समय पर लोन चुकाने वाले किसानों का ब्याज माफ कर सकती है सरकार
नई दिल्ली. आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए सरकार उन किसानों का ब्याज माफ कर सकती है जो समय पर कर्ज चुका रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इस प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है कि खाद्यान फसलों के बीमा का प्रीमियम माफ कर दिया जाए और बागवानी से जुड़ी फसलों के इंश्योरेंस प्रीमियम में कमी की जाए। इससे देश के करीब 5 लाख किसानों को राहत मिलेगी।
छोटी अवधि के लिए किसानों को 3 से 7 लाख रुपए तक का लोन 7% की ब्याज दर पर मिलता है। समय पर भुगतान को बढ़ावा देने के लिए उन्हें 3% इन्सेंटिव दिया जाता है। इस तरह किसान कर्ज पर 4% ब्याज का भुगतान करते हैं।
किसानों को ब्याज में 2 से 5% तक छूट देकर केंद्र सरकार हर साल 15,000 करोड़ रुपए का खर्च उठाती है। अगर पूरी तरह ब्याज माफ किया जाता है तो यह राशि 30,000 करोड़ रुपए हो जाएगी।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत सरकार किसानों से अलग-अलग फसलों के इंश्योरेंस के लिए 1.5 से 5% तक प्रीमियम लेती है। प्रीमियम का बाकी खर्च केंद्र और राज्य सरकारें उठाती हैं। फसल वर्ष 2017-18 (जुलाई-जून) में 4.79 लाख किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कवर किए गए।
सूत्रों के मुताबिक रबी और खरीफ की फसलों के इंश्योरेंस के लिए किसान सालाना 5,000 करोड़ रुपए का प्रीमियम चुकाते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक 2019 के लोकसभा चुनाव में किसानों को राहत का मुद्दा बेहद अहम होगा।
राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में हार के बाद केंद्र सरकार एग्रीकल्चर सेक्टर को राहत देने के लिए जोर-शोर से जुट गई है। सूत्रों के मुताबिक इस संबंध में पिछले कुछ दिनों में कई उच्च स्तरीय बैठकें हो चुकी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की ओर से कर्ज माफी की घोषणा राज्यों के चुनावों में भाजपा की हार की बड़ी वजह रही।
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