भारत के लिए रक्षा क्षेत्र के लिए अहम रहा ये साल, वीडियो में देखें कैसे बढ़ी भारत की ताकत

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नेशनल डेस्क। साल 2018 जाने को है। हर साल की तरह 2018 का साल भी अलविदा कह रहा है। लोगों ने नए साल के वेलकम की तैयारियां शुरू कर दी हैं। साल 2018 भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए काफी अहम साबित हुआ है। इस साल न सिर्फ रूस के साथ एस-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम की डील आखिरकार अपने अंजाम पर पहुंची तो वहीं भारत की पहली परमाणु ताकत से लैस पनडुब्‍बी आईएनएस अरिहंत ने पहली गश्‍त पूरी की। कई और भी बातें रहीं जिनकी वजह से ये साल सेनाओं के लिए कई मायनों में अहम साबित हुआ। एक नजर डालिए साल 2018 में कुछ बड़े रक्षा सौदों पर और रक्षा क्षेत्र के कुछ अहम घटनाक्रमों पर।

भारत और फ्रांस के बीच राफेल डील हुई
इस डील के तहत भारत फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान हासिल करेगा। ये सौदा 7.8 बिलियन यूरो यानि करीब 59 हजार करोड़ रुपए का है। राफेल विमान फ्रांस की दासौल्ट कंपनी द्वारा बनाया गया 2 इंजन वाला लड़ाकू विमान है।इसकी लंबाई 15.27 मीटर है और इसमें एक या दो पायलट बैठ सकते हैं। इस डील पर कांग्रेस ने करप्शन के आरोप भी लगाए हैं

एस-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम की डील हुई पूरी
भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए काफी अहम रहा साल 2018 में रूस के साथ 39,000 करोड़ की एस-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम की डील पूरी हुई।इस डील के तहत भारत को मिलेंगे 5 एयर डिफेंस सिस्‍टम।

3000 करोड़ की रक्षा खरीद को मंजूरी
रक्षा अधिग्रहण परिषद ने दी 3000 करोड़ की रक्षा खरीद को मंजूरी। इसमें ब्रह्मोस मिसाइल की खरीद की मंजूरी भी शामिल है । रूस और भारत के ज्वाइंट वेंचर से ब्रह्मोस मिसाइलतैयार हो रही है।ब्रह्मोस रॉकेट सिस्‍टम दुनिया के सर्वश्रेष्‍ठ मिसाइल सिस्‍टम में से एकहै। ब्रह्मोस की स्‍पीड 2.8 मैक और रेंज 290 किमी है । ये मिसाइल 300 किलोग्राम भारी युद्धक सामग्री ले जाने में सक्षम है।

भारत और अमेरिका के बीच साइन हुआ कॉमकासा
भारत और अमेरिका के बीच पहली 2+2 वार्ता हुईकॉमकासा यानी कम्‍युनिकेशंस कॉम्‍पैटि‍बिलिटी एंड सिक्‍योरिटी एग्रीमेंट भी साइन किया गया।इस एग्रीमेंट से भारत के लिए अमेरिकी की तरफ से संवेदनशील मिलिट्री टेक्‍नोलॉजी और उपकरणों की खरीद का रास्‍ता साफ हो गया है

INS अरिहंत ने छुआ नया मुकाम
परमाणु क्षमता से लैस भारत की पहली पनडुब्‍बी बनी। INS अरिहंत ने 5 नवंबर को पूरी की पहली गश्‍त । पनडुब्‍बी ने देश के परमाणु चक्र को भी पूरा किया। आईएनएस अरिहंत की रेंज 3500 किमी ये 12 मिसाइलों को एक साथ ले जाने में सक्षम है।



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