त्रिपुरा पहुंची दुनिया की पहली हॉस्पिटल ट्रेन, दो दिन में एक हजार मरीजों को इलाज मिला

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नई दिल्ली. दुनिया की पहली हॉस्पिटल ट्रेन लाइफलाइन एक्सप्रेस (जीवनरेखा एक्सप्रेस) त्रिपुरा के चुराइबारी रेलवे स्टेशन पर मरीजों के इलाज के लिए खड़ी की गई है। पिछले दो दिनों में इस ट्रेन में एक हजार से ज्यादा लोगों का इलाज हो चुका है। ट्रेन के ज्वाइंट डायरेक्टर अनिल प्रेमसागर के मुताबिक, लाइफलाइन एक्सप्रेस में इलाज के साथ डॉक्टर से परामर्श और मरीजों की एडवांस सर्जरी के लिए भी सुविधाएं मौजूद हैं। इसके चलते स्टेशन पहुंचते ही ट्रेन में पहले दिन इलाज के लिए करीब 400 मरीज पहुंचे। अगले दिन 600 और मरीजों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया।

डॉ. अनिल के मुताबिक, "जितने लोगों का इलाज किया जा रहा है, उनमें 77 मोतियाबिंद से पीड़ित हैं। ट्रेन में आंखों की सर्जरी से लेकर प्लास्टिक सर्जरी, ऑर्थोपैडिक सर्जरी, ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर का भी इलाज किया जा रहा है।''

दूरदराज के इलाकों में इलाज पहुंचाने के लिए शुरू की गई ट्रेन
लाइफलाइन एक्सप्रेस को पहली बार जुलाई 1991 में एनजीओ इम्पैक्ट इंडिया फाउंडेशन की सलाह पर स्वास्थ्य मंत्रालय और रेल मंत्रालय ने पार्टनरशिप में शुरू किया था। दरअसल, इस ट्रेन की शुरुआत इसलिए की गई थी ताकि उन इलाकों तक मेडिकल सुविधाएं पहुंचाईं जा सके, जहां अस्पताल मौजूद न हो। सात डिब्बों की इस ट्रेन में इलाज के लिए सभी आधुनिक उपकरण मौजूद हैं।

ट्रेन में हो चुकी हैं 1.3 लाख सर्जरी
लाइफलाइन एक्सप्रेस अब तक 20 राज्यों के 184 जिलों में लोगों को इलाज की सुविधा मुहैया करा चुकी है। खास बात यह है कि इसके आउट पेशेंट डिपार्टमेंट (ओपीडी) में 10 लाख मरीजों का इलाज किया जा चुका है। इनमें से 1.3 लाख की सर्जरी की गई है।

ट्रेन के सात कोचों में क्या सुविधाएं हैं?

  • पहला कोच: दो शक्तिशाली डीजल सेट, टाॅयलेट, ट्रेन स्टाफ के लिए रहने की जगह, किचन, केबिन, एलपीजी सिलेंडर और गार्ड रूम
  • दूसरा कोच: अधिकारियों और सर्जनों के लिए लाउंज एरिया, एक चेंजिंग रूम, एक प्रशासनीय दफ्तर और एक स्टोररूम
  • तीसरा कोच: एक साथ तीन ऑपरेशनों की सुविधा वाला ऑपरेशन थिएटर, सफाई के लिए जगह और रिकवरी रूम
  • चौथा कोच: एक साथ दो ऑपरेशन की सुविधा वाला ऑपरेशन थिएटर, रिकवरी रूम, और 6 बेड वाला स्टाफ रूम
  • पांचवां कोच: स्टाफ रूम, एक्सरे मशीन के लिए केबिन, मेमोग्राफी मशीन, महिलाओं के इलाज के लिए एक केबिन और लैब एरिया
  • छठवां कोच: महिलाओं की समस्या की जांच के लिए बेड, मरीजों के परामर्श के लिए केबिन, कपड़े बदलने का रूम और दवाइयों के लिए डीप फ्रीजिंग की सुविधा वाला रेफ्रिजरेटर
  • सातवां कोच: ऑडियो-वीडियो सुविधाओं वाला एक ऑडिटोरियम, श्रवण क्षमताओं के इलाज की सुविधा, आंखों की इलाज के लिए केबिन, दांतों के इलाज के लिए यूनिट, एक गार्ड रूम और एक स्टोर रूम


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ट्रेन में आंखों के इलाज के लिए इंतजार करते मरीज।
ट्रेन में ही बनता है अधिकारियों और डॉक्टरों के लिए खाना।
ट्रेन के दो डिब्बों में ऑपरेशन थिएटर की सुविधा मौजूद है।
इसके अलावा ट्रेन में परामर्श केंद्र और दवाइयों के लिए अलग यूनिट भी है।
लाइफलाइन एक्सप्रेस में अब तक करीब 1.3 लाख लोगों का इलाज हो चुका है।

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