साल में खाना चाहिए 7 किलो तेल, खा रहे 18 किलो

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मुंबई (धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया).बदलती खान-पान की आदतों के कारण देश में लगातार खाद्य तेलों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। देश में एक व्यक्ति अभी औसतन 17.5-18 किलो तेल प्रतिवर्ष खा रहा है, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को अधिकतम 7 किलो तेल का इस्तेमाल ही एक साल में करना चाहिए। स्वास्थ्य के प्रति सचेत लोगों ने नए तरह के ऑइल (जैसे ऑलिव, अवोकाडो) का इस्तेमाल भी बढ़ा दिया है। वे तेल का इस्तेमाल बदल-बदलकर कर रहे हैं। देश में राइस ब्रान का उपयोग प्रतिवर्ष करीब 50 हजार टन बढ़ रहा है, जबकि उच्च आय वर्ग खाने में ऑलिव ऑइल को तरजीह दे रहा है।

वनस्पति घी की मात्रा स्थिर
भारत में पिछले 8 साल के दौरान सनफ्लावर तेल का उपयोग करीब ढाई गुना बढ़ गया है, जबकि मूंगफली (पीनट) के तेल का इस्तेमाल कम हुआ है। वहीं दूसरी ओर, करीब 23 वर्ष बाद भी वनस्पति घी की मात्रा लगभग स्थिर है, यह 10 लाख टन के आसपासबनी हुई है। वनस्पति घी का 80 फीसदी तक व्यावसायिक उपयोग हो रहा है। द सॉल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार देश में वर्तमान में करीब 17.5 से 18 किलो तेल का उपयोग औसतन एक व्यक्ति द्वारा हो रहा है। 2017-18 में 16.5 किलो तेल औसतन प्रति व्यक्ति की खपत का अनुमान था।इसमें घरेलू उपभोग के तेल के अतिरिक्त होटल-रेस्त्रां और कमर्शियल यूज़ भी शामिल है।

स्वास्थ्य के लिए नेचुरल ऑइल बेहतर
न्यूट्रीशियन दीप्ति रावत बताती हैं कि स्वास्थ्य के लिए नेचुरल ऑइल का प्रयोग ही सही है। ऑलिव ऑइल का इस्तेमाल करते समय ध्यान देना चाहिए कि यह डीप फ्राइ के लिए नहीं है। इसमें स्मोकिंग पॉइंट कम होता है, इसका उपयोग सलाद आदि में अधिक फायदेमंद है। रावत कहती हैं कि एक टी स्पून (5 एमएल) घी और अधिकतम 15 से 20 एमएल तेल का उपयोग 40 वर्ष से अधिक की उम्र के व्यक्ति को करना चाहिए जबकि इससे कम उम्र के लोगों को अधिकतम 20 से 25 एमएल तेल प्रतिदिन का प्रयोग करना चाहिए। तेल का उपयोग करते समय ध्यान रखना चाहिए कि इसे बदल-बदलकर खाना चाहिए। इस तरह औसतन एक व्यक्ति को एक वर्ष में करीब सात किलो तेल का उपयोग आदर्श स्थिति में करना चाहिए।

देश में सर्वाधिक आयात पाम तेल का
भारत में वर्तमान में खाद्य तेलों की खपत 2.5 से तीन फीसदी की दर से बढ़ रही है। देश में सर्वाधिक आयात पाम तेल का होता है, इसका सबसे ज्यादा उपयोग व्यावसायिक इस्तेमाल में हो रहा है। इस संबंध में अडानी विल्मर के निदेशक और एसईए के अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी बताते हैं कि स्वास्थ्य के प्रति सजगता बढ़ी है, इसलिए ऑलिव ऑइल और राइस ब्रान जैसे तेलों का उपयोग बढ़ रहा है। ऑलिव ऑइल का उपयोग अभी 10 हजार मीट्रिक टन से अधिक प्रतिवर्ष है। यह मात्रा बहुत थोड़ी है। बीते तीन-चार सालों में सनफ्लावर का उपयोग तेजी से बढ़ा है।

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राइस ब्रान का उपयोग तेजी से बढ़ा

एसईए के कार्यकारी निदेशक डॉ. बीवी मेहता ने बताया कि देश में औसतन तेल की खपत 230 लाख टन वार्षिक की है। राइस ब्रान के एडिबल केटेगिरी में आने के बाद से इसका उपयोग तेजी से बढ़ा है। वर्तमान में करीब दस से 11 लाख टन तेल प्रतिवर्ष का उपयोग हो रहा है। हर वर्ष करीब 50 हजार टन राइस ब्रान तेल का उपयोग बढ़ रहा है। देश में करीब 50 फीसदी लूज और इतना ही पैक्ड ऑइल बिक रहा है। नए वर्ष में केंद्र सरकार ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों (आसियान) से किए जाने वाले कच्चे और रिफाइंड पाम ऑयल पर आयात शुल्क घटा दिया है। इससे तेल आयात के बढ़ने की उम्मीद है।

लोग हुए हैं जागरूक
फूड एक्सपर्ट और होटल-रेस्त्रां मैनेजमेंट कंपनी फूड डिजाइन हॉस्पिटैलिटी सिस्टम्स के सीएमडी एचए मिश्रा के मुताबिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का असर है कि परंपरागत रूप से नारियल का प्रयोग करने वाले दक्षिण भारत में सनफ्लावर, मध्य भारत में सरसों और पश्चिम भारत में सोयाबीन का प्रयोग बढ़ रहा है। दूसरी ओर कोलेस्ट्रॉल और फैट कम करने वाले गुणों के कारण राइस ब्रान, ऑलिव ऑइल और सनफ्लावर का प्रयोग बढ़ रहा है। अधिक कीमत होने के कारण ऑलिव ऑइल का प्रयोग आर्थिक रूप से समृद्ध घरों में हो रहा है। फाइव स्टार होटल में बनने वाला 30 फीसदी खाना इसी तेल से बन रहा है। जबकि, इटैलियन और विदेशी रेस्त्रां में तो 90 फीसदी तक खाना पकाने में इसका प्रयोग किया जाता है।

बदल-बदलकर उपयोग करें तेल
इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट डाॅ. केके पांडे कहते हैं कि अगर महीने में परिवार में तीन किलो तेल का प्रयोग किया जाता है तो एक किलो सरसों, एक किलो तिल और एक किलो सनफ्लॉवर के तेल का उपयोग होना चाहिए। कहने का आशय यह है कि तेलों को बदल-बदलकर उपयोग करना चाहिए जो स्वास्थ्य के लिए सही रहता है। एक व्यक्ति को एक दिन में दो बड़े चम्मच ही तेल का सेवन करना चाहिए।

पंजाब, आंध्र प्रदेश में ज्यादा प्रयोग
सेलिब्रिटी शेफ हरपाल सिंह सोखी कहते हैं कि देश में सौ साल पहले तिल, मूंगफली, नारियल के साथ ही वनस्पति और घी का प्रयोग होता था। लेकिन फिर धीरे-धीरे सूरजमुखी, कॉटन सीड, राइस ब्रान, रैपसीड, फ्लेक्स सीड ऑइल, ऑलिव ऑइल, पाम ऑइल, एवोकाडो ऑइल का इस्तेमाल होने लगा है। अब कोल्ड प्रेस्ड ऑइल, एटू घी और ब्लेंड ऑइल जैसे तेल भी आ गए हैं। सोखी कहते हैं कि मेरे अनुभव के अनुसार विदर्भ, पंजाब, आंध्र प्रदेश में लोग तेल का प्रयोग ज्यादा करते हैं। पहले की तुलना में अभी तेल का प्रयोग बढ़ा है। वर्तमान में लोगों में तेल की समझ बढ़ने के साथ ही लोग काेल्ड प्रेस्ड, नैचुरल और पोली व मोनो सेचुरेटेड फैट वाले तेल का उपयोग कर रहे हैं। डाइबिटीज और ब्लडप्रेशर कम करने वाले तेल का भी उपयोग हाे रहा है।

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क्रूड और सोने के बाद सर्वाधिक आयात तेल का
जीजीएन रिसर्च के मैनेजिंग पार्टनर नीरव देसाई के अनुसार क्रूड ऑयल और सोने के बाद खाद्य तेलों का देश में सर्वाधिक आयात होता है। भारत अपने खाद्य तेल की आवश्यकता का करीब 75% अायात करता है और 11.5 अरब डॉलर (करीब 80 हजार करोड़ रु.) का इंपोर्ट करता है। देश में सोयाबीन तेल का आयात ब्राजील, अर्जेंटीना और पराग्वे से, सनफ्लाॅवर तेल का यूक्रेन, रूस, अर्जेंटीना से, पाम तेल का इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड से सर्वाधिक होता है।

जानिए कौन से तेल का क्या है फायदा-नुकसान

ऑलिव:पार्किन्सन-अल्जाइमर से बचाता है :न्यूट्रीशनिस्ट दीप्ति रावत कहती हैं इसमें एंटी ऑक्सीडेंट्स हैं, जो आर्थराइटिस के दर्द को कम करते हैं। ये पार्किन्सन और अल्जाइमर से बचाता है। दिल के लिए बेहद फायदेमंद।
लेकिन > इसके 5 एमएल में करीब 45 कैलोरी होती है।

सरसों:सर्दी और त्वचा संबंधी बीमारियों में फायदा :फूड एक्सपर्ट एचए मिश्रा बताते हैं कि संतुलित मात्रा में खाएं तो यह पाचन बेहतर करता है। भूख बढ़ाता है। सर्दी, त्वचा की बीमारियों में फायदेमंद होता है।
लेकिन > इरूसिक एसिड होता है। दिल-फेफड़े के लिए खतरा है।

मूंगफली: बैड कोलेस्ट्रॉल कम होता: इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के डॉ. केके पांडे कहते हैं कि इसमें मोनो और पॉलीअनसैचुरेटेड फैट होते हैं, जिससे बैड कॉलेस्ट्रॉल कम होता है।

लेकिन > बहुत भारी होता है। प्रमुख तेलों में सिर्फ इसकी खपत कम हुई है।

राइस ब्रान:इंसुलिन रेजिस्टेंस को बेहतर करता :इसमें ओरीज़नॉल पाया जाता है। इससे कॉलेस्ट्रॉल लेवल कम होता है। यह तेल इंसुलिन रेजिस्टेंस को बेहतर करता है। स्क्वालीन भी पाया जाता है, जो त्वचा को बेहतर बनाता है।
लेकिन > इस तेल में ओमेगा-3 नहीं के बराबर होता है, जो ठीक नहीं है।

सनफ्लॉवर:कैंसर और दिल की बीमारी से बचाता :ओमेगा-6 और विटामिन ई होने के कारण यह शरीर की काेशिकाओं के लिए बेहतर है। कैंसर और दिल की बीमारियों से बचाता है। प्रतिरक्षा तंत्र और तंत्रिका तंत्र बेहतर करता है।
लेकिन > इसमें सैचुरेटेड फैट ज्यादा। अधिक सेवन से कॉलेस्ट्रॉल बढ़ता है।


खाद्य तेलों की खपत

तेल 2008-09 2016-17
सोयाबीन 21.12 48.95
पाम ऑइल 63.92 91.05
सरसों 16.10 21.21
मूंगफली 5.91 5.31
कॉटन सीड 9.65 11.89
सनफ्लावर 8.46 21.16
अन्य 15.43 17.83
कुल 140.59 217.5

(खपत लाख टन में)
स्रोत: आंकड़े द सॉलवेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की रिपोर्ट, जीजीएन रिसर्च पर आधारित।



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7 kg of oil should eat in a year

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