रतन टाटा बर्थडे : एक स्टूडेंट ने पूछा था, आप मुख्यमंत्री होते तो क्या करते, रतन टाटा ने दिया था ये जवाब

http://bit.ly/2Ai8qvA

नेशनल डेस्क. 28 दि‍संबर 1937 को जन्‍में (रतन टाटा बर्थडे) रतन टाटा (Ratan Tata) आज 81 साल के हो गए हैं। रतन टाटा पूरी दुनिया के टॉप अमीरों की गिनती में आते हैं और वो चाहे तो सबसे उपर उनका ही नाम होता मगर वो अपनी आमदनी का आधे से भी ज्यादा हिस्सा दान कर देते हैं। मुंबई में हुए एक इवेंट में उनसे एक स्टूडेंट ने पूछा था कि 'आपको एक दिन का सीएम बनने का मौका मिले, तो क्या करेंगे? रतन टाटा ने कहा, 'सीएम कड़ी मेहनत कर रहे हैं। मैं इस उम्र में उनके जितनी कड़ी मेहनत नहीं कर पाऊंगा।' रतन टाटा साल 1991 से लेकर साल 2012 तक टाटा ग्रुप के चेयरमैन रहे। टाटा सालों से मुम्बई के कोलाबा में एक किताबों एवं कुत्तों से भरे हुए बैचलर फ्लैट में रहते हैं। उन्होंने अपने अपमान का बदला लेने के लिए जगुआर जैसी कंपनी खरीद ली थी।

कैसे हुआ था रतन टाटा का अपमान : एक कार्यक्रम में रतन टाटा के बेहद करीबी रहे प्रवीण काडले ने फोर्ड से लिए गए कारोबारी बदले की दिलचस्प कहानी सुनाई थी। कंडाले के मुताबिक, रतन टाटा 1998 में हैचबैक कार इंडिका लेकर आए थे। लेकिन यह लॉन्च बुरी तरह फेल रहा।

- एक साल तक लोगों ने इसे पसंद ही नहीं किया। तब कुछ लोगों ने रतन टाटा को कार डिवीजन बेचने की सलाह दी। उन्होंने भी मान ली।कई कंपनियों से संपर्क किया गया। अमेरिकी कंपनी फोर्ड ने रुचि दिखाई। उसके अधिकारी टाटा के मुख्यालय बॉम्बे हाउस आए।

टाटा को फोर्ड के हेडक्वार्टर बुलाया गया :शुरुआती बातचीत के बाद टाटा को फोर्ड हेडक्वार्टर डेट्रॉयट बुलाया गया।करीब तीन घंटे तक टाटा की फोर्ड से बातचीत हुई। प्रवीण के मुताबिक उनका (फोर्ड कंपनी) रवैया अपमानजनक था।लंबी बातचीत के दौरान कंपनी के चेयरमैन बिल फोर्ड ने कहा कि, "जब आपको पैसेंजर कार के बारे में कुछ पता ही नहीं था तो बिजनेस शुरू क्यों कर दिया। हम इसे खरीदकर आप पर एहसान ही करेंगे।"

ऐसे लिया कारोबारी बदला :प्रवीण के मुताबिक, रतन टाटा ने उसी शाम डेट्राॅयट से न्यूयॉर्क लौटने का फैसला किया।90 मिनट की फ्लाइट में रतन टाटा उदास से रहे। इस घटना के नौ साल बाद 2008 में फोर्ड दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गई।अमेरिकी ऑटो हब डेट्रॉयट की ही हालत खराब हो चली थी। तब टाटा ने फोर्ड का लग्जरी ब्रांड जगुआर-लैंडरोवर (जेएलआर) खरीदने का फैसला किया।बात करने फोर्ड के अधिकारी बॉम्बे हाउस आए थे। सौदा 2.3 अरब डॉलर (उस समय 9300 करोड़ रुपए) में हुआ।तब बिल फोर्ड ने टाटा से कहा- "जेएलआर खरीदकर आप हम पर बहुत बड़ा अहसान कर रहे हैं।"दरअसल जेएलआर से फोर्ड को भारी नुकसान हो रहा था। कुछ ही साल में टाटा जेएलआर को मुनाफे में ले आए।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
ratan tata birthday special : What happens when Ratan Tata becomes CM

कोई टिप्पणी नहीं

Blogger द्वारा संचालित.