सितंबर तिमाही में एनपीए घटकर 10.8% पर आया, बैंकों की हालत 3 साल बाद सुधरी
मुंबई. रघुराम राजन ने रिजर्व बैंक का गवर्नर रहते बैंकों की एसेट क्वालिटी सुधारने की जो पहल की थी, अब उसके नतीजे आने लगे हैं। इस साल सितंबर तिमाही में बैंकिंग सेक्टर का ग्रॉस एनपीए 10.8% रह गया है। मार्च तिमाही में यह 11.5% था।
मार्च 2015 के बाद पहली बार एनपीए में गिरावट आई है। नेट एनपीए भी इस दौरान 6.2% से घटकर 5.3% पर आ गया। रिजर्व बैंक में सोमवार को जारी छमाही फाइनेंशियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।
आरबीआई ने मार्च 2019 तक ग्रॉस एनपीए 10.3% तक आने की संभावना जताई है। एनपीए घटने पर रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि बैंकिंग सेक्टर सुधार के रास्ते पर है। हालांकि उन्होंने सरकारी बैंकों में गवर्नेंस सुधारने की बात भी कही।
रिपोर्ट की प्रस्तावना में दास ने लिखा है कि सरकारी बैंकों को रिकैपिटलाइजेशन के जरिए मदद की जरूरत है। बैंकों का एनपीए अब भी ज्यादा है, लेकिन आरबीआई के स्ट्रेस टेस्ट से पता चलता है कि आगे इसमें कमी आएगी।
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बैंकों के कुल कर्ज में बड़ी कंपनियों की हिस्सेदारी 54.6% है। लेकिन ग्रॉस एनपीए में इनका हिस्सा 83.4% है। 100 बड़े कर्जदारों को बैंकों ने 16% लोन दे रखा है। एनपीए में इनका हिस्सा 21.2% है।
आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक एनबीएफसी की बैलेंस शीट साल भर में 17.2% बढ़कर 26 लाख करोड़ रुपए हो गई है। अप्रैल से सितंबर 2018 के दौरान इनका शुद्ध लाभ 16.2% बढ़ा है।
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