नेस्ले ने माना- मैगी में लेड है, कोर्ट ने पूछा- हम क्यों खाएं

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नई दिल्ली.नेस्ले इंडिया ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उसके मैगी नूडल्स में कुछ मात्रा में लेड होता है। हालांकि, यह मात्रा तय मानकों के अंदर ही है। इस पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने पूछा- 'हम लेड वाली मैगी क्यों खाएं?' जवाब में नेस्ले इंडिया की ओर से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इतनी मात्रा में लेड तो कई अन्य उत्पादों में भी होता है।

  1. इसके बाद कोर्ट ने सरकार द्वारा नेस्ले इंडिया के खिलाफ राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) में किए गए केस की कार्यवाही शुरू करने की इजाजत दे दी। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने आयाेग में 2015 में नेस्ले के खिलाफ मैगी नूडल्स के झूठे लेबल व कारोबार के गलत तौर-तरीके अपनाकर उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने की शिकायत की थी।

  2. नेस्ले पर कारोबार के गलत तौर तरीके अपनाकर झूठी लेबलिंग और भ्रामक विज्ञापनों का आरोप लगाकर सरकार ने 640 करोड़ रु. हर्जाना मांग रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर 2015 को एनसीडीआरसी में कार्यवाही पर स्टे लगा दिया था। कोर्ट ने मैसुरू स्थित सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट से मैगी के सैंपलों की जांच रिपोर्ट मांगी थी। सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि लैब की रिपोर्ट में मैगी में लेड की मात्रा तय मानकों के अंदर मिली है। कोर्ट ने कहा कि लैब की रिपोर्ट को ध्यान में रखकर ही एनसीडीआरसी सुनवाई करे।



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      Case against Nestle India

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