फ्रांस के ‘यलो वेस्ट’ की तर्ज पर कांग्रेस का स्कार्फ पहनकर निकलेंगे ‘ट्रुथ वाॅलंटियर्स’

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नई दिल्ली (मुकेश कौशिक).संसद सत्र के तुरंत बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को वैचारिक स्तर पर घेरने का एक अभूतपूर्व अभियान कांग्रेस छेड़ने जा रही है। इसके तहत संघ को महाराष्ट्र में उसके प्रभुत्व वाले गढ़ में चुनौती दी जाएगी। दिलचस्प बात यह है कि वैचारिक संग्राम के इस अभियान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने के बजाय आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, उनके करीबी माने जाने वाले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर वार किए जाएंगे।


इस अभियान के क्यूरेटर्स की टीम के एक प्रमुख सदस्य ने दैनिक भास्कर को बताया कि कांग्रेस नेतृत्व ने तय किया है कि अगर भाजपा को 2019 के चुनाव में रोकना है तो इसके लिए आरएसएस को निशाने पर रखा जाए, संघ की विचारधारा को देश के प्रमुख शत्रु के तौर पर पेश किया जाए।


आरएसएस से सीधे लड़ाई के लिए कांग्रेस पार्टी ने संवाद का एक अलग बैनर गठित करने का फैसला किया है, जिसके नाम की औपचारिक घोषणा विदर्भ में जनवरी के दूसरे सप्ताह में की जाएगी। नाम पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। इसके लिए 'जवाब दो संघ', मंथन, खरा संवाद जैसे नामों पर विचार चल रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार इस अभियान के लिए 5000 कार्यकर्ताओं की संगठित और प्रशिक्षित टीम तैयार करने की योजना है। इन कार्यकर्ताओं को 'ट्रुथ वालंटियर' नाम दिया जाएगा। वालंटियर्स के रजिस्ट्रेशन के लिए ग्राउंड टीम नागपुर और विदर्भ के अन्य क्षेत्रों में सक्रिय हो चुकी है। अभियान के दूसरे चरण में इसे आरएसएस के प्रभुत्व वाले बाकी प्रांतों में ले जाया जाएगा।


वाॅलंटियर्स में उन सामान्य युवाओं को तरजीह दी जाएगी जो नौकरी ना मिलने से आक्रोश में हैं। इन्हें शॉर्ट टर्म वर्कशाॅप्स के जरिए लोगों तक पहुंचने, आरएसएस के जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधे सवाल करने और अपने-अपने कार्य क्षेत्र में लघु सभाएं आयोजित करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। अभियान का कैरिकुलम कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की सहमति से एक प्रोफेशनल एजेंसी ने तैयार किया है। कांग्रेस अध्यक्ष खुद विदर्भ और खास तौर से संघ मुख्यालय के आसपास होने वाले इस कैम्पेन के कार्यक्रमों की अगुआईकरेंगे।


कैंपेन का एक दिलचस्प पहलू यह है कि फ्रांस में हाल ही में पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि के खिलाफ हुए 'येलो वेस्ट' आंदोलन की तर्ज पर ये वालंटियर्स कांग्रेस के तिरंगे झंडे का स्कार्फ पहनकर निकलेंगे। संघ से पूछे जाने वाले मुद्दों के साथ वे डोर-टू-डोर जाएंगे, संघ की शाखाओं वाले क्षेत्रों में स्वयंसेवकों के परिवारों से संपर्क करेंगे और उन सदस्यों से संवाद कायम करेंगे जो संघ के स्वयंसेवक नहीं हैं। अभियान के मकसद के बारे में पार्टी में यह राय साफ है कि संघ और खास तौर से गडकरी या फडणवीस को इस क्षेत्र में मात देना संभव नहीं है, लेकिन उन्हें उनके गढ़ में सीमित करने से कांग्रेस को देश के दूसरे क्षेत्रों में जोरदार टक्कर देने का 'स्पेस' मिल जाएगा।


दूसरी ओर भाजपा के एक प्रमुख रणनीतिकार और वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि संघ को निशाना बनाना कांग्रेस के लिए ही भारी पड़ेगा। सच तो यह है कि संघ का स्वयंसेवक कांग्रेस के हमलों से जाग रहा है और मध्य प्रदेश एवं राजस्थान के विधानसभा चुनाव में इसका असर साफ दिखाई दिया, जहां अंतिम समय में स्वयंसेवक अपने घरों से निकल पड़े और कांग्रेस को टफ फाइट दी।


राजनीतिक विश्लेषक एनके सिंह इस बारे में कहते हैं कि कांग्रेस का यह अभियान दुधारी तलवार साबित हो सकता है। इसमें कोई शक नहीं कि विरोधियों के हमले के समय संघ के स्वयंसेवक पूरी तरह एकजुट हो जाते हैं, लेकिन यह भी सच है कि उदार हिंदू समुदाय में संघ की उतनी स्वीकार्यता नहीं है।



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बढ़ती महंगाई और राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों के विरोध में फ्रांस में येलो वेस्ट प्रदर्शन किया गया। (फाइल फोटो)

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