके जवाब में गृह मंत्रालय ने कहा था कि यूपीए की केंद्र सरकार ने हर महीने करीब 7500 से 9000 फोन कॉल्स और 300 से 500 ई-मेल संदेशों पर नजर रखने के आदेश दिए। बताया गया, मुंबई बम हमले के बाद यूपीए सरकार ने इस तरह के आदेश दिए थे।
स्वामी अमृतानंद देवतीरथ ने भी 24 दिसंबर 2013 को एक आरटीआई लगाई गई थी। इसके जवाब में बताया गया, इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) समेत नौ जांच एजेंसियां भारतीय टेलीग्राफ एक्ट 1885 के तहत कानूनी रूप से निगरानी रखती थीं।
हाल की मोदी सरकार ने एक आदेश जारी कर 10 जांच एजेंसियों को देश के सभी कम्प्युटरों पर नजर रखने को कहा है। इसका विरोध करते हुए कुछ ने कहा, यह सच में 'घर-घर मोदी है'। जबकि कुछ विपक्षी दलों ने 'निगरानी सरकार' कहा है।
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