लोकसभा में पेश हो गया हर ग्राहक के अधिकारों को मजबूती देने वाला कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल-2018, इसके लागू होने के बाद किसी ने कंज्यूमर को ठगा तो उसकी खैर नहीं, जानिए मोदी सरकार ने बिल में कर दिए क्या बड़े बदलाव
न्यूज डेस्क। गुरुवार को लोकसभा में कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल-2018 पास हो गया। इस बिल ने कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट-1986 को रिप्लेस किया है। पिछले तीन दशकों से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ था। कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्टर राम विलास पासवान ने कहा कि, नए बदलावों के बाद कंज्यूमर के अधिकार मजबूत होंगे। बता दें कि, अभी यह बिल लागू नहीं हुआ है। अभी इसे राज्यसभा में पारित होना बाकी है। हम बता रहे हैं नए बिल में हुए बड़े बदलावों के बारे में। बिल के लागू होने के बाद यह अधिकार हर ग्राहक को मिल जाएंगे।
क्या बदलाव किए गए हैं बिल में
- नए बिल में प्रपोज किया गया है कि, ग्राहकों की शिकायत के निवारण के लिए डिस्ट्रिक्ट, स्टेट और नेशनल लेवल पर कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन और फोरम का गठन किया जाए। इससे हर स्तर पर ग्राहकों की शिकायतों का निवारण तुरंत हो सकेगा।
- ग्राहकों के अधिकारों को प्रमोट और प्रोटेक्ट करने के लिए सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) का गठन हो सकेगा।
- अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस, सेफ्टी इश्यू, किसी प्रोडक्ट के ऑर्डर, रिकॉल या किसी सर्विस के रुकने जैसे इश्यू को CCPA सॉल्व करेगा। इनसे संबंधित शिकायत यहां की जा सकेगी।
- डिस्ट्रिक्ट, स्टेट और नेशनल लेवल पर कंज्यूमर प्रोटेक्शन काउंसिल का गठन भी किया जाएगा।
- इस बिल में सरकार ने ई-कॉमर्स को भी नियमों के दायरे में ला दिया है। इंटरनेट के जरिए अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस होने पर एक्शन हो सकेगा।
क्या हैं कंज्यूमर के अधिकार
- हर ग्राहक को जीवन की सुरक्षा का अधिकार है। कोई भी प्रोडक्ट, गुड्स या सर्विस उसकी जान के लिए खतरा पैदा करने वाली नहीं होना चाहिए।
- ग्राहक को किसी भी प्रोडक्ट या सर्विस की सही क्वालिटी, क्वांटिटी और प्योरिटी का अधिकार है।
- किसी भी प्रोडक्ट्स और सर्विस की कीमत को लेकर उसे ठगा नहीं जा सकता।
- कंज्यूमर को उसकी शिकायतें सुने जाने और उनके निवारण का अधिकार है।
कितनी लगेगी पेनाल्टी
- नियमों का पालन न करने पर 3 साल की सजा और कम से कम 25 हजार रुपए फाइन का प्रोविजन किया गया है। फाइन 1 लाख रुपए तक हो सकता है।
- मामल गंभीर होने पर जुर्माना और सजा दोनों भी हो सकते हैं।
- अब 1 करोड़ तक के मामले डिस्ट्रिक्ट, 1 करोड़ से 10 करोड़ तक के मामले स्टेट और 10 करोड़ से ज्यादा के मामले नेशनल लेवल पर देखे जाएंगे।
- मध्यस्ता के लिए मेडिएशन सेल भी डिस्ट्रिक्ट, स्टेट और नेशनल लेवल पर गठित की जाएंगी।
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