प्याज के निर्यात पर सरकार ने इन्सेंटिव 5% से बढ़ाकर 10% किया
नई दिल्ली. प्याज की उचित कीमत नहीं मिलने से जूझ रहे किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने प्याज के निर्यात पर इन्सेंटिव बढ़ाकर दोगुना कर दिया है। मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (एमईआईएस) के तहत प्याज उत्पादकों को दिया जाने वाला एक्सपोर्ट इन्सेंटिव 5% से बढ़ाकर 10% कर दिया है। ताजा बढ़ोतरी के साथ प्याज पर एग्रो-एक्सपोर्ट इन्सेंटिव सबसे ज्यादा हो गया है।
सरकार के मुताबिक, इस इन्सेंटिव से किसानों को फसल की बेहतर कीमत पाने में मदद मिलेगी। मंडियों में नई फसल आने के कारण प्याज की खुदरा कीमतें बहुत अधिक गिर गई हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने का फैसला किया है ताकि घरेलू कीमतों में स्थिरता आए।
इससे पहले वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु ने प्याज निर्यातकों के लिए इन्सेंटिव को दोगुना करने के लिए वित्त मंत्रालय से 179.16 करोड़ आवंटित करने का अनुरोध किया था। उन्होंने वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर कहा था कि उनका मंत्रालय एमईआईएस के तहत निर्यात पर इन्सेंटिव 5% से बढ़ाकर 10% करना चाहता है।
एमईआईएस के तहत सरकार निर्यातकों को देश और उत्पाद के आधार पर शुल्क से जुड़े लाभ देती है। प्रभु ने कहा, इन्सेंटिव बढ़ाने से निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है और घरेलू कीमतों में स्थिरता आएगी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि प्याज की थोक कीमतें गिरकर 200 से 250 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गई हैं।
इस साल अप्रैल से अक्टूबर के दौरान देश से नई प्याज का निर्यात 25.6 करोड़ डॉलर (करीब 1,790 करोड़ रुपए) का रहा है। बीते वर्ष 2017-18 में 51.15 करोड़ डॉलर (3,578 करोड़) की प्याज निर्यात हुई। यानी इस साल रफ्तार धीमी है।
इस साल कर्नाटक, गुजरात, मध्यप्रदेश में प्याज का बंपर उत्पादन हुआ है। इससे देश के दक्षिणी और उत्तरी भाग से प्याज की मांग घटी है। इस वजह से महाराष्ट्र का प्याज दूसरे राज्यों में नहीं पहुंच रहा है। इससे प्याज की कीमतों में खासी गिरावट आई है।
केंद्र ने खोपरा उत्पादकों को राहत देने इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2,170 रुपए बढ़ाकर 9,920 रुपए क्विंटल कर दिया है। 2018 में यह 7,750 रुपए प्रति क्विंटल था। इस प्रस्ताव को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने मंजूरी दी। एमएसपी में बढ़ोतरी की मंजूरी कृषि लागत और मूल्य आयोग की सिफारिशों पर आधारित है।
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