पहली बार सुप्रीम कोर्ट, सीबीआई और आरबीआई का झगड़ा सामने आया

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नई दिल्ली. 2018 में सुप्रीम कोर्ट, सीबीआई और आरबीआई की स्वतंत्रता सवालों में रही। सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दखल के आरोप लगाए। सीबीआई डायरेक्टर और स्पेशल डायरेक्टर का झगड़ा इस कदर सड़क पर आया कि दोनों को छुट्‌टी पर भेजना पड़ा। फिर उर्जित पटेल ने कार्यकाल से 8 माह पहले ही आरबीआई गवर्नर पद से इस्तीफा दे दिया।

  1. 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस के बाद चार सबसे सीनियर जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार जज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बात जनता के बीच ले गए। जस्टिस चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, कुरियन जोसेफ और मदन बी लोकुर ने तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर आरोप लगाया कि वह चुनिंदा केस पसंद की बेंचों को ही देते हैं। जजों ने कहा- हम लोकतंत्र बचाने आए हैं। नहीं चाहते कि 20 साल बाद कोई कहे कि हमने अात्मा बेच दी थी। जस्टिस गोगोई अभी चीफ जस्टिस हैं। बाकी तीनों जज रिटायर हो चुके हैं।

  2. सरकार आरबीआई के कैपिटल रिजर्व से 3.5 लाख करोड़ रु. मांग रही थी। आरबीआई ने विरोध किया। सरकार ने आरबीआई एक्ट की धारा 7 का इस्तेमाल किया तो गवर्नर उर्जित पटेल ने 8 माह पहले ही पद से इस्तीफा दे दिया। 61 साल में पहली बार किसी गवर्नर ने यूं इस्तीफा दिया। उनसेे पहले 1957 में गवर्नर रामाराव ने सरकार से विवाद पर इस्तीफा दिया था।

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  3. स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना ने डायरेक्टर आलोक वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत सीवीसी को भेजी। वर्मा ने अस्थाना पर 3 करोड़ रु. की घूसखोरी की एफआईआर करवा दी। अस्थाना के खिलाफ सबूत जुटाने के लिए पहली बार सीबीआई ने अपने ही दफ्तर पर छापा मारा। केंद्र ने 23 अक्टूबर को वर्मा और अस्थाना को जबरन छुट्‌टी पर भेज दिया। एम. नागेश्वर राव को अंतरिम डायरेक्टर नियुक्त किया।

  4. रफाल पर सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिसंबर को कहा कि सौदे पर संदेह का कोई कारण नहीं। कोर्ट ने लिखा कि कैग ने रफाल की कीमत का ऑडिट किया, पीएसी ने कैग की रिपोर्ट देखी है। पर अभी कैग ने कोई रिपोर्ट नहीं दी है। इसके चलते सुप्रीम कोर्ट की क्लीन चिट के बावजूद आक्रामक विपक्ष जेपीसी की मांग कर रहा है। सरकार ने फैसले में संशोधन की मांग की है। कहा- हमने सिर्फ प्रक्रिया बताई थी। कोर्ट ने गलत समझा।

  5. केंद्र सरकार ने 28 नवंबर को बैक सीरीज के जीडीपी आंकड़े जारी किए। इसमें 2005-06 से 2011-12 तक यूपीए सरकार के समय की ग्रोथ रेट 2.1% तक घट गई। पुराने आंकड़ों में इन 7 सालों में से 4 साल ग्रोथ रेट 9% से ज्यादा थी। संशोधित आंकड़ों में एक साल भी ग्रोथ 9% तक नहीं पहुंच सकी। 2010-11 में ग्रोथ रेट सबसे अधिक 10.3% थी, जो संशोधित होकर 8.5% रह गई।

  6. सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के आलोचक पत्रकार जमाल खशोगी की गुमशुदगी दुनियाभर में सुर्खियांे में छाई रही। जमाल खशोगी शादी के लिए डॉक्यूमेंट लेने इस्तांबुल स्थित सऊदी अरब के काउंसलेट गए थे, लेकिन बाहर नहीं निकले। तुर्की की जांच में सऊदी अरब के 12 नागरिक हत्या के आरोपी बनाए गए। 4 आरोपियों के तार प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से जुड़े हैं।

  7. उत्तर प्रदेश सरकार का एक के बाद एक शहरों के नाम बदलना भी विवादों में रहा। अक्टूबर में योगी सरकार ने इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किया था। इसके बाद दीपावली से ठीक एक दिन पहले योगी ने फैजाबाद का नाम अयोध्या कर दिया। सपा और कुछ मुस्लिम संगठन इसके विरोध में उतरे। सोशल मीडिया पर इसी से जुड़ा हैशटैग (#आज से तुम्हारा नाम...) टॉप ट्रेंड्स में शामिल हो गया।

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  8. मार्च में दक्षिण अफ्रीका दौरे पर अॉस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम बॉल टैम्परिंग के आरोपों में घिरी। कप्तान स्टीव स्मिथ और उप-कप्तान डेविड वॉर्नर पर 1 साल का बैन लगा। तब से अॉस्ट्रेलिया 28 में से 16 मैच हार चुकी है। {महिला टी-20 वर्ल्ड कप में मिताली राज और कोच रमेश पोवार में विवाद हुआ। बाद में डब्ल्यू वी रमन नए कोच बने।

  9. नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) के जुलाई में जारी संशोधित ड्राफ्ट में असम के 2.89 करोड़ लोगों को नागरिक माना गया। 40 लाख नाम सूची में नहीं थे। जिनके नाम एनआरसी में नहीं थे, उन्हें और मौका दिया गया है। ये 31 दिसंबर तक अपनी नागरिकता के सबूत पेश कर सकते हैं।



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      biggest controversies of 2018 in India and worldwide supreme court RBI CBI
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