इस साल फोकस मेड इन इंडिया जहाजों पर, नए एयरक्राफ्ट आएंगे
भारतीय सेना के लिए 2019 खास होगा। क्योंकि, सेना के तीनों अंगों में भारत में बने हथियार, विमानवाहक पोत, पनडुब्बियां और एयरक्राफ्ट शामिल होंगे। वायुसेना में तीन तरह के विमान आएंगे, जिससे वह काफी ताकतवर हो जाएगी। इसमें सबसे खास है लड़ाकू विमान राफेल। इसी तरह नौसेना में दो पनडुब्बियां दोबारा शामिल होंगी, जो जरूरी बदलावों के लिए रूस भेजी गई थीं।
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इस साल सेना का जोर आधुनिकीकरण पर होगा। इन्फेंट्री का फोकस कंवेनशनल और प्रॉक्सी वॉर पर है। इसके लिए एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल, पैरा स्पेशल फोर्स के लिए स्पेशल इक्विपमेंट, स्नाइपर और असॉल्ट राइफल्स महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स हैं। कॉम्बैट वेहिकल्स के अपग्रेडेशन और इंडक्शन के साथ हम नाइट फाइटिंग कैपेबिलिटी बढ़ा रहे हैं। आर्टिलरी और एयर डिफेंस के बेड़े का अपग्रेडेशन होगा। सेना मेक इन इंडिया के जरिए भविष्य की जरूरतों को पूरा करना चाहती है। शहीदों के परिवार और पूर्व सैनिकों के लिए सेना ने कई स्कीम शुरू की हैं। एक्स सर्विसमैन कंट्रीब्यूट्री हैल्थ स्कीम के तहत कई पॉलिसी शुरू की गई हैं। पीएमकेवीवाई स्कीम के तहत सैनिकों की पत्नियों को रोजगार देने पर जोर रहेगा, जिसका रेट लगभग 100 प्रतिशत है।
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विमानवाहक पोत विक्रांत युद्ध के लिए तैयार हो जाएगा
इस साल विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत युद्ध के लिए तैयार हो जाएगा। देश के अलग-अलग शिपयार्ड में 32 युद्धपोत और पनडुब्बियां तैयार हो रही हैं। इस साल हम भारत में बने कई युद्धपोतों-पनडुब्बियों को नौसेना में शामिल करेंगे। हम देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए हम प्राइवेट इंडस्ट्रीज, एमएसएमई, स्टार्टअप और एकेडमिक इंस्टीट्यूशंस के साथ लगातार संपर्क में हैं। एक और कालवरी क्लास की डीजल इलेक्ट्रिक अटैक सबमरीन भी नौसेना का हिस्सा बन सकती है। दो सिंधुघोष क्लास की पनडुब्बियां सिंधुकेसरी और सिंधुराज नौसेना में दोबारा शामिल होंगी। ये अभी लाइफ एक्सटेंशन रीफिट के लिए रूस गई हैं। लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के फ्लाइट टेस्ट इसी साल होंगे। मार्च में हमारा दूसरा डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू वेसल विशाखापट्टनम में काम करने लगेगा।
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चिनूक, अपाचे और राफेल वायुसेना में शामिल होंगे

मेक इन इंडिया के तहत हम लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट, आकाश और एयरबॉर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम को वायुसेना का हिस्सा बना चुके हैं। इस साल हम चिनूक, अपाचे और राफेल को वायुसेना में शामिल कर उनकी ऑपरेशनल क्षमता को और ज्यादा मजबूत करेंगे। वायुसेना इंडियन ह्यूमन स्पेस प्रोग्राम में एस्ट्रोनॉट्स सिलेक्शन, मेडिकल इवैल्युएशन, ट्रेनिंग और ह्युमन इंजीनियरिंग सपोर्ट और डेवलपमेंट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। डीआरडीओ, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैट्रोलियम, डायरेक्टोरेट जनरल एयरोनॉटिकल क्वालिटी के साथ मिलकर वायुसेना एयरक्राफ्ट्स के लिए बायो जेट फ्यूल बनाने पर काम कर रही है। इससे फ्यूल का खर्च कम होगा। साथ ही किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी।
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