पाक ने भारत के सामने रखी शर्त, एक दिन में 500 श्रद्धालुओं को प्रवेश मिलेगा, पासपोर्ट भी जरूरी
नई दिल्ली. करतारपुर कॉरिडोर को लेकर पाकिस्तान सरकार ने भारत के सामने एक प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव में पाक ने भारत के सामने कुछ शर्त रखते हुए कहा कि बगैर परमिट के किसी भी श्रद्धालु को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। पासपोर्ट भी जरूरी होगा और एक दिन में 500 श्रद्धालुओं को ही प्रवेश दिया जाएगा। भारत को तीन दिन पहले यात्रियों की जानकारी देना भी जरूरी होगा।
मोदी सरकार ने कैबिनेट बैठक में करतारपुर कॉरिडोर बनाने को मंजूरी पहले ही दे दी। भारत में सिखों के पवित्र धार्मिक स्थल करतारपुर कॉरिडोर का शिलान्यास 26 नवंबर 2018 को किया गया था। इसके दो दिन बाद 28 नवंबर को पाक ने करतारपुर साहिब तक जाने वाले कॉरिडोर के दूसरे हिस्से की नींव रखी। पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने कॉरिडोर का शिलान्यास किया था।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया था, 'केंद्र सरकार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को गुरुनानक देवजी की 550वीं जयंती मनाने के लिए कहेगी। रेलवे गुरुनानक देवजी से जुड़े पवित्र स्थलों के बीच एक स्पेशल ट्रेन चलाएगा। दिल्ली में एक इंटरनेशनल समिट भी कराई जाएगी।'
भारत ने 20 साल पहले इस कॉरिडोर को बनाने का प्रस्ताव दिया था। हाल ही में दोनों देशों ने इस कॉरिडोर को बनाने पर सहमति जताई। यह गलियारा गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक स्थान से इंटरनेशनल बॉर्डर तक बनाया जाएगा।
भारत में इस कॉरिडोर का करीब दो किलोमीटर का हिस्सा और पाकिस्तान में करीब तीन किलोमीटर का हिस्सा होगा। इसके निर्माण में करीब 16 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। चार महीने में इसे बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
गुरुनानक देवजी ने करतारपुर साहब में अपने जीवन के 18 साल बिताए थे। यह भारत की सीमा से कुछ किलोमीटर अंदर पाकिस्तान की सीमा पर है। इस कॉरिडोर के बन जाने से लाखों सिख तीर्थयात्रियों को पवित्र स्थान पर जाने में मदद मिलेगी। फिलहाल, अभी यहां पर भारत की सीमा पर खड़े होकर दूरबीन की मदद से गुरुद्वारा के दर्शन की सुविधा है।
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