अर्थशास्त्री देसाई ने कहा- मोदी टीम को साथ लेकर नहीं चलते, बहुमत मिलना मुश्किल
मुंबई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशंसक रहे ब्रिटिश राजनीतिक और इकोनॉमिस्ट मेघनाद देसाई ने गुरुवार को मोदी की निंदा की। उन्होंने प्रधानमंत्री पर आरोप लगाया कि वो टीम को साथ लेकर नहीं चलते। मतदाताओं की नाराजगी की वजह से मुमकिन है कि आने वाले चुनाव में उन्हें बहुमत न मिले। देसाई ने न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में यह बात कही।
देसाई ने कहा कि मोदी ने जरूरत से ज्यादा वादे किए। वो यह मानने की गलती कर बैठे कि मजबूत मंत्रिमंडल की बजाय कुछ ब्यूरोक्रेट्स की मदद से देश को चला सकते हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए भी उन्होंने ऐसा ही किया था। आखिरकार लोगों में गुस्सा हैं। जनता के मन में यह भावना है कि अच्छे दिन अब तक नहीं आए।
देसाई का कहना है कि मोदी के पास अच्छा मौका था। लेकिन, टीम को साथ लेकर नहीं चलना उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। मोदी अच्छे राजनीतिज्ञ हैं लेकिन, अच्छे टीम प्लेयर नहीं। अरुण जेटली और सुषमा स्वराज को छोड़ उनका कोई मंत्री अनुभवी नहीं है।
इससे उलट मनमोहन सिंह कैबिनेट में प्रणब मुखर्जी, अर्जुन सिंह, शरद पवार और पी चिदंबरम समेत 6 मंत्री ऐसे थे जिनमें प्रधानमंत्री पद की योग्यता थी। देसाई के मुताबिक मोदी को यह अनुमान नहीं था कि चीजें इतनी मुश्किल हो जाएंगीं। अब स्थिति उस स्तर पर पहुंच गई है कि मोदी को जनता से एक और मौका देने की अपील करनी पड़ेगी।
देसाई ने आरबीआई के मुद्दे पर भी मोदी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि लगातार दो गवर्नर का पद छोड़ना अच्छी बात नहीं है। उन्होंने सरकार द्वारा आरबीआई एक्ट के सेक्शन-7 का इस्तेमाल किए जाने की भी निंदा की।
देसाई ने कहा कि कोई सरकार मूर्खता करना चाहे तो वह आरबीआई का फंड लेकर उसे किसानों की कर्जमाफी जैसे कामों पर खर्च करे। आप देख सकते हैं कि रुपए में भारी गिरावट आ गई। उन्होंने चेतावनी देते हुए आरबीआई के रिजर्व को रेड लाइन बताया और कहा कि इसे लांघना नहीं चाहिए।
आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य के रिजर्व बैंक की स्वायत्ता वाले बयान की देसाई ने तारीफ की। आचार्य ने अक्टूबर में कहा था कि केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता से समझौता करने पर सरकार को बाजार की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। देसाई ने कहा कि यह अच्छी चेतावनी थी।
देसाई ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्रीय बैंक के संचालन का मकसद राजनीतिक नहीं होना चाहिए। उन्होंने आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड से नचिकेत मोर को हटाने और स्वदेशी जागरण मंच जैसे संगठनों को तवज्जो देने की निंदा की।
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