नसीरुद्दीन का लिटरेचर फेस्टिवल में होने वाला कार्यक्रम रद्द, हिंदूवादी संगठनों ने किया था विरोध
अजमेर. हिंदूवादी संगठनों के विरोध के चलते आयोजकों ने लिटरेचर फेस्टिवल में होने वाला अभिनेता नसीरुद्दीन शाह का कार्यक्रम रद्द कर दिया। तीन दिन तक चलने वाले इस फेस्टिवल में नसीरुद्दीन शाह शुक्रवार को मुख्य वक्ता के तौर पर आने वाले थे, लेकिन वे विरोध के चलते नहीं आ सके।नसीर के बुलंदशहर हिंसापर दिए बयान को लेकर विवाद चल रहा है। उन्होंने कहा था- देश में पुलिस अफसर से ज्यादा गाय की हत्या को महत्व दिया जा रहा है। मुझे अपने बच्चों की फिक्र होती है।
फेस्टिवल के संयोजक रास बिहारी गौर ने कहा- पांचवें लिटरेचर फेस्टिवल से पहले कई हिंदूवादी संगठनों ने आयोजन स्थल के सामने नसीरुद्दीन का विरोध किया। एक प्रदर्शनकारी ने नसीरुद्दीन शाह के पोस्टर पर काली स्याही भी फेंकी।
गौर ने बताया- नसीरुद्दीन को फेस्टिवल का उद्घाटन करना था, लेकिन विरोध के चलते वह यहां नहीं आ सके। उन्हें यहां अपनी किताब भी लॉन्च करनी थी, लेकिन यह कार्यक्रम भी रद्द कर दिया गया।
हालांकि, गौर ने बताया कि लिटरेचर फेस्टिवल में होने वाले बाकी कार्यक्रम शुक्रवार को शुरू हुए। यह फेस्टिवल रविवार को खत्म होगा।
शाह ने बयान दिया था- मैंने अपने बच्चों को मजहबी तालीम नहीं दी, क्योंकि मेरा ये मानना है कि अच्छाई और बुराई का मजहब से कुछ लेना-देना नहीं। मुझे फिक्र होती है कि अपने बच्चों के बारे में कि कल को उनको अगर भीड़ ने घेर लिया कि तुम हिंदू हो या मुसलमान, तो उनके पास तो कोई जवाब ही नहीं होगा।
हालांकि, शुक्रवार को जब उनसे सवाल पूछा गया तो नसीरुद्दीन ने कहा- मैंने जो कहा, वह एक परेशान भारतीय के नाते कहा था। मैंने पहले भी यही कहा था। इस वक्त मैंने कहा तो मुझे देशद्रोही कहा जा रहा है, इस पर आश्चर्य होता है।
उन्होंने कहा, "मुझे आलोचना झेलनी होगी। अगर उन्हें मेरी आलोचना करने का अधिकार है तो मेरे पास भी समान अधिकार है। मैंने उस देश के बारे में चिंता जाहिर की, जिसे मैं प्यार करता हूं, जो मेरा घर है। यह अपराध कैसे हो गया।'
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